पाकिस्तान: कोरोना की आड़ में 'गायब' किए 1800 आतंकी

    दिनांक 21-अप्रैल-2020   
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कोरोना संकट से जूझते विश्व में अगर कोई देश अपनी नापाक हरकतों को लगातार गुपचुप अंजाम दे रहा है तो वह देश है पाकिस्तान। पिछले दिनों खबर मिली थी कि उसने कोरोना संक्रमण के मरीजों और मृतकों की सही संख्या छुपाई थी। अब पता चला है कि उसने अपनी आतंकियों की सूची में से कई नाम गुपचुप तरीके से रातोरात हटा दिए हैं। उस सूची में जहां कभी 7600 आतंकियों के नाम थे, अब उसमें कुल 3800 नाम रह गए हैं

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यह खुलासा किया है अमेरिका की एक एजेंसी ने न्यूयॉर्क स्थित कास्टेलम डॉट एएल कंपनी है। यह अमेरिका की नियामक प्रोद्योगिकी कंपनी है। कंपनी ने अपनी ताजा रपट में यह बताया है कि पिछले दिनों पाकिस्तान ने अपनी आतंकियों की सूची में से बहुत बड़ी तादाद में लोगों के नाम गुपचुप हटा दिए हैं। हटाए गए आतंकियों की संख्या करीब 18 सौ बताई जा रही है। इस घिनौनी हरकत को पाकिस्तान ने सिर्फ मार्च में ही अंजाम दिया है।
उल्लेखनीय है कि विश्व में आतंकियों को आर्थिक मदद देने के वाले देश के रूप में वैश्विक एंटी मनी लांड्रिंग संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को चिन्हित किया था। उसे आतंकवादियों को वित्तिय मदद पहुंचाने के आरोप में काली सूची में डालने की बात कही थी। पर उससे पहले खुद को संभालने और अपनी गिरेबां साफ करने के लिए जून 2020 तक का वक्त दिया गया है। तब तक उसे ग्रे सूची में रखा जाएगा। आगामी जून में उसकी पुन: समीक्षा होनी है। शायद अपना दामन साफ दिखाने के लिए पाकिस्तान ने यह चाल चली है, ऐसा अमेरिकी एजेंसी का मानना है।
लेकिन इसके बावजूद उसका अपनी हरकतों से बाज आने का कोई इरादा नहीं दिखता। जिहादी संगठनों को पैसे और समर्थन देने का क्रम जारी है। बताया जा रहा है कि आतंकी कम दिखाने के पीछे मकसद यही है कि एफ़एटीएफ को यह कहकर बहकाया जा सके कि उसके यहां आतंकियों को प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। भारत की दृष्टि से चिंता की बात यह है कि हटाए गए आतंकवादियों के नामों में उस लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर्रहमान का भी नाम भी है जो मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड बताया जाता है।
एफटीएफ का शिकंजा कड़ा होने के बाद पाकिस्तान ने अपने यहां एक राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी प्राधिकरण बनाया था, जिसकी सूची में ऐसे लोगों के नाम थे जिन पर आतंक में सम्मिलित होने का संदेह था। इसका उद्देश्य यह था कि वह अपने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उन लोगों को 'पैसा देने' से रोक सके। जब यह सूची बनाई गई थी तब इसमें क्षेत्र 7600 लोगों के नाम थे लेकिन अब मार्च के बाद इस सूची में कुल 3800 नाम रह जाना हैरानी पैदा करता है। एजेंसी ने यह भी बताया है कि हटाए गए लोगों में कई नाम अमेरिका और यूनाइटेड नेशन की सूची में सूचीबद्ध आतंकवादियों के नामों से मेल खाते हैं।
उधर पाकिस्तान के एक अधिकरी की मानें तो, हटाए गए आतंकवादियों के नामों की अभी तक कोई अधिकृत जानकारी नहीं दी है और ना ही कोई स्पष्टीकरण दिया है। उसने इतना जरूर कहा है कि सरकार 'आतंकवाद के खिलाफ' जो कार्रवाई कर रही है, यह एफ़एटीएफ को दामन साफ दिखाने के प्रयास के तहत किया गया है।
यह वही शरारती पाकिस्तान है जिसने पिछले दिनों स्थनीय आबादी के तमाम विरोध के बावजूद बंदूक की नोक पर कोरोना के संक्रमितों को बलूचिस्तान और क्वेटा में मरने के लिए छोड़ दिया है। पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर के लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री इमरान खान जनरल बाजवा की सलाह पर ऐसा कर रहे हैं ताकि उस इलाके के लोगों में कोरोना संक्रमण फैले।
एक तरफ आतंकियों को पोसना और दूसरी तरफ जानबूझकर पीओके में कोरोना संक्रमितों को बिना किसी सुविधा के छोड़ना, ये हाल की दो ऐसी घटनाएं हैं जो पाकिस्तान की नीयत पर कोई शुबहा नहीं छोड़तीं।