कोरोना संकट: देशभर में सेवाकार्य करने में जुटे संघ के स्वयंसेवक

    दिनांक 22-अप्रैल-2020   
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कोविड -19 से संपूर्ण विश्व प्रभावित है। स्थितियां कब तक सामान्य होंगी इसके संबंध में अभी कुछ भी स्पष्ट कह पाना मुश्किल है। ऐसी परिस्थितियों में भी संघ के स्वयंसेवक लगातार सेवाकार्यो में जुटे हुए हैं

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जब - जब देश पर कोई आपदा आई तब - तब संघ के स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ भाव से आगे आकर पीड़ित लोगों की सेवा का बीड़ा उठाया। केदारनाथ की आपदा सहित सैकड़ों उदाहरण इस बात के प्रमाण हैं जब संघ के स्वयंसेवकों ने आगे आकर काम किया। चरखी - दादरी (हरियाणा) की घटना के समय संसद में भी संघ के स्वयंसेवकों के कार्यों की प्रशंसा हो चुकी है। देश के गणमान्य महापुरुषों एवं न्यायालय ने भी संघ के स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवा की प्रशंसा की है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान भी सेवा के लिए संघ आगे आया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह माननीय भैय्या जी जोशी ने 20 मार्च को अपने वक्तव्य में कोरोना वायरस से निपटने के प्रधानमंत्री जी के सभी प्रयासों का समर्थन करते हुए संदेश जारी कर देश को विश्वास दिलाया कि सभी स्वयंसेवक समाज जागरण में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर इस चुनौती का सामना करने में अपना योगदान देंगे। सरकार्यवाह जी ने स्वयंसेवकों को प्रशासन के साथ जुड़ने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था की "स्वयंसेवक छोटी-छोटी टीम बनाकर समाज में स्वच्छता, स्वास्थ्य जागरूकता लाने का कार्य करें। इस आह्वान के बाद से ही देश के अलग-अलग राज्यों में संघ के स्वयंसेवक सेवा कार्य में जुट गए हैं। संपूर्ण देश में सेवा भारती (सेवा संस्था) के नाम से व्यवस्थित प्रयास हुआ। ऐसे गरीब क्षेत्रों का चयन जहां पर जरूरतमंदों को भोजन की आवश्यकता है उनका निर्धारण किया गया। चिन्हित क्षेत्रों में प्रतिदिन भोजन पहुंचाने का कार्य सुचारू रूप से चला। किट बनाकर कच्ची भोजन सामग्री भी परिवारों में पहुंचाई गई। संपूर्ण देश में लगभग 51 लाख भोजन पैकेट एवं 12 लाख कच्चे राशन की किट सेवा भारती के द्वारा वितरित की जा चुकी है। अभी भी कार्य निरंतर जारी है।
संघ कार्य के प्रति द्वेष भाव रखने वाले लोग संघ पर मुस्लिम समाज का विरोधी होने का आरोप लगाते हैं। जबकि कश्मीर घाटी में सेवा भारती के कार्यकर्ता देवदूत बनकर वहां मुस्लिम समाज की भी सेवा कर रहे हैं। मुस्लिम समाज के बंधुओं एवं मुस्लिम बहनों को लगता है कि संकट की घड़ी में संघ ही हमारे साथ खड़ा है। दलित विरोध का आरोप लगाने वालो को अनुसूचित एवं मजदूरों की बस्ती के बीच जाने से ज्ञात होगा कि इस संकट में उनको सहायता करने के लिए संघ के स्वयंसेवक ही उनके बीच में गए हैं। लगभग 1 लाख प्रवासी मजदूरों को भोजन सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने पहुंचाया है। घुमंतू परिवारों में सहायता पहुंचाने का कार्य भी सेवा भारती के कार्यकर्ता कर रहे हैं। 10 लाख से अधिक फेस कवर सेवा भारती के माध्यम से वितरित हुए है। स्वयंसेवकों द्वारा स्थान स्थान पर स्वच्छता कर्मियों को स्वच्छता सम्मान, पुलिस बलों एवं स्वास्थ्य कर्मियों पर पुष्प वर्षा करके उनका सम्मान करने का कार्य भी किया है। मुंबई (महाराष्ट्र) मे वहां की सेवा भारती ने प्रतिदिन सब्जी पहुंचाने का कार्य हजारों परिवारों में किया है। प्रवासी मजदूरों को आनंद विहार टर्मिनल (दिल्ली) पर रोटी एवं मास्क सेवा की प्रशंसा पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' ने अपने अंक में की है। मानव मात्र की सेवा से इतर जाकर बरेली एवं फिरोजाबाद में पशु एवं पक्षियों को पानी एवं चारा देने की व्यवस्था वहां के स्वयंसेवकों ने की है। सीधे सेवा भारती के सहायता केंद्रों पर फोन करके लोग सहायता मांगते हैं और कार्यकर्ता वहां पहुंच जाते हैं। इस कारण समाज में भी यह विश्वास हो गया है कि इस संकट की घड़ी में संघ ही हमारे साथ खड़ा है। रक्तदान, वृद्धों को दवाइयां पहुंचाने सहित सभी कार्य सेवा भारती के कार्यकर्ता कर रहे हैं। वर्णित उपरोक्त सभी सेवा कार्य संघ द्वारा संचालित सेवा भारती संस्था के द्वारा किए गए हैं। संघ विचार परिवार के सभी संगठनों ने इस सेवा कार्य में अपना योगदान किया है। विश्व हिंदू परिषद के 28 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने 28 लाख से अधिक लोगों को भोजन पैकेट एवं 3.5 लाख परिवारों को कच्चे राशन की व्यवस्था की है। दूध,वृद्ध लोगों को दवा, घरों में सब्जियों के साथ-साथ, गायों के लिए चारे की व्यवस्था भी परिषद के कार्यकर्ता कर रहे हैं। दिल्ली में 3500 गरीबों को प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था मजदूर संघ कर रहा है। अब तक मजदूर संघ 35000 लोगों को भोजन एवं 7000 लोगों को राशन वितरित कर चुका है। लेकिन समाज में अनेक सामाजिक, व्यवसायिक एवं धार्मिक संस्थाएं जो इस संकट की घड़ी में स्वतंत्र रूप से सेवा के लिए आगे आई हैं उनको संचालित करने वाले अनेक लोगों के पीछे भी संघ प्रेरणा एवं संघ संस्कार ही दिखाई देंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर संकट की घड़ी में निस्वार्थ सेवा के लिए इतना आगे आता है अनेक आयामों के माध्यम से जहां जैसी आवश्यकता होती है वैसा कार्य उनके स्वयंसेवक करने लगते हैं इसका कारण संघ की शाखा में मिलने वाले संस्कार हैं, जो शाखा में होने वाले शारीरिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों की देन है इसलिए यदि किसी को संघ को समझना है तो पत्र-पत्रिकाओं एवं अन्य संस्थाओं से तुलना करके नहीं, संघ शाखा जाने से ही समझा जा सकता है।
कोरोना संक्रमण के विस्तार में प्रत्येक प्रदेश में जमातियों की भूमिका को सभी स्वीकार करते हैं। जमातियों ने अपने को छुपाया। क्वारंटाइन होने पर स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अश्लील व्यवहार किया। उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए प्रयास करने वाले पुलिसकर्मियों पर हमले के अनेक समाचार हम पढ़ एवं सुन रहे हैं। थूकने से लेकर रोहिंग्या से संबंधों के कारण संपूर्ण जमात के प्रति देश में अविश्वास का वातावरण निर्माण हुआ है। वहीं संघ ने बेंगलुरु में होने वाली अपनी अखिल भारतीय बैठक को स्थगित कर दिया जो संघ के इतिहास मे पहली बार हुआ। संघ में कार्यकर्ता निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम उसके द्वारा आयोजित प्रतिवर्ष होने वाले संघ शिक्षा वर्ग हैं। जिसका आयोजन अप्रैल मध्य से जून अंत तक होता है। इस वर्ष संघ ने अपने वर्ग भी कोरोना के कारण स्थगित कर दिए हैं। सोशल डिस्टेंसिंग एवं लॉक डाउन का पालन ठीक प्रकार से हो इस कारण खुले मैदान पर चलने वाली शाखाओं को भी परिवार शाखा में परिवर्तित करने का निर्णय किया है। उसका कारण संघ देश के सुख में सुखी एवं दुख के समय दुख बांटने के लिए सक्रिय रहता है।
हम सभी जानते हैं कि संघ हिंदू समाज का संगठन करता है। संकट के समय संघ के स्वयंसेवक मानवता की सेवा के लिए सक्रिय होते हैं और सेवा करते समय वह यह विचार नहीं करते कि सेवित व्यक्ति किस धर्म, जाति, क्षेत्र का है। वह "नर सेवा, नारायण सेवा" का मंत्र लेकर सक्रिय हो जाते हैं। उसका मूल कारण उनका आदर्श है "सर्वे भवन्तु सुखिन:" (सभी सुखी हो ) आज संपूर्ण देश में पर्यावरण संरक्षण, गौ सेवा, ग्राम विकास जैसे अनेक आयामों के माध्यमों से संघ व्यवस्था परिवर्तन में लगा है। यह सभी कार्य बिना प्रसिद्धि की चाह के असंख्य स्वयंसेवक देश एवं विश्व के अनेक देशों में कर रहे हैं। ऐसे सभी प्रयास प्रशंसा एवं अनुकरण के योग्य है। आओ हम सब इसका अभिनंदन करें।
( लेखक भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री हैं )