पाकिस्तान: हैशटैग अभियान चलाने वाले अरबी हिंदू लड़कियों के कन्वर्जन पर क्यों साध लेते हैं चुप्पी ?

    दिनांक 22-अप्रैल-2020   
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चुंदीको में एक चालीस साल के अधेड़ ने जबरन 14 साल की हिंदू लड़की सुति का मजहब बदलवाकर निकाह पढ़ा दिया। यह उस दौर में हो रहा है जब पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण कहर बरपा रहा है। लेकिन इस सबके बावजूद कटृटरपंथी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे

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कोरोना संक्रमण से बुरी तरह जूझते पाकिस्तान में हिंदू बच्चियों के अपहरण और जबरन इस्लाम कबूलवाने का खेल बंद नहीं हुआ है। आपा-धापी के इस दौर में भी सरहद पार से ऐसी खबरें निरंतर आ रही हैं। मगर ऐसी घटनाओं पर अरब देशों में बैठककर भारत में कथित मुस्लिम उत्पीड़न को लेकर हैशटैग अभियान चलाने चुप्पी साधे हुए हैं।
संयुक्त अरब अमीरात की एक्टिविस्ट नूरा हैशटैग अभियान की मुख्य सूत्रधार हैं। उनके अलावा इस अभियान में यूएई की राजकुमारी भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी ओर से यूएई में कारोबार करने वाले सौरभ भारद्वाज के खिलाफ मामला दर्ज कराने के बाद से वह भूमिगत हैं। इस समय यूएई के देशों में 40 लाख भारतीय रहते हैं। उन्हें चेतावनी दी गई है कि यदि वे मुस्लिमों के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक बोलते पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अरब के लोगों के मुंह से पाकिस्तान के बहुसंख्यकों द्वारा वहां के हिंदुओं के विरूद्ध की जा रही ज्यादतियों पर एक शब्द नहीं बोला जा रहा।
पिछले दिनों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चुंदीको में एक चालीस साल के अधेड़ ने जबरन 14 साल की हिंदू बालिका सुति का मजहब कराकर निकाह पढ़ा दिया। इस घटना को सबसे पहले उजागर करने वाली पत्रकार नाइला इनायत व्यंगात्मक लहजे में कहती हैं कि कोरोना संक्रमण आज नहीं तो कल खत्म हो जाएगा, मगर पाकिस्तान में मजहब परिवर्तन का वायरस कभी काबू में नहीं आने वाला।
पाकिस्तान में आज की तारीख में कोराना के 9,749 रोगी हैं तथा इस महामारी से अब तक 209 लोग जान गवां चुके हैं। सर्वाधिक हिंदू जनसंख्या वाले सिंध प्रांत में इस समय कोरोना के करीब साढ़े तीन हजार रोगी हैं। पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों को इंसाफ दिलाने को संघर्षरत कपिल कहते हैं कि उम्मीद थी कि कोराना महामारी के इस दौर में पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर लगाम लग जाएगी, पर ताजी घटना ने मायूस किया है।
हर साल हजारों लड़कियों का किया जाता है जबरन मजहब परिवर्तन
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है प्रत्येक वर्ष जबरन मजहब परिवर्तन के तकरीबन एक हजार मामले दर्ज कराए जाते हैं। ऐसे मामले में अधिकतर शिकार होने वाली हिंदू, सिख और ईसाई लड़कियां होती हैं। पाकिस्तान में नाबालिगों के मजहब परिवर्तन पर रोक है लेकिन यह सिर्फ दिखावटी ही है। आयोग से जुड़े मेहदी हसन कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में लड़कियां 18 वर्ष से कम उम्र पाई गईं हैं। चूंकि ये गैर मुस्लिम हैं, इसलिए ऐसी घटनाओं को सरकार, प्रशासन, सामाजिक संगठन और मुस्लिम समाज गंभीरता से नहीं लेता। हिंदू लड़कियों का मजहब परिवर्तन कराने के मामले में मिट्ठू मियां नामक एक मौलवी बेहद कुख्यात है। पिछले वर्ष इसके गुर्गों ने एक हिंदू लड़की का अपहरण करने के बाद जब उसे इस्लाम में कन्वर्ट करने का प्रयास किया तो वह भाग कर एक हिंदू शिक्षक के घर छुप गई थी। बाद में ईशनिंदा का बहाना बनाकर मिट्ठू मियां ने हिंदुओं के साथ मारपीट की थी तथा उनके घरों तथा धर्मस्थलों को आग के हवाले कर दिया। पिछले साल सिंध के जकोकाबाद से अरोक कुमारी, ननकी कुमारी और महक कुमारी का अपहरण कर लिया गया था। इसी तरह सिंध के बदिन में अपने खेतों से काम कर लौट रही दो हिंदू बहनों का अपहरण कर इस्लाम कबूलवाने की कोशिश की गई थी। उन लड़कियों के मां-बाप ने फिरौती के तौर पर साढ़े तीन लाख रुपये अदा कर अपहरणकर्ताओं से उन्हें छुड़ाया था। मगर ऐसे मामलों पर हिंदुस्थान की सेकुलर जमातें तथा मुसलमानों की ज्यादतियों का रोना रोने वाले हमेशा खामोश ही रहे हैं।