बाज़ आने को तैयार नहीं शहज़ादा

    दिनांक 22-अप्रैल-2020   
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जिस खानदान में राहुल समेत पिछली चार पीढ़ियों से किसी ने कोई ख़ास काम-धंधा नहीं किया उस खानदान के पास अकूत संपत्ति कैसे आई? फिर भी राहुल गांधी में इतना दुस्साहस है कि वो रात-दिन ‘अमीर-गरीब’ वाली कम्युनिस्ट चाल चलते रहते हैं. कोरोना के इस अभूतपूर्व संकटकाल में भी शहज़ादा बाज आने को तैयार नहीं. भारत में कम कोरोना टेस्ट का झूठ भी लगातार बोला जा रहा है

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राहुल गांधी कितना नीचे जा सकते हैं ये आप कभी तय नहीं सकते. राजनीति के हाशिये पर खड़े राहुल गांधी अपनी सियासत की साँस चलाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. देश में सब तरफ कोरोनावायरस का कोहराम है. मरीजों का आंकडा तेजी से बढ़ रहा है. ज़रूरत है लगातार सेनिटाइजेशन की. इसलिए सरकार अतिरिक्त चावल से सैनेटाइज़र बनाने का फैसला किया. राहुल को इसमें मौक़ा दिखा गया. राहुल ने ट्वीट किया “आख़िर हिंदुस्तान का ग़रीब कब जागेगा? आप भूखे मर रहे हैं और वो आपके हिस्से के चावल से सेनेटाइज़र बनाकर अमीरों के हाथ की सफ़ाई में लगे हैं.” नैतिक पतन की पराकाष्ठा तक जा पहुंचे कांग्रेस के शहजादे ने एक बार फिर झूठ और भ्रम को अपना हथियार बनाकर मोदी पर चलाया है लेकिन इससे सबसे ज्यादा नुकसान सिर्फ देश के गरीब और अर्धशिक्षित नागरिकों को ही होने वाला है. राहुल के इस बयान का सीधा मतलब ये निकलता है कि सेनेटाइज़र एक बेकार चीज़ है जिसकी देश को,नागरिकों को वास्तव में आवश्यकता नहीं है.
पुराना कांग्रेसी वायरस
क्या कोरोनावायरस सिर्फ अमीरों को प्रभावित कर रहा है? क्या गरीबों के हाथों को सेनिटाजेशन की ज़रुरत नहीं है? क्या सिर्फ अमीरों के लिए सेनेटाइज़र की ज़रुरत है? राहुल गाँधी का ये बयान साबित करता है कि वैचारिक रूप से दिवालिया हो चुकी कांग्रेस की पटकथा वामपंथियों द्वारा लिखी जा रही है. अमीर की क्या परिभाषा होती है राहुल जी? एक खेतिहर मजदूर के लिए बैंक का एक क्लर्क रईस हो सकता है. एक रिक्शाचालाक के लिए एक किराना व्यवसायी रईस हो सकता है. आप कम्युनिस्ट सडांध में से निकले अपने सियासी दाव-पेच आजमाकर देश में नकारात्मकता और वर्ग संघर्ष फैलाने की साज़िश कर रहे हैं ? वास्तव में “अमीरी-गरीबी” की रट पुराना कांग्रेसी वायरस है. जहाँ एक ओर कांग्रेस का नेतृत्व अमीरों को गाली देता है और गरीबी पर घडियाली आँसू बहाता है और दूसरी तरफ उसकी छांव में उसके करीबी आर्थिक साम्राज्य खड़े करते रहते हैं. इधर गाँधी खानदान की संपत्ति बढ़ती जाती है. वाड्रा पलते हैं. घोटाले पनपते हैं.
“हाथ” की सफाई

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राहुल कहते हैं कि “ ...वो आपके हिस्से के चावल से सैनेटाइज़र बनाकर अमीरों के हाथ की सफ़ाई में लगे हैं.” राहुल जी ! किस हाथ की सफाई की बात कर रहे हैं आप? नेशनल हैराल्ड घोटाले वाली हाथ की सफाई की, जिसमें आप और आपकी माता जमानत पर चल रहे हैं या आपके मिशेल मामा के ऑगस्टा वेस्टलैंड वाले कारनामे की? घोटालों की लंबी फेहरिस्त जुड़ी है आपके पीछे. राहुल जी ! आप, आपकी माता और आपकी बहन व जीजा की गिनती भी देश के बड़े रईसों में होती है. आपके जिस खानदान में आपके समेत पिछली चार पीढ़ियों से किसी ने कोई काम-धंधा नहीं किया उस खानदान के पास अकूत संपत्ति कैसे आई? बिना कुछ किए आप साल में कई-कई विदेश यात्राएँ और सैरसपाटे करते हैं, वो भी देश से छिपाकर. फिर भी आपमें इतना दुस्साहस है कि आप देश में अमीर-गरीब का वर्ग विभेद खड़ा करने वाले, झगड़े करवाने वाले कम्युनिस्ट हथकंडों का बेतरह इस्तेमाल करते रहते हैं.
आप रात दिन अम्बानी-अदानी को कोसते हैं? क्या बड़ा उद्योगपति होना गुनाह है? ये उद्योगपति लाखों को रोजगार देते हैं. देश को अरबों रुपए का राजस्व देते हैं. क्या ये अम्बानी-अदानी आप जैसे भ्रष्टाचार में डूबे नेताओं से लाख गुना बेहतर नहीं हैं? लेकिन आप और आपके मणिशंकर अय्यर जैसे कम्युनिस्ट उस्ताद इनके खिलाफ बयानबाजी करके सियासत की रोटियाँ सेंकते हैं. अम्बानी और महिंद्रा जैसे उद्योगपति कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अमूल्य योगदान दे रहे हैं. आप क्या कर रहे हैं, “अमीरों”को गाली देने के अलावा?
इस मौके पर तो बख्श दो देश को...
ये साबित हो चुका है कि आप बेधड़क झूठ बोलते हैं. झूठ बोलकर अदालतों से फटकार खाते हैं, और अदालत में माफी मांगकर बिना किसी लज्जा के फिर झूठ बोलने लगते हैं. 2019 के लोकसभा चुनावों में आपने देश के जनजातीय इलाकों में जाकर कहा कि “नरेंद्र मोदी ने ऐसा क़ानून बनाया है जिसमें आदिवासियों को गोली मारी जा सकेगी.” कहाँ लिखा है ये क़ानून? देश में जनजाती इलाके पहले से ही अनेक समस्याओं से ग्रस्त हैं. आप और आपके शहरी नक्सली इन इलाकों को सुलगाने के लिए झूठी कथाएँ बांच रहे हैं. आपने रफाएल विमान पर हर साँस में झूठ बोला. आप और आपके अवार्ड वापसी गिरोह ने ‘असहिष्णुता’ का शोर मचाकर देश का नाम दुनिया में खराब किया. आपने देश को लिंचिस्तान कहकर बदनाम किया. आपने सीएए और एनआरसी को लेकर लगातार फरेब फैलाया. आप और आपकी बहन ने धारा 370 को लेकर कश्मीर में आग लगाने की कोशिश की. अब इस संकटकाल में आप सैनेटाइज़र जैसी बेहद ज़रूरी चीज़ को लेकर खालिस राहुल गाँधी मार्का सियासत कर रहे हैं. कम से कम इस मौके पर तो देश को बख्श देते.
कोरोना परीक्षण पर राहुल का सफ़ेद झूठ
राहुल जी! कोरोना को लेकर आपने हाल ही में जो ऑनलाइन पत्रकारवार्ता की थी उसमें आपने कहा कि ‘लॉकडाउन’ कोरोना का इलाज नहीं है. तो क्या आप बता सकते हैं कि कोरोना का इलाज क्या है? आप हमेशा से अजीबो गरीब बातें करने और अपनी कुंठा को भड़काऊ बयानबाजी करके छिपाने के लिए मशहूर हैं. आपने कहा कि हमें “स्मार्ट लॉकडाउन” ज़रुरत है. क्या आप समझाएंगे कि आपके अनुसार ये “स्मार्ट लॉकडाउन” क्या होता है? आप और आपके दरबारी बार-बार हल्ला मचा रहे हैं कि भारत में कोरोना के परीक्षण कम क्यों हो रहे हैं?
सच ये है कि भारत में कोरोना जिस अनुपात में फ़ैला है उसके अनुसार परीक्षणों की संख्या पर्याप्त है. मरीज और परीक्षणों का अनुपात दूसरे विकसित देशों से कहीं ज्यादा है. इसकी तुलना उन देशों से नहीं की जा सकती जहां कम्युनिटी ट्रांसमिशन हो रहा है.
अमेरिका में 7 लाख 64 हजार कोरोना के मरीज हैं और उसने कुल 41 लाख परीक्षण किए हैं. याने मरीज और परीक्षण का अनुपात 5.3 बैठता है. भारत में 17 हजार 600 कोरोना के मरीज सामने आए हैं और अब तक 4.5 लाख परीक्षण किए गए हैं. यहाँ मरीज और परीक्षण का अनुपात 25.5 बैठता है. अर्थात अमेरिका से 5 गुना ज्यादा. दुनिया में कहीं भी कोरोना के लक्षणों के बिना या कोरोना संक्रमित व्यक्ति से संपर्क की आशंका के बिना परीक्षण नहीं किया जा रहा है. वास्तव में दुनिया कोरोना से लड़ने के प्रधानमंत्री मोदी के तरीके की तारीफ़ कर रही है जिसमें डब्ल्यूएचओ भी शामिल है. लेकिन आप झूठ बोले जाइए राहुल जी. इसी पर आपकी सियासत की सांस चल रही है.