चौरासी कोसी परिक्रमा के चलते फंसे संन्यासियों को राहत सामग्री पहुंचा रहे संघ कार्यकर्ता

    दिनांक 22-अप्रैल-2020
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लॉकडाउन की वजह से चित्रकूट धाम में साधु—संन्यासी फंस गए थे। इनके सामने भोजन का संकट था। जब इन साधु—संन्यासियों के बारे में दीनदयाल शोध संस्थान को पता चला तो संस्थान के कार्यकर्ताओं ने समाज के सहयोग से इनके भोजन-राशन उपलब्ध करवाने का जिम्मा उठाया। कार्यकर्ता स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेकर संतों की सेवा में जुट गए हैं

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लॉकडाउन के कारण काफी संख्या में देश के विभिन्न अंचलों से विभिन्न संप्रदायों के संतों और नागा साधुओं के साथ गृहस्थों का जत्था चित्रकूट के जंगल में अलग-अलग आश्रमों में रुका हुआ है। इसमें से एक बड़ी संख्या ऐसे साधु-संतों की है जो 84 कोसी परिक्रमा कर रहे थे। 24 मार्च को यह परिक्रमा चित्रकूट में आकर पूर्ण तो हो गई, लेकिन 24 मार्च की रात्रि को वैश्विक महामारी कोरोना की दस्तक के कारण घोषित लॉकडाउन की घोषणा ने संतों की वापसी यात्रा को विराम दे दिया। नजदीक के स्थानों के लोग तो लॉकडाउन की सूचना पाते ही अपने गंतव्य को प्रस्थान कर गए लेकिन दूरदराज के राज्यों से आए लोग जहां थे, वहीं रुक गए। लॉकडाउन की वजह से चित्रकूट धाम में फंसे नागा साधुओं ने अब जंगलों में ही धूनी रमा ली है। ऋषि परंपरा अनुसार ये लोग किसी एक स्थान पर स्थिर नहीं रहते। अपना दैनिक भोजन भी रमते हुए ही भक्तों के पास से जुटाते हैं। जब इन साधु—संन्यासियों के बारे में दीनदयाल शोध संस्थान को पता चला तो संस्थान के कार्यकर्ताओं ने समाज के सहयोग से इन साधु—संतों को भोजन—राशन उपलब्ध करवाने का जिम्मा उठाया। कार्यकर्ता स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेकर संतों की सेवा में जुट गए हैं। इसके लिए ये कार्यकर्ता कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके साधु संन्यासियों के पास पहुंचते हैं। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और ऊंचे-नीचे चट्टानी रास्तों को पार कर कार्यकर्ता संन्यासियों तक राशन एवं फलाहार पहुंचा रहे हैं।
साधु-संतों ने दिया कोरोना से जीत का आशीर्वाद

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भारत पर जब भी कोई आपदा, संकट या संघर्ष नजर आया, तब—तब यहां के साधु संन्यासी राष्ट्र हित में सरकार और समाज के साथ खड़े नजर आए हैं। दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता जब राहत सामग्री लेकर इन ऋषियों के पास पहुंचे तो उन्होंने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जीत का आशीर्वाद दिया।