पाकिस्तान: जकात, फितरा और खैरात से राहत सामग्री बांटी जा रही है, जिसमें हिंदू और ईसाइयों का कोई हक नहीं

    दिनांक 23-अप्रैल-2020
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कोराना वायरस के फैलाव ने पाकिस्तानियों की एक और घिनौनी तस्वीर दुनिया के सामने पेश की है। यहां अल्पसंख्यकों को एक-एक रोटी के लिए तरसाया—तड़पाया जा रहा है। महामारी से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बिल्कुल जमीन पर आ गई है। विशेषकर हिंदुओं की दशा बेहद खराब है। इमरान खान सरकार द्वारा गरीबों को थोड़ी-बहुत जो सहायता पहुंचाई जा रही है, वह केवल मुसलमानों को दी जा रही है। राहत देने में खुले तौर पर भेदभाव बरता जा रहा है

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पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कोरोना कहर बरपा रहा है। इससे सबसे ज्यादा अगर कोई यहां प्रभावित है तो वह हिंदू ही हैं। बावजूद इसके न तो उन्हें कोई सुविधा दी जा रही है और न ही सहायता के नाम पर राहत सामग्री। सरकार से लेकर इस्लामिक संगठन हिन्दुओं को प्रताड़ित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे। ऐसे में इमरान खान सरकार का कथित ‘अल्पसंख्यक हितैशी’ और कट्टर मजहबी सोच वाला अमानवीय चेहरा खुलकर सामने है। इस महामारी के बहाने इस देश में अल्पसंख्यकों की जमीन इतनी तंग कर दी गई कि वे एक-एक रोटी के लिए कड़ा संघर्ष करने को मजबूर हैं। तकरीबन पौने दो साल पहले इमरान खान जब सत्ता में आए थे तो लंबी-लंबी हांकते हुए उन्होंने ‘नए पाकिस्तान’ में देश के अल्पसंख्यकों को तरह-तरह के सपने दिखाए। यही नहीं इमरान बात-बेबात भारत को नसीहत दिया करते थे कि अल्पसंख्यकों के उत्थान और विकास के लिए कैसे काम किया जाता है, कोई उनसे सीखे। हालांकि उनकी यह ढकोसलेबाजी ज्यादा दिनों तक नहीं चली और अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं, सिखों एवं ईसाइयों के साथ ज्यादतियों का सिलसिला बढ़ता ही गया। एक आंकड़े के अनुसार, पाकिस्तान में प्रत्येक वर्ष तकरीबन दस हजार अल्पसंख्यक बच्चियों का अपहरण कर उनसे जबरन इस्लाम कबूलवाया जाता है। फिर औने-पौने कीमत पर उन्हें बेच दिया जाता है। लड़कियां खरीदने वाले चाइनीज गिरोह का हाल में भंडाफोड़ हो चुका है। कुछ दिनों पहले जिहादियों ने सिखों के प्रथम गुरू गुरूनानक देव जी के जन्मस्थल ननकाना साहब पर हमला कर दिया था। हिंदू युवाओं को हिंदुस्थानी जासूस बताकर उन्हें गायब करने की घटनाएं भी बढ़ी हैं।
दाने-दाने को तरस रहे हिन्दू
इन सबके बीच कोराना वायरस के फैलाव ने पाकिस्तानियों की एक और घिनौनी तस्वीर दुनिया के सामने पेश की है। यहां अल्पसंख्यकों को एक-एक रोटी के लिए तरसाया, तड़पाया जा रहा है। महामारी से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बिल्कुल जमीन पर आ गई है। लॉकडाउन के चलते यहां की 45 प्रतिशत आबादी सड़कों पर है। गरीबों के पास न काम है और न ही एक वक्त का भोजन। विशेषकर हिंदुओं की दशा बेहद खराब है। इमरान खान सरकार द्वारा गरीबों को थोड़ी-बहुत जो सहायता पहुंचाई जा रही है, केवल मुसलमानों को। राहत देने में खुले तौर पर भेदभाव बरता जा रहा है। हिंदू और ईसाई समुदाय पूरी तरह इससे वंचित हैं। उन्हें स्पष्ट तौर से कहा गया है कि आर्थिक सहायता या राशन केवल मुसलमानों के लिए है, उनके लिए नहीं।
पिछले सप्ताह सिंध के कराची, लियारी, सचल घाट आदि से सबसे पहले हिंदुओं को राहत सामग्री को लेकर भेदभाव की खबरें आई थीं। इमरान खान सरकार सामाजिक संगठनों के माध्यम से राहत सामग्री वितरित करवा रही है। इस्लामिक कट्टरपंथी इसका लाभ उठाकर पूरे पाकिस्तान में मजहब परिवर्तन का अभियान चलाए हुए है। पाकिस्तान की अग्रणीय मजहबी संगठन सेलानी वेल्फेयर इंटरनेशनल ट्रस्ट इसमें सबसे आगे है। यह संस्था इस समय कराची, लाहौर, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, हैदराबाद, फैसलाबाद सहित तकरीबन पूरे पाकिस्तान में अपने दो हजार कार्यकर्ताओं के माध्यम से सवा लाख लोगों को प्रतिदिन भोजन, दवाईयां और जीवनयापन की दूसरी आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध करा रही है। मगर अल्पसंख्यक हिंदुओं और ईसाइयों को इससे दूर रखा जा रहा है। उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि यदि राहत सामग्री चाहिए तो उन्हें इस्लाम कबूलना होगा। कराची के कोरंगी टाउन में ईसाई महिलाओं के सामने जब सेलानी ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने इस्लाम कबूलने पर राहत सामग्री देने की शर्त रखी तो उन्होंने मना कर दिया। ट्रस्ट के चेयरमैन मौलाना बशीर अहमद फारूकी अहमद का कहना है कि मुसलमानों द्वारा दिए गए जकात, फितरा और खैरात से राहत सामग्री बांटी जा रही है, जिसमें हिंदू और ईसाइयों का कोई हक नहीं। ईसाइयों की संस्था इंटरनेशनल क्रिश्चन कंसर्न का कहना है कि कोरंगी से पहले रोटी देने के बहाने ईसाइयों से इस्लाम कबूलवान की घटना सामने आई थी। फिर लाहौर के रायविंड रोड स्थित एक गांव से ही ऐसी खबर आई । पांच अप्रैल को ऐसी ही घटना पंजाब प्रांत के कसूर जिले के सांधा कलां में भी सामने आ चुकी है।
ऐसी घटनाओं से यहां के अल्पसंख्यकों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। हालात बिगड़ने पर हिंदू मजबूर हैं। अल्पसंख्यकों के दिनों दिन बिगड़ते हालत के चलते पाकिस्तान के कई एक्टिविस्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप कर राजस्थान के रास्ते सिंध प्रांत के हिंदुओं तक रसद पहुंचाने की गुहार लगा चुके हैं।