पालघर हत्याकांड: वामपंथियों द्वारा रक्तरंजित क्रूरता इलाके का इतिहास

    दिनांक 24-अप्रैल-2020   
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पालघर में संतों की हत्या के मामले में विश्व हिन्दू परिषद मार्गदर्शक मंडल के सदस्य संतों ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी से मुलाकात करके दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है 

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गत दिनों पालघर में संतों की हत्या के मामले में विश्व हिन्दू परिषद मार्गदर्शक मंडल के सदस्य संतों ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी से मुलाकात करके दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। राजभवन में हुई इस मुलाकात में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के तीनों संत सदस्यों महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद महाराज, स्वामी शंकारानंद महाराज एवं स्वामी सुखदेवानंद महाराज ने भीड़ द्वारा निरपराध संतों की अमानवीय हत्या की पुरजोर निंदा की और राज्यपाल को इस पूरे क्षेत्र में वामपंथियों द्वारा जारी समाज तोड़क गतिविधियों के बारे में अवगत कराया। मार्गदर्शक मंडल ने जिन विशेष बिंदुओं की तरफ राज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया उसमें इलाके में वामपंथियों और चर्च मिशनरियों द्वारा हिन्दू विरोधी गतिविधियां चलाए जाने, ग्रामीण लोगों को वामपंथी विचारधारा के अंतर्गत हिंदू देवी— देवताओं के बारे में अभद्र जानकारियां फैलाने, मूर्ति पूजा का विरोध करने, रावण की पूजा करना, महिषासुर की पूजा करना जैसे हिंदू विरोधी जहर वनवासी समाज के बीच फैलाने के बारे में बताया। पूज्य संतों ने राज्यपाल से शीघ्र से शीघ्र पूरे घटनाक्रम की जांच और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की तो वहीं घटनास्थल के पास संतों का स्मारक बनाए जाने का भी निवेदन किया।
पहले भी किए जा चुके हैं ऐसे अराजक प्रयास
संतों की मुलाकात के बाद विहिप, कोकण प्रांत की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया कि “वामपंथियों द्वारा रक्तरंजित क्रूरता इस परिसर का इतिहास है। विश्व हिन्दू परिषद के देश के प्रथम सेवा कार्य ‘तलासरी छात्रावास’ पर भी इसी तरह से 700-800 लोगों की भीड़ द्वारा हमला कर प्रचारकों को जिन्दा जलाने का प्रयास भूतकाल में भी किया गया था। छात्रावास के छात्रों के घर तोड़े गए। वर्तमान घटना के पीछे भी हमें बिना किसी संदेह के वामपंथी गतिविधि दिखती है…।” पत्र में आगे कहा गया है, “गत वर्षों से वामपंथियों द्वारा इस क्षेत्र के स्वभावतः मासूम वनवासियों को ‘राम हमारे देव नहीं, हमें रावण की पूजा करनी चाहिए, नवरात्रि में शक्ति की जगह महिषासुर को पूजना चाहिए’ ऐसा कहकर जबरन उनकी श्रद्दा को तोड़ा जा रहा है। घर के देवी-देवताओं के विग्रहों को जबरदस्ती विसर्जित करने की मांग की जा रही है। गत छह माह में तो आगामी जनगणना को ध्यान में रखकर धर्म के स्थान पर हिन्दू न लिखने का दुष्प्रचार किया जा रहा है। वर्तमान हिन्दू संतों की हत्याएं हमें स्पष्ट रूप से इसी व्यापक हिंदू विरोधी षड्यंत्र की ओर निर्देशित करती है।” पत्र के माध्यम से विश्व हिन्दू परिषद ने राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री से सवाल किया है कि हिन्दवी स्वराज्य संस्थापक क्षत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि पर संतों के साथ ऐसी घटनाएं क्यों घट रही हैं ? साथ ही यह भी कहा कि यदि हिन्दुओं के स्थान पर किसी और मत—पंथ के व्यक्ति के साथ ऐसी घटना घटती तो भी सरकार, मीडिया और मानवाधिकार वाले इसी तरह से चुप रहते ? विहिप ने पत्र में स्पष्ट किया कि यह सीधे तौर से हिन्दू धर्म पर प्रहार है और इसके लिए शासन जिम्मेदारी ले। ऐसे में हमारी मांग है कि इस मामले की जांच वामपंथियों के हिन्दू विरोधी व्यापक साजिश को ध्यान में रखकर की जाए और हत्या में शामिल मुख्य दोषी जो जंगल में भाग गए हैं, उन्हें खोजकर सजा दी जाए।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों महाराष्ट्र के पालघर में जूना अखाड़े से जुड़े 70 वर्षीय कल्पवृक्ष गिरि महाराज और 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज अपने चालक नीलेश तेलगड़े के साथ मुंबई से गुजरात के लिए एक अन्य साधु के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे। लेकिन इसी बीच रास्ते में पड़ने वाले गड़चिनचले गांव में उन्मादी भीड़ ने उन पर जानलेवा हमला किया और पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस दौरान उद्धव सरकार की पुलिस उन्मादी भीड़ के सामने मूकदर्शक बनकर खड़ी रही।