लड़कियों और लड़कों को एक साथ शिक्षा प्राप्त होनी चाहिए: बाबासाहेब

    दिनांक 25-अप्रैल-2020
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हम लगातार आपको बाबासाहेब के जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग 23 :-

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बाबासाहेब ने पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी की स्थापना करके पाठशाला और महाविद्यालयों का निर्माण किया। यह शिक्षा क्षेत्र की आदर्श संस्था का श्रीगणेश था। अपनी शिक्षा संस्था के संचालन की जो नियमावली बाबासाहेब ने तैयार की, वह शिक्षा संस्था के आदर्श कारोबार और व्यवहार के बारे में उनका दृष्टिकोण स्पष्ट करती है। शिक्षा संस्थाओं में अध्यापक-प्राध्यापकों की नियुक्ति करते समय वे जाति-पांति का नहीं, बल्कि उच्च योग्यता का आग्रह रखते हैं। वे कहते हैं कि मेरी शिक्षा संस्थाओं में पिछड़े वर्ग के छात्रों के प्रवेश को सर्वाधिक प्रधानता है, परन्तु उन्हें पढ़ाने वाला अध्यापक वर्ग केवल उच्च योग्यता वाला ही हो, भले ही वह किसी भी जाति-पांति का क्यों न हो। राजनीतिक दलों को भी शिक्षा का कार्य करना चाहिए और उसके लिए शिक्षा संस्थाओं का जाल तैयार करना चाहिए, ऐसा उनका मानना था। इसी वजह से उन्होंने शे.का. फेडरेशन के घोषणा पत्र में इस विषय का स्पष्ट उल्लेख करने वाली धारा को समाविष्ट किया है।
बाबासाहेब ने शिक्षा में सहशिक्षा का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा है कि स्त्रियों को पुरुषों की बराबरी में एक साथ शिक्षा प्राप्त हो। वे तर्क देते हैं कि स्त्रियों के साथ रहकर भी जो पुरुष अपना मन काबू में रखते हैं और पुरुषों के संग में रहकर भी जो स्त्रियां अपना पांव न फिसले, इस बारे में सजग रहती है, उन्हें नीतिमान कहना चाहिए। बाबासाहेब का स्पष्ट मत था कि संस्था चालकों को सहशिक्षा को प्रोत्साहन देना चाहिए।