भारत विरोधी गठजोड़ का मुस्लिम देशों में हिंदू विरोधी अभियान

    दिनांक 26-अप्रैल-2020   
Total Views |
भारत विरोधी गठजोड़ ने विश्व के 52 मुस्लिम देशों में रहने वाले भारत के लाखों हिंदुओं के खिलाफ पिछले दिनों ट्विटर पर एक भ्रामक कैंपेन चलाया। उक्त गठजोड़ द्वारा सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा समाचार पत्रों में भारत के खिलाफ मुस्लिम विरोधी फेक न्यूज चलाकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जैसे भारत में मुस्लिमों का उत्पीड़न किया जा रहा हो

photo twitter _1 &nb
केरल के आतंकी संगठनों, जामिया एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविदृयालय के विद्यार्थियों, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी तथा भारत विरोधी सउदी-पाकिस्तानी पत्रकारों के गठजोड़ ने विश्व के 52 मुस्लिम देशों में रहने वाले भारत के लाखों हिंदुओं के खिलाफ पिछले दिनों ट्विटर पर एक भ्रामक कैंपेन चलाया। उक्त गठजोड़ द्वारा सोशल मीडिया, इलेक्टॉनिक मीडिया तथा समाचार पत्रों में भारत के खिलाफ मुस्लिम विरोधी फेक न्यूज चलाकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जैसे भारत में मुस्लिमों का उत्पीड़न किया जा रहा हो। यकीनन इस फेक न्यूज ने परदेश में रह रहे भारतीयों को चिंतित किया।
भारत, विशेषकर हिंदू विरोधी समूह ने अपने अभियान को सिरे चढ़ाने के लिए सउदी देशों के कई व्यापारियों, शासकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने झांसे में उतार लिया। हालांकि उन्होंने इस क्रम में सउदी अरब की शाहजादी हेंड अल कासिमी के नाम से सोशल मीडिया पर फेक काउंट बनाकर झूूठ फैलाने की कोशिश की, पर जल्द ही वे पकड़े गए। ऐसे लोगों को फटकारते हुए अल कासिमी ने ऐसे लोगों को अपनी हरकतों से बाज आने की चेतावनी दी है। अल कासिमी ने एक ट्वीट में स्पष्ट किया है कि उन्हें बताया गया कि मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमला कर रही थी और तब्लीगी जमात का बचाव। मैं बहुत ज्यादा राजनीति नहीं जानती, पर जादुई तौर पर हिंदी और अंग्रेजी समझ सकती हूं।’ उन्होंने एक अन्य ट्वीट में फेक न्यूज चलाने वालों को लताड़ते हुए कहा है कि मैंने कभी भारतीयों को बमबारी यानी अनर्गल प्रलाप करते नहीं देखा, जो अचानक मुझे दिखाया जाने लगा है। बंद करो यह सब।’’
एक आंकड़े के अनुसार, इस समय भारत के करीब चालीस लाख हिन्दू विभिन्न मुस्लिम देशों में रोजी-रोजगार के सिलसिले में रह रहे हैं। मुस्लिम विरोधी फेक न्यूज चलाने के कारण अरब के एक बड़े हिंदू व्यापारी मनोज भारद्वाज को भूमिगत होना पड़ा। मुस्लिम देशों में रहने वाले हिंदुओं का कहना है कि वैसे तो उन्हें कभी हिंदू-मुस्लिम के मसले से दोचार नहीं होना पड़ा। मगर संशोधित नागरिकता कानून पास होने के बाद तेजी से स्थिति बदली है। भारत में कोरोना संक्रमण के फैलाव के लिए जिम्मेदार तब्लीगियों की आलोचना के बाद से सउदी देशों में हिंदुओं के विरूद्ध अभियान में तेजी आ गई है।
भारत से फेक न्यूज और वीडियो बनाकर सउदी देशों के शासकों, उद्यमियों, पत्रकारों को टैग कर हिंदुओं के खिलाफ माहौल गरमाने की पुरजोर कोशिश हुई। भारत में अभियान की कमान कटृटरपंथी संगठन पीएफआई और जमाते इस्लामी ने संभाली। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के पूर्व छात्र नितीश शर्मा की मानें तो विश्वविद्यालय के कई पूर्व एवं वर्तमान छात्र नफरत भरी सामग्री फैलाने में लगे हुए थे। इसके लिए सोशल मीडिया में एक पृथक प्लेट फार्म चलाया जा रहा है, जहां सारी झूठी खबरें और वीडियो साझा किए जाते हैं। इस गठजोड़ में न्यूज चैनल अल-जजीरा तथा गल्फ न्यूज व खलीज टाइम्स जैसे बड़े अखबारों में काम करने वाले भारतीय और पाकिस्तानी पत्रकार भी शामिल हैं।
नफरत के खेल में शामिल पाकिस्तान

photo twitter _1 &nb
सूत्रों की मानें तो मुस्लिम देशों में हिंदुओं के विरूद्ध नफरत फैलाने में पाकिस्तानी खुफिया आईएसपीआर सहित अन्य एजेंसियां भी सक्रिय हैं। कुछ दिनों पहले पाकिस्तान सिनेट में ‘‘भारत-पाकिस्तान के बीच नवीनतम स्थिति और विकास के मददेनजर नीतिगत दिशा-निर्देश’’ शीर्षक से एक रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें पाकिस्तानी एजेंसियों को भारत के आंतरिक दोष को रेखांकित कर उस पर काम करने का सुझाव दिया गया था। बताते हैं कि सीएए और एनआरसी को लेकर हिंदुस्थान में मुसलमानों की ओर से बवाल एवं पीएफआई के माध्यम से सीएए आंदोलन को फंडिंग किए जाने के जो खुलासे हुए हैं वे सभी इसी साजिश का हिस्सा हैं।