सिंध में आजादी के लिए हथियारबंद आंदोलन की स्थितिः बलोच नेता डॉ. अल्लाह नजर बलोच

    दिनांक 27-अप्रैल-2020
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क्वेटा (बलूचिस्तान) से हुनक बलोच
सिंध के महान राष्ट्रवादी नेता जी.एम. सैयद ने सिंधुदेश को पाकिस्तान से आजादी दिलाने का सपना देखा था और इसके लिए लगातार काम कर रहे थे। आज सिंध की जो स्थिति है, उसमें वहां की सभ्यता, वहां की संस्कृति को जिंदा रखने का एक ही तरीका है। और वह है, पाकिस्तान से आजादी

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बलोच नेता डॉ. अल्लाह नजर बलोच
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट के नेता डॉ. अल्लाह नजर बलोच ने कहा है कि अगर सिंधियों को अपने वजूद की हिफाजत करनी है तो उसे पाकिस्तान से आजाद होने के लिए हथियारबंद आंदोलन करना पड़ेगा। यह अफसोस की बात है कि बलूचिस्तान और सिंध जैसी प्राचीन सभ्यताओं को एक ऐसे मुल्क ने बंधक बना रखा है जिसकी खुद की न कोई सभ्यता है और न संस्कृति। लोकतंत्र की आड़ में फौजी हुकूमतों ने दुनिया भर में जो किया, वही पाकिस्तान में भी हो रहा है। आज सिंध इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। उसे वो हर तरीका अपनाना होगा जो उसे आजादी दिला सके।
डॉ. अल्लाह नजर बलोच ने सिंध के लोगों से यह अपील गुलाम मुर्तजा शाह सैयद की जयंती पर की है। गौरतलब है कि सिंध की तारीख में जी.एम. सैयद को बड़ी इज्जत से देखा जाता है। शुरू में पाकिस्तान के समर्थक रहे जी.एम. सैयद को आखिरकार इस बात का अहसास हो गया कि सिंध की सभ्यता और संस्कृति की रक्षा पाकिस्तान के साथ रहकर नहीं की जा सकती और इसके लिए सिंध को पाकिस्तान से आजाद होना पड़ेगा। इसी मंशा के साथ उन्होंने जीयै सिंध मुत्ताहिदा महाज़ नाम की सिंधी राष्ट्रवादी पार्टी बनाई थी। उन्होंने एक आजाद सिंधुदेश की कल्पना की और इसके लिए जीवन भर काम करते रहे। 17 जनवरी 1904 को जन्मे जी.एम. सैयद का 25 अप्रैल, 1995 को इंतकाल हुआ था।
बेहतरीन सभ्यताओं का क्या हाल बना दिया

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डॉ. अल्लाह नजर बलोच ने इस बात पर दिली अफसोस जाहिर किया कि हजारों साल पुरानी सभ्यताओं को कैसे एक ऐसे मुल्क ने ताकत के बल पर कब्जा कर रखा है, जिसकी अपनी कोई सभ्यता नहीं, कोई संस्कृति नहीं, कोई राष्ट्रीयता नहीं। सिंध के पास मोहनजोदड़ो और बलूचिस्तान के पास मेहरगढ़ की बेहतरीन सभ्यताओं की विरासत है। सिंध के लोगों को अपनी विरासत और रवायतों को याद रखना चाहिए। सूफी परंपराओं को पालने-पोसने वाली यह सभ्यता पास-पड़ोस समेत पूरी दुनिया के साथ मिलजुलकर रहने वाली है, मानवतावादी है। लेकिन यह महान देश आज एक ऐसी हुकूमत के जुल्मों को सह रहा है जिसने ताकत के बूते उसपर कब्जा कर रखा है। लेकिन क्या नेक होना कमजोरी है? हर इंसान को इंसान समझने वाली और हर इंसान में परवरदिगार का अक्स देखने वाली रवायतों पर चलना गुनाह है? शर्तिया नहीं। पाकिस्तान वो सारे हथकंडे अपना रहा है जिससे सिंधियों की वो पहचान गुम हो जाए। इसे बचाने के लिए सिंध को उठना होगा। उसे बताना होगा कि जिस सभ्यता ने उसे इंसानियत सिखाई है, उसे महफूज रखने के लिए वह कुछ भी कर सकता है, हथियार भी उठा सकता है। अल्लाह नजर बलोच कहते हैं कि इसके लिए सिंधियों को जी.एम. सैयद के उसूलों और उनके दिखाए रास्ते पर चलना होगा। जी.एम. सैयद ने सिंध के राष्ट्रवाद को आधुनिक नजरिये से देखा और इसी आधार पर सिंधुदेश की आजादी के आंदोलन की बुनियाद तैयार की। सिंध के लोग आजाद सिंधुदेश की उनकी ख्वाहिश को पूरा करके ही अपना और अपनी आने वाली नस्लों का भला कर सकते हैं।
सिंध का बलूचिस्तान जैसा हाल

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बलूचिस्तान ने पाकिस्तान की हुकूमत का बड़ा ही बदशक्ल रूप देखा है। जगह-जगह सामूहिक कब्र, आए दिन सरेआम लोगों को उठा लेना, औरतों-बच्चों को नहीं बखश्ना, उनके साथ इंसानियत को शर्मसार करने वाले सलूक करना। ये सब बलूचिस्तान ने सहा है। यह सही है कि सिंध के लोगों ने फौज का वह वहशी जुल्म नहीं देखा, लेकिन यह पाकिस्तान में बने रहने की वजह नहीं हो सकती। एक बेहतरीन तारीखी सभ्यता पर कमअक्ल, बेगैरत लोग हुकूमत करें, उनपर जुल्म करें, उनकी रवायतों को खत्म करने की तमाम कोशिशें करें, इतना ही काफी होता है उससे दामन छुड़ा लेने के लिए। और फिर आज सिंध में कमोबेश बलूचिस्तान जैसे हालात तो हो ही गए हैं। डॉ. अल्लाह नजर कहते हैं “आज सिंध का वही हाल है जो बलूचिस्तान का है और पाकिस्तान और उसकी फौज सिंध के लोगों का भी बेदर्दी के साथ खून बहा रही है। टॉर्चर सेल में जिस तरह हजारों बलूचों पर तरह-तरह के जुल्म ढाए जा रहे हैं, उन्हें मार दिया जा रहा है, वैसा ही तो सिंध के लोगों के साथ भी हो रहा है। बलूचिस्तान में भी फौज लोगों को लापता करके शहीद कर रही है, सिंध में भी कर रही है। बलूचिस्तान में भी वे प्राकृतिक संसाधनों की लूट कर रहे हैं, सिंध में भी कर रहे हैं।” दरअसल, आज के समय में बलोच, सिंधी और पश्तून तीनों की ही पहचान खतरे में है।
हथियार उठाना वाजिब
किसी भी कौम को जिंदा रखने के लिए उसकी तारीखी पहचान और उसकी रवायत को महफूज रखना जरूरी होता है। लेकिन पाकिस्तान में इसे ही खत्म करने का दस्तूर रहा है। डॉ. अल्लाह नजर बलोच कहते हैं, “हम ऐसे मुल्क के गुलाम हैं जिसने बंगालियों का नरसंहार किया और नतीजा यह हुआ कि वह हिस्सा उनके हाथ से जाता रहा। अब वे वही सब बलूचों और सिंधियों के साथ कर रहे हैं। अगर हमने उन्हें नहीं रोका तो हमरी नस्लें खत्म हो जाएंगी। किसी जुल्मी हुकूमत से निजात पाने का हक बलूचों को भी है और सिंधियों को भी। इसमें शक नहीं कि हथियार उठाकर आजादी की लड़ाई लड़ने का फैसला करना एक मुश्किल काम होता है, लेकिन जब दुश्मन वहशी हो, हर तरह का जुल्म कर रहा हो, तो इस तरह का फैसला लेना वक्ती जरूरत होती है और सिंध के लोगों को जी.एम. सैयद की आजाद सिंधुदेश की ख्वाहिश को पूरा करने के लिए हाथों में हथियार ले लेना चाहिए। इसके अलावा कोई रास्ता नहीं। सिंध के लोग भी उस मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां से दो ही रास्ते निकलते हैं। एक, पाकिस्तान में रहकर अपनी हैसियत को मिटा देना और दूसरा, उससे आजादी पाकर खुद को, आने वाली नस्लों को बचा लेना। ”
यह बात अजीब लेकिन सच है कि इंसानियत को बचाने के लिए भी हथियार उठाना पड़ता है। और आज अगर बलूचिस्तान में हथियारबंद आंदोलन के हामी लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है, सिंध में भी लोग इसी ओर बढ़ रहे हैं तो इसमें गलत क्या? अगर हथियार उठाने वाले सभी दहशतगर्द होते तो डॉ. अल्लाह नजर बलोच के अल्फाज में “फिर तो अमेरिका को आजादी दिलाने वाले जॉर्ज वाशिंगटन भी दहशतगर्द ही होते।”