शील के बिना विद्या व्यर्थ है: बाबासाहेब

    दिनांक 27-अप्रैल-2020
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हम लगातार आपको बाबासाहेब के जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग 24 :-

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बाबासाहेब स्वयं अनेक वर्ष तक प्राध्यापक रहे थे, अत: छात्रों से उनका गाढ़ा परिचय था। शिक्षा से छात्रों का आत्मविश्वास जागना चाहिए इस विचार को स्पष्ट करते हुए वे कहते हैं, ‘आत्मविश्वास जैसी दूसरी दैवी शक्ति नहीं, हमें अपना आत्मविश्वास कभी गंवाना नहीं चाहिए।’ वे मूल्य शिक्षा पर बल देते हुए कहते थे कि विद्या, विनय, शील और कड़ा अनुशासन सब कुछ छात्रों को आत्मसात करना चाहिए। विद्या के साथ शील चाहिए क्योंकि शील के बिना विद्या व्यर्थ है। वे कहते थे कि शिक्षा से छात्रों की सामाजिक संवेदनाएं भी सजग होनी चाहिए। विद्यार्थी काल में छात्रों को राजनीति में दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए। अगर वे अध्ययन छोड़कर राजनीति को अपनाने लगेंगे तो जीवनभर उनकी हानि होगी।
उपाधि की सीमाएं स्पष्ट करते हुए बाबासाहेब कहते हैं कि केवल उपाधि धारण करके कुछ भी साध्य नहीं होगा, क्योंकि उपाधियों और बुद्धिमत्ता में अन्योन्य संबंध नहीं होता। परीक्षा में सफल होना और उपाधि पाना अलग है और सुशिक्षित और ज्ञानी होना अलग हैै। छात्रों का भारवेत्ता होने से ज्ञानवेत्ता होना ज्यादा जरूरी है।
छात्रों की कमियों को सही ढंग से जानते हुए बाबासाहेब कहते हैं, ‘विषय की जड़ तक पहुंचकर सम्यक् ज्ञान का मार्मिक आकलन करके उसकी भलीभांति रचना करने की योग्यता, सर्वसाधारण ज्ञान की बुनियादी अवस्था, युक्तिवाद, निर्दोष मत प्रदर्शन, प्रश्नों के तर्क की कसौटी पर उत्तर खोजना, मन के विचारों को सुस्पष्टता से रखना आदि बातें छात्रों में आजकल कम मात्रा में दिखाई देती हैं।’ इस टिप्पणी से वे यह स्पष्ट करते हैं कि छात्रों का बौद्धिक गठन कैसा होना चाहिए।
सिद्धार्थ महाविद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए बाबासाहेब कहते हैं कि शिक्षा से आपके मन, दृष्टि, विचारशक्ति, समस्या सुलझाने की ताकत आदि का विकास होना चाहिए। इतना ही नहीं, राजनीतिज्ञों को देश को सताने वाली इन समस्याओं को सुलझाने में आपके इस ज्ञान का उपयोग करना होगा, आपकी सहकारिता से वे उत्तर खोजे जाने चाहिए। अगर वे कहीं गलती कर रहे हैं तो निडरता से, स्पष्टता से उन्हें बताने का साहस शिक्षा से प्राप्त होना चाहिए। इतनी बड़ी अपेक्षा वे छात्रों से रखते थे।