पालघर हत्याकांड: वनवासी इलाकों में जहर भरने में लगीं ईसाई मिशनरी

    दिनांक 27-अप्रैल-2020
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सतीश पेडणेकर
महाराष्ट्र के पालघर जिले में जूना अखाड़े के दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में जो तथ्य निकलकर सामने आ रहे हैं, उसमें स्पष्ट हो रहा है कि घटना में वामपंथी तत्वों की मिलीभगत तो है ही चर्च की भी बड़ी भूमिका निकलकर सामने आ रही है

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महाराष्ट्र के पालघर जिले में जूना अखाड़े के दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में 110 लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। वहां हुई इस घटना के बाद तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। जैसे— हत्यारी भीड़ के साथ एनसीपी और सीपीएम के नेताओं की मौजूदगी क्या बताती है ? क्या भगवा के प्रति घृणा का कारण चर्च और मिशनरी हैं ? साधु—संतों को पूजने वाले वनवासी समाज के मनो में कौन—कौन लोग, संगठन जहर भरने में लगे हुए हैं ?
बहरहाल, पहली नज़र में ये आम वारदात नहीं लगती। इसके अलावा इस इलाके में ईसाई मिशनरियों का प्रभाव होने की बात भी पता चली है। ज्ञात हो कि 2019 में इसी इलाके से ईसाई मिशनरियों का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें स्पष्ट हो रहा था कि वे कन्वर्जन लिए क्या-क्या कर रहे हैं। अप्रैल, 2019 में सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की चर्चा अब फिर से हो रही है। इस वीडियो में मिशनरी कहते दिख रहे हैं कि गणपति तो हाथी हैं और हनुमान एक बन्दर हैं, ऐसे झूठे भगवान तुम्हें कैसे बचा सकते हैं ? साथ ही वे जीसस क्राइस्ट को स्वीकार करने की अपील भी कर रहे हैं। यह वीडियो महाराष्ट्र के कोंकण स्थित पालघर का बताया गया था, जहां से कुछ दूरी पर संतों की निर्ममता से पीट—पीटकर हत्या की गई। ऐसे में क्या चर्च और ईसाई मिशनरी इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं हैं ? जो लगातार लोगों में हिन्दू देवी-देवताओं और साधु-संतों के ख़िलाफ़ ज़हर भरने में लगी रहती हैं।
छल—प्रंपचों का सहारा लेकर बहकाते वनवासियों को
भगवान गणेश और हनुमान के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले ये मिशनरी वनवासी लोगों के दिलों में हिन्दू देवी-देवताओं के प्रति घृणा भर रहे हैं। वह महिषासुर और रावण को पूजने की बात करते हैं। समय—समय पर सनातन धर्म के त्योहारों और रीति—रिवाजों के खिलाफ यहां के लोगों को भड़काते हैं। इसका परिणाम भी दिखाई देता है। भोले—भाले लोग इनके बहकावे में आकर इनकी साजिश में आ जाते हैं और उनके ही एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं। पालघर मामले में अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं, उससे जाहिर होता है कि यह पूर्व नियोजित साजिश ही थी। जिस क्षेत्र में लिंचिंग हुई, वह ईसाई मिशनरियों की गतिविधि का केंद्र है। मिशनरियों द्वारा प्रभावित इस क्षेत्र में वर्षों से बड़ी तादाद में कन्वर्जन का धंधा जोर पकड़े हुए है।
दरअसल चर्च और मिशनरी यहां के वनवासियों का कन्वर्जन कराने के लिए प्रपंच रचते रहते हैं। मुझे याद आता है जब मैं मुंबई से सटे आस—पास के कई इलाकों में जाता था तो बहुत बार देखने में आया कि सैंकड़ों लोग एक जगह आरती कर रहे हैं। पास जाने पर पता चला कि वे मदर मेरी की आरती कर रहे है, जैसे हिंन्दू अपने देवी—देवताओं की करते हैं। यानी लोगों को कन्वर्ट करने के लिए चर्च और मिशनरी इसी तरीके के छल—प्रपंचों का सहारा लेते हैं और लोगों को बहकाकर ईसाइयत की तरफ आकर्षित करते हैं। इनके द्वारा कई जगह मदर मेरी के मंदिर भी बनाए गए हैं, जो मतांतरण के केंद्र होते हैं। यहां आने वाले हिन्दुओं को बहकाया जाता है और हिन्दू—देवी—देवताओं के खिलाफ उनके मनों में जहर भरा जाता है।