लॉकडाउन में स्कूल में ठहरे मजदूरों ने बदल डाली स्कूल की सूरत

    दिनांक 27-अप्रैल-2020   
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एक ओर देश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जमातियों को क्वारंटाइन रखने के दौरान तोड़फोड, महिला नर्सों से अश्लील हरकतें करने व गंदगी फैलाने समेत अजीबोगरीब हरकतें मुस्लिमों की देखने को मिली तो वहीं दूसरी ओर राजस्थान के सीकर जिले के पलसाना स्थित सरकारी विद्यालय में बनाए गए पलायन सेंटर में ठहरे मजदूरों ने विद्यालय की रंगाई-पुताई करके संवेदनशीलता का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। बीते दो दशक से रंगरोगन के अभाव में शहीद सीताराम कुमावत व सेठ केएल ताम्बी राजकीय विद्यालय की हालत बदतर हो गई थी। इन विद्यालयों में कोरोना के लाॅकडाउन के चलते पलायन कर रहे मजदूरों के ठहराव के लिए प्रशासन द्वारा सेंटर बनाए गए थे, जहां गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के 54 मजदूर ठहरे हुए थे।
इन मजदूरों का कहना था कि गांव के लोग कई दिनों से हमारी इतनी अच्छी खातिरदारी कर रहे हैं और हमारी काम की आदत छूट गई तो फिर काम भी नहीं होगा। दिनभर में खाली बैठने से तो अच्छा है गांव के लिए कुछ करके जाएं। मजदूरों ने इसी सोच के साथ पूरे देश में नई मिसाल पेश की है। उन्होंने सरपंच रूपसिंह शेखावत से रंग-रोगन का सामान लाकर देने की मांग की। सरपंच व विद्यालय स्टाफ की ओर से सामग्री उपलब्ध कराने के बाद मजूदरों ने विद्यालय में रंगाई पुताई कर समय का सदुपयोग करते हुए स्कूल की सूरत ही बदल दी है। पृथक वास में रहने के दौरान इन मेहनतकश मजदूरों ने सकारात्मक सोच की जो नजीर पेश है कि वह भावुक करने के साथ ही नकारात्मकता में सकारात्मकता की खोज का संदेश भी देती हैै।
मजदूरों के इस जज्बे को देशभर में सराहा जा रहा है। 26 अप्रैल को मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मजदूरों के जुनून को सैल्यूट किया। इसकी जानकारी मिलने पर विद्यालय में ठहरे हुए मजदूरों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री मोदी ने मजदूरों की ओर से विपरित परिस्थितियों में किए गए कार्य की सराहना की है। पलसाना के सरपंच रूप सिंह शेखावत ने बताया कि मजदूरों के व्यवहार से पूरा गांव अभिभूत है। प्रशासन की ओर से सेंटर स्थापित करने के बाद प्रवासी लोगों के लिए भोजन-पानी की जिम्मेदारी दी गई थी। अब प्रवासी लोगों ने खुद कार्य करने की इच्छा जताई है तो रंग-रोगन उपलब्ध करवाया था। वहीं प्रधानाचार्य राजेन्द्र मीणा ने बताया कि विद्यालय में पिछले नौ साल से रंग-रोगन का काम नहीं हुआ था। सभी शिक्षकों ने रंग रोगन का सामान लाने के लिए आर्थिक योगदान भी दिया और भी सराहनीय बात यह रही कि यहां ठहरे मजदूरों ने स्कूल में रंग रोगन करने के लिए कोई मजदूरी भी नहीं ली।
देशभर में मिसाल बनकर छाया पलसाना
विकट परिस्थितियों में मजदूरों ने बैठने के बजाए कार्य कर दूसरे लोगों के सामने एक मिशाल के रूप में कार्य किया है वो काफी सराहनीय है। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने इनके कार्य की सराहना की तो मुश्किल घड़ी में इस प्रकार का कार्य करने वाले तमाम कोरोना वारियर्स का मनोबल बढ़ा है। वहीं पलसाना के ग्रामीणों की ओर से किए गए निःस्वार्थ रूप से सेवाभावी कार्य के जवाब में मजदूरों ने भी बैठने के बजाए अपने श्रम रूपी कर्तव्य पूरा किया। विपरित परिस्थितियों में लडने का एक अलग ही भाव पैदा करने वाला था। आज देशभर में यहां के भामाशाहों और मजदूरों की तारीफ की जा रही है।