पहले चांद मिया ने सन्नी गुप्ता की हत्या की, फिर कटृटरपंथियों ने शवयात्रा पर बरसाए पत्थर

    दिनांक 28-अप्रैल-2020
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पटना से संजीव कुमार 
पटना के खाजेकलां इलाका में सन्नी गुप्ता की हत्या 20 अप्रैल को दोपहर लगभग डेढ़ बजे हो गई। यह हत्या उन लोगों ने की जो लाॅकडाउन का उल्लंघन कर रहे थे। सन्नी गुप्ता के भाई दीपक कुमार द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार सन्नी की हत्या मोहम्मद चांद द्वारा की गई 
 
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यह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं बल्कि सचाई है। पूरे देश में ऐसे कई मोहल्ले हैं, जहां पुलिस जाने से परहेज करती है। पटना भी इससे अलग नहीं है। यहां भी ऐसा ही मोहल्ला खाजेकलां के नून का चैराहा इलाके में स्थित शीशा का शिपहर है। इसी मोहल्ले में 20 अप्रैल को कुख्यात चांद मियां अपने दोस्तों के साथ लाॅकडाउन का खुलेआम उल्लंघन करते हुए अपनी मजलिस जमाए हुए था। इसी बीच पुलिस आ गई। उन लोगों को हिदायत देते हुए घर जाने को कहती है।
 
घर जाने के बजाये ये लोग पुलिस पर ही हमला कर देते हैं। पत्थरबाजी होती है। चांद मियां द्वारा तमंचे से फायरिंग की जाती है। छत पर खड़े सन्नी गुप्ता को गोली लगती है और अगले दिन सन्नी गुप्ता की मौत हो जाती है। अगर सन्नी गुप्ता की मौत नहीं होती तो शायद यह खबर भी नहीं बनती। लेकिन, घटना इतने पर ही नहीं रुकती ।
 
21 अप्रैल को सन्नी गुप्ता की शवयात्रा निकाली जाती है। लाॅकडाउन के कारण इस शवयात्रा में चुनिंदा लोग ही होते हैं। खाजेकलां श्मशान घाट जाने के रास्ते में शवयात्रा पर पत्थरबाजी भी की गई। अनुनय विनय के बाद भी पत्थरबाज माने नहीं। शवयात्रा पर पत्थरबाजी हुई और उल्टे सन्नी गुप्ता के परिजनों पर ही पुलिस ने केस दर्ज किया। दहशतगर्दों से सहमे सन्नी गुप्ता के पिता वापस अपने घर आते हैं और मजबूरन उन्हें एक पोस्टर लगाना पड़ता है कि यह मकान बिकाऊ है। यह सब कुछ उसी बिहार में हो रहा है जिसे तथाकथित ‘सेक्युलर बिहार’ कहकर प्रचारित किया जाता है।
पटना के खाजेकलां इलाका में सन्नी गुप्ता की हत्या 20 अप्रैल को दोपहर लगभग डेढ़ बजे हो गई। यह हत्या उन लोगों ने की जो लाॅकडाउन का उल्लंघन कर रहे थे। सन्नी गुप्ता के भाई दीपक कुमार द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार सन्नी की हत्या मोहम्मद चांद द्वारा की गई। हत्या के आरोपी लाॅकडाउन तोड़कर सड़कों पर घूम रहे थे। लाॅकडाउन का उल्लंघन करने पर इन लोगों ने मना किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एनसीसी कैडर के साथ पुलिस आ गई। पुलिस को देखकर मोहम्मद चांद और उसके साथी भागने के बजाय पुलिस बल पर ही पथराव करने लगे। मोहम्मद चांद ने अपने असहले से फायरिंग की, जिससे छत से झांक रहे सन्नी गुप्ता को गोली लग गई।
 
1990 में भी इस इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति आई थी। उस समय सन्नी गुप्ता के परिजन अपना घर छोड़कर भागने को विवश हुए थे। व्यवसाय करने वाले गोपाल प्रसाद अपराधियों के नजर में हमेशा से साॅफ्ट टारगेट रहे हैं। मोहम्मद चांद का भाई भी हत्यारोपी है। बकौल गोपाल प्रसाद उसका बड़ा भाई पहले असलहे का कारोबारी था। उसके ऊपर दो हत्या के आरोप हैं। अभी वह दुकान चलाता है। मोहम्मद चांद ने अब उसके कारोबार को अपने हाथों ले लिया। धमकी देना इन लोगों के लिए सामान्य बात है। दहशत के बल पर ही ये काम करते हैं।
 
बहरहाल सभी आरोपित गिरफ्तार हो गये हैं। लेकिन यह घटना अपने आप में कई सवाल छोड़ती है ? क्या मौजूदा हालात में सन्नी गुप्ता के परिजन को सुरक्षा मिलेगी और उन्हें ढाढ़स बंधेगा ? उनका मृत बेटा तो नहीं लौट सकता, लेकिन क्या पुरखों की जमीन अब वह बेचने को विवश नहीं होंगे ? मौजूदा समय में पटना शहर के हालात को सन्नी गुप्ता की घटना से परिस्थिति को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। यह घटना एक प्रतिबिंब है कि पुलिस, सुरक्षा व्यवस्था और तमाम बातों के बावजूद एक परिवार आज घर छोड़ने को विवश है।