हरियाणा में हारती महामारी

    दिनांक 28-अप्रैल-2020   
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल के नेतृत्व में पूरा प्रदेश महामारी को हराने में लगा है। कभी किसी को पुचकार कर, तो कभी किसी के साथ सख्ती कर राज्य सरकार पूरी ताकत से प्रदेश की जनता को संक्रमण से दूर रखने में जुटी हैं। इसका लाभ भी मिल रहा है। प्रदेश में महामारी के नए मामले सामने नहीं आ रहे हैं
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प्रदेश में अनेक स्थानों पर इस तरह भोजन बनाकर गरीबों और जरूरतमंदों के बीच बांटा जाता है।
 
इस महामारी के चलते तमाम प्रदेश सरकारें प्रत्येक दिन नई-नई चुनौतियों से गुजर रही हैं। संकट की इस घड़ी में किस प्रदेश सरकार की कार्यशैली सबसे बेहतर रही, किसने संक्रमण को नियंत्रित करने में निपुणता और परिपक्वता दिखाई तथा इसके कारण उत्पन्न अफरा-तफरी को किस सरकार ने कितनी चतुराई से संभाला, माहौल शांत होने के बाद इन तमाम महत्वूर्ण सवालों को लेकर बड़े पैमाने पर चर्चा होेगी। वैसे, देखा जाए तो अब तक हरियाणा सरकार का काम-काज औरों से बीस ही रहा है। सर्वाधिक वायरस प्रभावित प्रदेशों पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से घिरा होने के बावजूद इस प्रदेश में न केवल संक्रमित रोगियों कीसंख्या उनके मुकाबले बेहद कम रही। प्रवासी मजदूरोंं एवं तब्लीगी जमातियों को लेकर हरियाणा में किसी तरह का हो-हल्ला भी नहीं मचा। ‘हरियाणा मॉडल’ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तारीफ कर चुके हैं। ‘हरियाणा मॉडल’ का अध्ययन कर आॅस्ट्रेलिया सरकार भी इस पर अमल कर रही है।
 
 
केंद्र सरकार ने 25 मार्च को जब तालाबंदी के 21 दिन के पहले चरण की घोषणा की तो देशभर में उथल-पुथल की स्थिति बन गई। कई प्रदेशों से प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घरों के लिए चल पड़े। इस दौरान साजिशन दिल्ली के हजारों प्रवासी मजदूरों को उनके ठिकाने से निकाल कर सड़कों पर खड़ा कर दिया गया। वे दो दिन दिल्ली के आनंद बिहार अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे के पास सड़कों पर डटे रहे। आरोप है कि यह षड्यंत्र दिल्ली की आआपा सरकार ने रचा था, ताकि देश की राजधानी में लाखों की संख्या में रहने वाले मजदूरोंं को खाना न खिलाना पड़े। आज भी दिल्ली सरकार दिल्ली में 2,50,000-3,00000 लोगों को प्रतिदिन भोजन कराने का दावा करती है, पर इसके लिए खाना कहां बन रहा है? उसकी ओर से अब तक इसका खुलासा नहीं किया गया है।

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मुख्यमंत्री मनोहरलाल
 
इस मामले में हरियाणा सरकार शुुरू से ही पारदर्शिता बनाए हुए है। हरियाणा सरकार की ओर अब तक ऐसा कोई दावा नहीं किया गया जिसको लेकर इस पर गलतबयानी का आरोप लगाया गया होे। हरियाणा में फरीदाबाद, गुरुग्राम, पानीपत, सोनीपत, अंबाला, करनाल, यमुनानगर आदि ऐसे कई औद्योगिक शहर हैं, जहां लाखों की संख्या में प्रवासी, दिहाड़ी, निर्माण, ईंट भट्ठा मजदूर, खोमचे-रिक्शे वाले रहते हैं। तालाबंदी के चलते जब उनमें भी घर जाने की अकुलाहट देखी गई तो प्रदेश सरकार ने पुलिस की मदद से उन्हें सड़कोंं से हटाकर उनके लिए बनाए गए आश्रालयों में भेज दिया। इसके अलावा मार्च महीना खत्म होने से पहले तमाम पंजीकृत मजदूरों, पेंशन-भोगियों के बैंक खाते में एक से चाढ़े चार हजार रुपए डाल दिए गए। प्रदेश के विभिन्न हिस्से में बनाए गए आश्रालयों मेंं अभी भी 15,870 अपंजीकृत प्रवासी मजदूर रह रहे हैं, जिन्हें भोजन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। दिल्ली, मुंबई सहित कई शहरों से आश्रालयों में रखे तथा बेरोजगार हो चुके मजदूरों को भोजन नहीं मिलने की नियमित शिकायतें मिल रही हैं। हाल ही में कुछ लोगों के बहकावे में आकर मुुंबई और सूरत में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आ गए थे। मगर हरियाणा में अब तक ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है। प्रदेश का एक-एक जिला पूरी तरह सीलबंद है।

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हालात पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खुद पैनी नजर रखे हुए हैं। रोजना सुबह तमाम व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं। तालाबंदी के दौरान खाने-पीने, सब्जी, दूध आदि की कालाबाजारी न हो, इस पर नजर रखने के लिए प्रदेश सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। जरूरी सामान की कीमतों की सूची जारी करने के अलावा एक कॉल सेंटर बनाकर शिकायतों पर नजर रखी जा रही है। इस कॉल सेंटर से प्रदेश के तमाम वरिष्ठ अधिकारी जुड़े हुए हैं। किसी तरह की शिकायत आते ही तुरंत निपटाया जाता है।
इन प्रयासों का प्रभाव है कि हरियाणा के केवल चार जिले गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पलवल को छोड़कर कोई और जिला ‘रेड जोन’ में नहीं है। इसके तीन जिले रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और नारनौल में तो संक्रमण का एक भी मामला नहीं मिला है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल कहते हैं, ‘‘तब्लीगियों ने दिल्ली के मरकज से निकल कर हरियाणा की धरती पर कदम नहीं रखा होता तो इस प्रदेश में संक्रमण के दो-चार मामले ही सामने आते।’’
 
लोगों का जीता भरोसा
सरकार के काम करने के अंदाज से न केवल विपक्ष की बोलती बंद है, आम जनता भी बेहद प्रभावित है। प्रदेश की मुख्य सचिव केशनी आनंद कहती हैं, ‘‘सरकार को जनता का भरपूर साथ मिल रहा है।’’ प्रदेशवासियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए मुख्यमंत्री की पहल पर एक ऐप के माध्यम से कार्यकर्ता के तौर पर 63,000 लोगों ने पंजीकरण करवाए हैं, जिनमें 900 डॉक्टर, 800 नर्सें और 2100 पारामेडिकल सहित विभिन्न पेशे से जुड़े लोग शामिल हैं। मुख्यमंत्री सीधे उन पर नजर रख रहे हैं और उनके सहयोग से जनता की समस्याओं को निपटाने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसे कुछ घटनाओं से भी समझा जा सकता है।
 
दिल्ली में रहने वाले कर्नल संजीव सेठी को 27 मार्च को तालाबंदी की वजह से पिता के चंडी मंदिर में निधन होने पर वहां पहुंचने में परेशानी हो रही थी तो उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर मुख्यमंत्री से आग्रह किया। इस पर उन्हें चंडी मंदिर और हरिद्वार तक के लिए अंतिम संस्कार संपन्न कराने हेतु विशेष पास जारी किए गए। इसी तरह न्यूयॉर्क में रहने वाले हरियाणा के नसीब सिंह भी एक घटना के बाद मुख्यमंत्री मनोहरलाल के कायल हो चुके हैं। भिवानी में उनकी पत्नी की अचानक तबियत बिगड़ी तो उन्होंने न्यूयॉर्क से मुख्यमंत्री से मदद मांगी। इस पर मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रुचि लेकर भिवानी के उपायुक्त को इसकी विशेष जिम्मेदारी दी। नसीब कहते हैं कि उनकी जब मुख्यमंत्री मनोहरलाल से बात हुई तो उन्होंने ढाढस बंधाते हुए कहा, ‘‘मेरी बेटी को कुछ नहीं होगा, आप इत्मीनान रखें।’’ वे कहते हैं, ‘‘उनके मुंह से यह बात सुनकर मैं भावविभोर हो गया।’’ मुख्यमंत्री के इसी जज्बे से प्रभावित होकर पानीपत की जाटाना पंचायत ने गांव में धन संग्रह कर ‘मुख्यमंत्री कोरोना रिलीफ फंड’ में साढ़े दस करोड़ रुपए जमा कराए हैं। इतनी बड़ी रकम अब तक किसी भी प्रदेश की पंचायत ने मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा नहीं कराई है।
समाजसेवियों को रखा आगे
 
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने संक्रमण और इससे पैदा होने वाले हालात से लड़ने वालों को कभी अपने पीछे नहीं रखा। वे उनके कार्यों की सराहना करने से नहीं चूकते। उनके प्रोत्साहन का प्रभाव है कि ‘परिवार गोद’ लेने के केंद्र सरकार के अभियान में भाग लेते हुए करनाल के 13,000 जरूरतमंदों के लिए लोगों ने 64 लाख रु. उपलब्ध कराए हैं। हरियाणा सरकार की सहायता के लिए इस समय हिसार के दस स्वयं सहायता समूह आगे आए हैं। इनकी पहल पर गांव रावज खेड़ा, पायल, कंवारी, कोथ कलां, कोथ खुर्द, खेड़ी जलाब आदि की 41 महिलाएं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए मात्र 850 रुपए में पीपीई किट तैयार करने में रात-दिन जुटी हैैंं। विभाग पहले यही किट 1,500 रुपए में खरीद रहा था। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक कहते हैं कि अब तक उनकी ओर से 784 किट उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। प्रयास है कि किसी तरह इन महिलाओं की क्षमता बढ़ाकर तीन हजार किट की जाए, ताकि पीपीई की निर्भरता खत्म हो सके।
 
फसल खरीद की पहल
तमाम आशंकाओं और खतरों के बावजूद राज्य सरकार ने 15 अप्रैल से सरसों तथा 20 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू कर दी है। प्रवासी मजदूरों के जहां-तहां फंसे होने और तालाबंदी के चलते फसलों की कटाई के लिए किसानों को प्रेरित किया। फिर आस-पास के प्रदेशों से कंबाइन मशीन लाने के लिए विशेष अनुमति जारी की। हरियाणा सरकार की पहल पर 4,000 कंबाइन मशीनें दूसरे प्रांतों से मंगाई गर्इं। कटाई के बाद अब खरीद-फरोख्त का दौर चल रहा है। सरसों की खरीद के लिए 163 और गेहूं की खरीद की खातिर 1800 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इस दौरान सामाजिक दूरी भंग न हो, इसके लिए खरीद केंद्रों पर अलग-अलग दिन अलग-अलग गांवों के किसानों को फसल के साथ बुलाया जा रहा है। इससे पहले उन्हें इसके लिए सूचित किया जाता है। एक खरीद केंद्र पर सुबह मेंं पचास और शाम में पचास किसान ही बुलाए जाते हैं। खरीद एजेंसियां खाद्य आपूर्ति, भंडारण निगम और फूड कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया को भी नियम-कायदे में बांधा गया है। तीनों एजेंसियों को अलग-अलग दिन खरीद की अनुमति दी गई है। इस बार प्रदेश सरकार का 95 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। सरसों खरीद के पहले चार दिन में खरीद एजेंसियों ने तमाम तरह की बंदिशों के बावजूद 32,779 किसानों से 82886.87 मीट्रिक फसल खरीदी है। बावजूद इसके कहीं किसी तरह की कोई अफरा-तफरी नहीं देखी गई।
 
महामारी से निपटने में राज्य सरकार की अति सक्रियता से लोग बहुत ज्यादा प्रभावित हैं और उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही हरियाणा संकट से निकल जाएगा।
(लेखक हिन्दी दैनिक पायनियर (हरियाणा संस्करण) के संपादक हैं)