विमुक्तजन को मिला संकट में सहारा

    दिनांक 28-अप्रैल-2020   
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संकटकाल में विमुक्त-घुमंतू जनजाति कल्याण संघ बेसहारा लोगों की सेवा में जुटा है। इसने हरियाणा में 174 बस्तियों के 15,000 परिवारों के 70,000 सदस्यों के लिए खाद्य सामग्री की व्यवस्था की है। उन्हें सामाजिक दूरी और स्वच्छता को लेकर जागरूक करने के साथ दवा का प्रबंध भी कराया है

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विमुक्त घुमंतू जनजाति कल्याण संघ के कार्यकर्ता बेसहारा परिवारों को भोजन बांटते हुए। 
 
रहे न कोई निर्बल, वंचित, रहे न कोई भेद विकार।
समरस भारत, समरथ भारत, दिव्य सपन होगा साकार
सेवा धर्म ही जीवन सार।
 
विमुक्त-घुमंतू जनजाति कल्याण संघ का यह मूलमंत्र हरियाणा में कोविड-19 से उत्पन्न आपदा में अक्षरश: सच साबित हो रहा है। संघ का प्रयास रहा है कि वह कमजोर वर्ग का संबल बने। घुमंतू परिवारों का जीवन फुटपाथ से शुरू होकर मलिन बस्तियों में समाप्त हो जाता है। ऐसे लोगों का जीवनस्तर सुधारने के लिए संघ सदैव से प्रयासरत रहा है। हरियाणा के कुछ इलाकों में विमुक्त-घुमंतू जनजाति कल्याण संघ के कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग ला रही है।
 
संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार कहते हैं कि कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए देश में लॉकडाउन के दौरान तमाम सरकारें और सामाजिक संगठन अलग-अलग वर्गों की मदद कर रहे हैं ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। संघ भी फुटपाथों और मलिन बस्तियों में रहने वाले घुमंतू परिवारों को जागरूक करने और उनकी मदद में जुटा है। इन्हें आपदा से निपटने में सक्षम बनाने के साथ लोगों को कमजोर वर्ग को मदद करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इन प्रयासों का परिणाम भी दिखने लगा है। देश में पहली बार देखने को मिला कि बावरिया समाज, जिसे कुछ लोग अपराधी प्रवृत्ति का होने वाला मानते रहे हैं, ने चंदा इकट्ठा कर प्रधानमंत्री राहत कोष में और अपने समान परिवारों के कल्याण के लिए 51-51 हजार रुपये का सहयोग दिया है। पाल गरेड़िया समाज ने भी 51 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी है। ऐसा ही प्रेरक कार्य फेरी वालों ने मिलकर किया। इन्होंने सफीदो, कैथल, नरवाना, पेहवा, जींद आदि की बस्तियों में कागज चुनकर जीविका चलाने वाले 200 परिवारों को 15-15 दिनों का राशन उपलब्ध कराया है।
 
विमुक्त-घुमंतू जनजाति कल्याण संघ 23 मार्च से सेवा कार्य में लगा हुआ है। इसने अब तक हरियाणा के क्षेत्रों में 174 बस्तियों में रहने वाले 15,000 परिवारों के 70,000 सदस्यों के लिए सूखे राशन और भोजन की व्यवस्था की है। इसके अलावा संघ के कार्यकर्ता इन्हें सामाजिक दूरी और साफ-सफाई का महत्व समझा रहे हैं और दवा आदि की व्यवस्था भी कराई है। इस कार्य में संघ के करीब 300 कार्यकर्ता दिन-रात लगे हुए हैं। इन्हें रा.स्व.संघ, भाजपा, स्वामी निरंकारी, आढ़ती एसोसिएशन, पंचायतों, सेवा भारती, भारत विकास परिषद, शिव कांवड़ संघ, सामाजिक संगठन ‘मेरा आसमां’, अग्रवाल सेवा समिति, अन्नपूर्णा सेवा समिति, नीलकंठ सेवा संघ, बर्फानी सेवा मंडल, गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों और प्रशासन आदि का भी भरपूर साथ मिल रहा है।
 
विमुक्त-घुमंतू जनजाति कल्याण संघ की ओर से जींद की 25, कुरुक्षेत्र की 24, सोनीपत की 14, यमुनानगर व करनाल की 13-13, पंचकुला, भिवानी और फरीदाबाद की 10-10 बस्तियों में यह कार्य पुरजोर तरीके से चल रहा। राजेश कुमार बताते हैं, हरिद्वार से आते समय लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र के अमरावती के घुमंतू समाज के 36 परिवारों के लगभग 225 लोग फरीदाबाद में फंस
गए थे।
 
रा.स्व.संघ के सहयोग से उनके लिए भोजन आदि की व्यवस्था की गई। इसके अलावा राजस्थान में 500 गायों और उनकी देखभाल में लगे 50 लोगों के भोजन, पानी व रहने की व्यवस्था कराई गई। वहीं, हरियाणा के महेंद्र्रगढ़, रेवाड़ी आदि में भी बेसहारा गोवंश एवं भेड़ों के लिए चारा-पानी का प्रबंध कराया गया है।