कोराना संकट: कांग्रेस सरकार की तुष्टीकरण राजनीति से जूझता राजस्थान

    दिनांक 29-अप्रैल-2020   
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राजस्थान सरकार लोगों की जान की कीमत पर तुष्टीकरण और राजनीतिक भेदभाव कर रही है और इसके चलते राज्य के 33 में से 25 जिलों में यह संक्रमण फैल गया है। मुख्यमंत्री के गृहनगर जोधपुर में कलेक्टर ने स्थिति संभालने के लिए सीआरपीएफ को तैनात करने की गुहार की। लेकिन इस पत्र को सरकार दबाए बैठी है। सरकार के तुष्टीकरण के कारण ही इस रोग को फैलाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले तब्लीगी जमात के लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई।
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भीलवाड़ा माॅडल को बेतहाशा प्रचारित कर वाहवाही लूट रही राजस्थान की गहलोत सरकार का मुसलमानों के प्रति हमदर्दी से कोरोना संक्रमण गुलाबी नगरी जयपुर समेत जोधपुर, कोटा, अजमेर व टोंक जिलों में सैकड़ों की तादात में फैल गया है। यही नहीं सरकार की नाक के नीचे अकेले जयपुर में ही मुस्लिम बहुल रामगंज इलाके से निकलकर कोरोना से आठ सौ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। संक्रमण फैलने से रोकने के लिए रामगंज समेत कई थाना क्षेत्रों में लगाए गए सख्त कर्फ्यू के बावजूद लोग खुलेआम घूमकर मौत को बुलावा दे रहे हैं। मुस्लिम इलाकों में सरकार के इशारे पर पुलिस-प्रशासन द्वारा बरती जा रही लापरवाही के चलते संक्रमण शहर के कई दूसरे इलाकों तक पहुंच गया है। यहां तक कि कोरोना संक्रमित के जनाजे में शामिल होकर दर्जनों लोग जयपुर से प्रदेश के ही दूसरे जिलों तक पहुंच गए।
ताजा हालातों की बात करें तो टोंक में सख्त कर्फ्यू के बावजूद समुदाय विशेष के लोगों का इकट्ठा होना और मना करने पर पुलिसकर्मियों पर हमला करना। धारा 144 और सख्त लॉक डाउन के बाद भी मुस्लिमों द्वारा जयपुर के खो नागोरियान इलाके की आयशा मस्जिद में सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा होना। वहीं रामगंज में जारी कर्फ्यू के बाद भी लोग वहां से निकल कर मुहाना मंडी पहुंचे, यही नहीं एक प्रधानाचार्य तो रामगंज से निकल कर कई जिलों की सीमाबन्दी को तोड़कर सैकड़ों किलोमीटर दूर सीमावर्ती जिले बाड़मेर तक पहुंचे और वहां जाकर संक्रमित निकले। ये सब घटनाएं इशारा करती हैं कि आखिरकार कांग्रेस सरकार वर्ग विशेष के प्रति बेतहाशा हमदर्दी दिखाते हुए तुष्टीकरण पर उतारू क्यों है ?
राज्य सरकार कर रही राशन वितरण में हिन्दू बस्तियों से भेदभाव
प्रदेश में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के दौर में जरूरतमंद लोग दो वक्त के निवाले की उम्मीद में सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन जयपुर की हिन्दू बस्तियों में राशन सामग्री वितरण में भेदभाव की बातें अब जयपुर के घाटगेट, हवामहल, किशनपोल व सांगानेर आदि क्षेत्रों में उजागर होने लगी हैं। बीते दिनों किशनपोल क्षेत्र में मुस्लिमों के घरों में राशन सामग्री का बड़ा स्टाॅक मिलने की शिकायत पर प्रशासन ने उसे जब्त कर लिया, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इशारे पर प्रशासन द्वारा रसद सामग्री वितरण में मुस्लिमों को तरजीह देने के आरोप लग रहे हैं। वहीं प्रदेश में बड़े पैमाने पर कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रशासन की कमेटी में शामिल कर उनके द्वारा रसद सामग्री वितरण कराई जा रही है। जिसके चलते लगातार भेदभावपूर्ण खबरें पूरे प्रदेश से सामने आ रही हैं। यहां कोरोना पर काबू करने पर ध्यान देने की बजाय राजस्थान सरकार द्वारा खुलेआम किया जा रहा तुष्टीकरण आने वाले दिनों में सरकार के लिए कई मुसीबतें खड़ी कर सकता है।
सरकार कर रही तुष्टीकरण और राजनीतिक भेदभाव
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की राजस्थान सरकार लोगों की जान की कीमत पर तुष्टीकरण और राजनीतिक भेदभाव कर रही है और इसके चलते राज्य के 33 में से 25 जिलों में यह संक्रमण फैल गया है। मुख्यमंत्री के गृहनगर जोधपुर में कलेक्टर ने स्थिति संभालने के लिए सीमा सुरक्षा बल या सीआरपीएफ को तैनात करने की गुहार की है। इस पत्र को सरकार दबाए बैठी है। सरकार के तुष्टीकरण के कारण ही इस रोग को फैलाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले तब्लीगी जमात के लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई। सरकार ने रोगियों की सूचना देेने वाले फार्मेट से तब्लीगी का काॅलम ही हटा दिया। ऐसे में सरकार ने यह तय कर लिया है कि लोगों की जान की कीमत पर तुष्टीकरण करेंगे।