मजहबी जमावड़े पर अंकुश लगाने गई पुलिस और आरएएफ जवानों को मुसलमानों ने दौड़ाया, लात—घूसों और डंडों से किया हमला

    दिनांक 29-अप्रैल-2020
Total Views |
डॉ अम्बा शंकर बाजपेयी
 
पश्चिम बंगाल का हावड़ा ऐसा जिला है जो कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है। इसी संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने इस क्षेत्र को “नियन्त्रण जोन” घोषित किया है और यहां धारा 144 लागू है। लेकिन सबके वाबजूद मुस्लिम कानून की धज्जियां उड़ाने में लगे हुए हैं। पुलिस—प्रशासन जब इन्हें ऐसा करने से रोकता है तो उन पर हमला करने में जरा भी नहीं हिचकते।
a_1  H x W: 0 x
 
एक सप्ताह पहले पश्चिम-बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता के मुस्लिम बहुल क्षेत्र राजाबाजार में स्वयं जाकर लॉकडाउन के कारण हो रही असुविधा के लिए मुस्लिमों से माफ़ी मांगती नजर आई थीं। ममता के लचर रवैये को पहचानने के बाद तो राज्य में जमात के हौसले सातवें आसमान में पहुँच गए। जिसकी झलक कल दिखाई दी। बीते 28 अप्रैल को राज्य के हावड़ा स्थित टिकियापाड़ा में लॉकडाउन को तोड़कर सैकड़ों की तादाद में मुस्लिमों का झुंड एकत्रित हुआ। जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस एवं रैपिड एक्शन फ़ोर्स टिकियापाड़ा में गई तो उन्होंने इस मजहबी एकत्रीकरण को रोकने का प्रयास किया। लेकिन उन्मादी भीड़ तो पुलिस और आरएएफ के जवानों पर ही टूट पड़ी। कटृटरपंथी सुरक्षा बलों को घेरने लगे, उन पर हमला करने लगे। हालत यह हो गई कि जवानों को अपनी जान बचाने के लिए यहां से भागना पड़ा। इस दौरान कई पुलिस कर्मी इस भीड़ के हाथों आ गए। उन्मादियों ने इन पर लात—घूसों, पत्थर, डंडे और अन्य धारदार हथियारों से हमला किया। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों पर मोहल्ले की छतों से भी पत्थर बरसाए जा रहे थे। खबरों की मानें तो इस हमले में कई पुलिस कर्मी घायल हुए हैं।
राज्य में क्यों हैं मुस्लिमों के हौसले बुलंद
कोरोना संक्रमण की रोकथाम प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश ने नए मानक तय किये व उनको कार्यान्वित किया है। योगी सरकार ने आइसोलेशन वार्डस बनाये, अस्थायी कोरोना टेस्टिंग लैब सम्बंधित क्षेत्र में व संक्रमित क्षेत्रों को चिहिृत करके उनको हॉटस्पॉट घोषित किया व विशेष निगरानी व नियमों का पालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की है। लेकिन पश्चिम-बंगाल में इस मॉडल से कोई सीख न लेते हुए, इसके उलट ही सब काम हो रहे हैं। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टीकरण नीति के चलते जमात बहुल इलाकों को न ही चिन्हित किया गया और न ही मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को हॉटस्पॉट घोषित किया। राज्य प्रशासन द्वारा इन इलाकों में न तो आइसोलेशन वार्ड स्थापित किये गए और न ही कोरोना टेस्टिंग लैब बनाई गयी। इसके पीछे स्पष्ट कारण है कि जैसे ही राज्य सरकार जमातियों पर सख्ती बरतती वैसे ही कोरोना के मामलों में बढ़त दिखाई देती और उसमें जाहिर तौर पर मुस्लिमों का नाम होता। यह पहचान उजागर होते ही बंगाल में भी जमात बदनाम होने लगती। ऐसा होते ही मुल्ला—मौलवी बेचैन हो उठते और ममता को सारा दोष देते। इसलिए ऐसा कुछ भी न हो और यह एकमुश्त वोट बैंक उनका ही बना रहे, इसलिए राज्य प्रशासन ने इनके खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई नहीं की।
ज्ञात हो कि जमात ममता का सबसे बड़ा वोट बैंक है। 2021 में विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए वह मुस्लिम समुदाय को किसी भी कीमत पर नाराज नहीं करना चाहतीं। ममता का मुस्लिम तुष्टिकरण यहीं नहीं रुका है। लॉकडाउन के दौरान खाद्य सामग्री के वितरण में भी मुस्लिम बहुल इलाकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जबकि बहुत से हिन्दू बहुल इलाकों में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लोग भोजन को तरस रहे हैं। ऐसी स्थिति में सेवा भावी संगठन ही इन तक मदद पहुंचा रहे हैं।
टिकियापाड़ा जैसी घटनाएं राज्य में होती जा रहीं आम
टिकियापाड़ा में पुलिस बल पर हुआ हमला राज्य के लिए कोई नई घटना नहीं है। अभी कुछ दिन पहले आसनसोल के जमुरिया में मुस्लिमों ने आइसोलेशन वार्ड बनाने का पुरजोर विरोध किया था। स्थानीय लोगों की मेडिकल टेस्टिंग न हो उसको लेकर खूब हाय तौबा काटा। जब पुलिस ने इस विरोध को दबाने का प्रयास किया तो जमात के उन्मादियों ने उपस्थित पुलिस बल पर बमबारी शुरू कर दी। इस हमले में 27 पुलिस कर्मी जहां गंभीर रूप से घायल हुए वहीं पुलिस स्टेशन के कर्मी सौरभ कुमार घोष को जमात के लोगों ने पकड़ लिया और उनकी बेदम पिटाई करते हुए दोनों पैर तोड़ दिए।
राज्य में कहां—कहां है तब्लीगियों का प्रभाव
पश्चिम-बंगाल में आठ मुस्लिम बहुल क्षेत्र— 24 दक्षिण परगना, नादिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, दिनाजपुर, बर्धमान, मिद्नीपुर और कोलकाता के मीटियाबुर्ज, कोलकातापोर्ट, राजाबाजार, सेंट्रल एवेन्यु, पार्कसर्कस, महेशतल्ला, भंगुर, कमरहटी व राजरहाट क्षेत्र पूरी तरह से मुस्लिम बहुल हैं। इन स्थानों पर तब्लीगी जमात का प्रत्यक्ष प्रभाव है। इसका परिणाम है कि इन स्थानों पर लॉकडाउन का बिल्कुल पालन नहीं किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में पहले की तरह बाजार खुले हैं, सड़कों पर आवाजाही है, यहां तक कि मस्जिदों में भी सारी गतिविधियां संचालित हैं। हालत यह है कि इन क्षेत्रों में न तो कोई कोरोना टेस्टिंग हो रही है और न ही आइसोलेशन सेंटर बनाये गए हैं और न ही स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई निगरानी की जा रही है। इन सभी मामलों पर कोलकाता के पत्रकार रोहित खन्ना कहते हैं कि पश्चिम-बंगाल में जमात की समानांतर सरकार चलती है। यही वजह है कि राज्य में उनके लोगों के हौसले बुलंद हैं। वह पुलिस और सुरक्षाबलों पर हमला करने में जरा भी नहीं हिचकते, हावड़ा और आसनसोल की घटनाएं इसकी गवाह हैं। टीएमसी ने मुस्लिमों को इतना राजनैतिक संरक्षण दिया है कि वे आज राज्य के लिए भस्मासुर बन गए हैं। जमात के कारण ही बंगाल में कट्टरपंथ को बढ़ावा ही नहीं मिला है बल्कि यूं कहें कि राज्य बारूद की ढेर पर बिठा दिया है।
हावड़ा की घटना नहीं है सामान्य
हावड़ा और आसनसोल में अराजकता की घटनाएं साधारण नहीं हैं। हावड़ा राज्य का ऐसा जिला है जो कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है। इसी संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने इस क्षेत्र को “नियन्त्रण जोन” घोषित किया है और यहां धारा 144 लागू है। इस सबके वाबजूद पुलिस बल पर जो हमला हुआ वह सिद्ध करता है की पश्चिम बंगाल में जमात इतनी ताकतवर है कि वह पुलिस को भी कुछ नहीं समझती। ज्ञात हो कि इस इलाके में समय—समय पर पुलिस बल पर हमले हो चुके हैं। लेकिन राज्य के शासन और प्रशासन ने इससे कोई सीख नहीं ली और न तो अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की। लिहाजा समय के साथ—साथ इनके हौसले बुलंद होते गए।