लॉकडाउन के कारण बंद हुई माल-भाड़ा गलियारा परियोजना पर रेलवे ने शुरू किया काम

    दिनांक 29-अप्रैल-2020   
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समर्पित माल-भाड़ा गलियारा परियोजना पर रेलवे ने फिर से काम शुरू किया। इसके अंतर्गत माल गाड़ियों के लिए अलग से रेल पटरी बिछाने का काम चल रहा है। यह भारत की सबसे बड़ी ढांचागत परियोजना है। 81,000 करोड़ रु. की यह परियोजना 2021 में पूरी हो जाएगी
 
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सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए काम करते कामगार
 
तालाबंदी के कारण बंद हो गई समर्पित माल-भाड़ा गलियारा परियोजना (डीएफसीपी) पर फिर से काम चालू कर दिया गया है। यह भारत की सबसे बड़ी ढांचागत परियोजना है। 81,000 करोड़ रु. की यह परियोजना 2021 में पूरी हो जाएगी। इसके बाद भारत में माल ढुलाई के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हो जाएगा। यह परियोजना सरकार की प्राथमिकता में है। इसलिए रेवले ने इस पर फिर से काम शुरू कर दिया है। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी डेडिकेटेड फ्रेंट कॉरिडोर कॉरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (डीफसीसीआईएल) के पास है। डीफसीसीआईएल के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान ने बताया कि 373 कार्यस्थलों पर 22,289 कामगार काम कर रहे हैं। कामगारों को चायनीज वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा जारी सभी नियमों का पालन किया जा रहा है। सभी कामगारों को मास्क दिए गए हैं और उनके लिए सेनेटाइजर की भी व्यवस्था की गई है। यही नहीं, कामगारों को कार्यस्थल पर ही खाना मुहैया कराया जा रहा है। उनके लिए अस्पताल की भी व्यवस्था की गई है, ताकि कभी जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके। कामगारों तक मास्क, सेनेटाइजर, दस्ताने आदि पहुंचाने के लिए 23 और 24 अप्रैल को 'कोविड प्रोटेक्शन स्पेशल' गाड़ी चलाई गई।
 
उल्लेखनीय है कि परियोजना के तहत दो गलियारे बनाए जा रहे हैं— एक, पूर्वी समर्पित माल गलियारा परियोजना और दूसरा, पश्चिमी समर्पित माल गलियारा परियोजना। इन दो गलियारों में केवल माल गाड़ियां ही चलेंगी, ताकि अन्य रेलगाड़ियां अपनी तय गति से चल सकें और माल की ढुलाई में भी कोई बाधा न आए। इस गलियारे में मालगाड़ी की गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
 

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 एक पुल के निर्माण के लिए कार्य करते मजदूर
 
पश्चिमी गलियारा दादरी (उत्तर प्रदेश) से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (मुम्बई) तक जाएगा। इसकी लंबाई 1,499 किलोमीटर है। इसके लिए जापान मदद कर रहा है। पूर्वी गलियारा लुधियाना (पंजाब) से दानकुनी (पश्चिम बंगाल) तक जाएगा। इसकी लंबाई 1839 किलोमीटर है। यह परियोजना विश्व बैंक की मदद से आगे बढ़ रही है।
 
इस परियोजना के पूरा होने से देश की परिवहन क्षमता में जबर्दस्त बढ़ोतरी होगी और परिवहन लागत में भी कमी आएगी। इससे बिजलीघरों, खदानों, बंदरगाहों, व्यापार और उद्योग के क्षेत्र के लिए प्रभावी परिवहन सेवाएं उपलब्ध होंगी। इस परियोजना से पर्यावरण को बचाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि इससे ज्यादातर माल ढुलाई का काम रेलवे को मिल जाएगा और सड़क मार्ग से माल की ढुलाई कम जाएगी। सड़क मार्ग से स्थानीय स्तर पर माल ढुलाई होगी। इससे कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा। अनुमान है कि पूर्वी गलियारे से 2021-22 तक 153 मिलियन टन माल ढुलाई होगी, जो 2036-37 में बढ़कर 251 मिलियन टन हो जाएगा। जबकि पश्चिमी गलियारे से 2021-22 तक 161 मिलियन टन माल की ढुलाई होगी, जो 2036-37 में 284 मिलियन टन हो जाएगी।
 
बता दें कि अभी देश में माल और सवारी गाड़ियां एक ही पटरी पर चलती हैं। इस कारण सवारी गाड़ियां तो देर से चलती ही हैं, साथ में मालगाड़ियां भी अपने गंतव्य स्थान पर समय से नहीं पहुंच पाती हैं। इस कारण रेलवे को राजस्व का बहुत नुकसान होता है। इसे देखते हुए ही 2005—06 में मालगाड़ी के लिए ही अलग से रेल पटरी बिछाने पर मंथन शुरू हुआ। कई साल तक इस परियोजना पर काम भी शुरू नहीं हो सका और जब हुआ तो काम की गति बहुत ही कम थी। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर इस परियोजना के लिए पैसे की व्यव्स्था की गई और काम में तेजी लाई गई। अब उसी का सुपरिणाम दिख रहा है। गलियारे के दो हिस्सों में माल ढुलाई का काम भी होने लगा है। 2019 के सितम्बर से ही पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारे में भरान से खुर्जा और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे में अजमेर से रेवाड़ी तक के खंड में माल ढुलाई हो रही है।
उम्मीद है कि यह परियोजना समय पर पूरी होगी और देश में माल ढुलाई का काम सुगम और सस्ता हो जाएगा।