इंडिया टुडे, इंडियन एक्सप्रेस, पीटीआई और झूठी खबरें
   दिनांक 03-अप्रैल-2020
समाचार एजेंसी पीटीआई ने ट्विटर पर एक अफ़वाह उड़ाई कि "बंगाल में लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए हज़ारों लोग मंदिरों में इकट्ठा हुए।" मीडिया की सेकुलर जमात ने इस अफ़वाह को फ़ौरन लपक लिया। देखते ही देखते इंडिया टुडे और इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर यह ख़बर जस की तस आ गई

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देश में चाइनीज़ वायरस के सबसे बड़े वाहक बनकर उभरे तबलीगी जमात की करतूतें लगातार सामने आ रही हैं। कभी अस्पताल में नर्सों के आगे निर्वस्त्र हो जाने, तो कभी अश्लील टिप्पणियां करने की बातें हर तरफ़ चर्चा का विषय हैं। मीडिया के एक वर्ग ने उनके बचाव की कोशिश तो पूरी की लेकिन सचाई शीशे की तरह साफ़ है और वो जितनी सफ़ाई देते हैं उतना ही उलझते जाते हैं। ऐसे में मीडिया की सेकुलर जमात ने एक नया नुस्ख़ा निकाल लिया। एक फेक न्यूज़ फैलाई गई कि बंगाल के अलग-अलग शहरों में राम नवमी के अवसर पर हज़ारों श्रद्धालु मंदिरों में जमा हुए। जिस तरह दो दिन पहले वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों के फंसे होने का झूठ उड़ाया गया था ये उसी का थोड़ा परिष्कृत रूप था। क्योंकि इस बार इसकी ज़िम्मेदारी समाचार एजेंसी पीटीआई की थी। वहीं पीटीआई जो पिछले कुछ साल में देश में फ़र्ज़ी ख़बरों की सबसे बड़ी स्रोत बनकर उभरी है।
राम नवमी को लेकर सफ़ेद झूठ

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समाचार एजेंसी पीटीआई ने ट्विटर पर एक अफ़वाह उड़ाई कि "बंगाल में लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए हज़ारों लोग मंदिरों में इकट्ठा हुए।" मीडिया की सेकुलर जमात ने इस अफ़वाह को फ़ौरन लपक लिया। ताकि इसके बहाने तबलीगी जमात की करतूतों को दबाया जा सके। देखते ही देखते इंडिया टुडे और इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर यह ख़बर जस की तस आ गई। इंडियन एक्सप्रेस ने बंगाल के बजाय मुंबई के एक मंदिर में हुई पूजा की तस्वीर छापी। जबकि वो पूजा कोरोना वायरस से बचाव के लिए जारी दिशानिर्देशों के तहत थी और उसमें सिर्फ़ मंदिर के पुजारी उपस्थित थे। थोड़ी ही देर में ढेरों प्रोपोगेंडा न्यूज़ पोर्टलों ने इस अफ़वाह को फैलाने का काम संभाल लिया। पिछले साल की राम नवमी पूजा की तस्वीरों के साथ ख़बर दी जाने लगी। बताया गया कि मंदिरों में तो भीड़ जुट रही है, लेकिन सारी बंदिश सिर्फ़ मस्जिदों के लिए है। उधर, यह अफ़वाह फैलाने वाली पीटीआई ने ट्वीट को चुपचाप डिलीट कर दिया और इस ग़लत समाचार को वापस लेने की कोई सूचना भी जारी नहीं की।
राम नवमी पूजा का क्या है सच
उधर बंगाल की मीडिया और प्रशासन की रिपोर्ट से सच्चाई साफ़ हो जाती है। दरअसल रामनवमी के दिन कुछ जगहों पर श्रद्धालु मंदिरों में पूजा के लिए गए थे। लेकिन सारे मंदिर पहले से ही बंद थे। पुजारियों ने उनसे अपील की कि वो वापस अपने घर जाएं और घर पर ही पूजापाठ करें। कहीं किसी भी मंदिर में राम नवमी की सार्वजनिक पूजा नहीं हुई। हर जगह मंदिरों में भक्तों का प्रवेश वर्जित था और पूजा की औपचारिकता वहाँ के पुरोहितों ने ही निभाई। पीटीआई ने अपना ट्वीट भले ही हटा दिया हो, लेकिन उसके हवाले से इंडिया टुडे और इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइटों पर धड़ल्ले से यह समाचार अभी चल रहा है।