नोएडा , बरेली और लखनऊ में मुसलमानों ने तोड़ा लॉकडाउन, एफआईआर
   दिनांक 03-अप्रैल-2020
मुसलमानों के मौलाना बोल रहे हैं मौत अल्लाह की मर्जी के बिना नहीं आ सकती. जाहिलपने की हद है यह सुनने के बाद भी कुछ मुसलमान यह समझने को तैयार नहीं हैं लॉकडाउन का मकसद क्या है. मस्जिद में नहीं तो मकान की छत पर ही सही मगर नमाज होगी तो जमात के साथ

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कोरोना महामारी में लॉक डाउन के बावजूद नोएडा के थाना सेक्टर - 20 के अंतर्गत एक घर की छत पर नमाज पढ़ाने के लिए भीड़ जुटाई गई थी. पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके नमाज पढ़ाने वाले मौलाना को गिरफ्तार कर लिया. जनपद में धारा 144 लागू है. इसके बावजूद नमाजियों ने भीड़ एकत्र करके नमाज अदा की थी.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लॉकडाउन के बाद भी चौक क्षेत्र के मो.आरिफ ने मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया. बताया जा रहा है कि पुलिस ने इस मजहबी कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए मो. आरिफ को मना किया था मगर उसके बावजूद इस मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया गया. आरिफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. इस आयोजन में करीब 25 से अधिक लोग शामिल हुए थे.
लखनऊ - अयोध्या हाईवे पर एक बड़ा कंटेनर जा रहा था जिसमे सामान के बजाय आदमी भरे हुए थे. इसको देख कर कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दी. जब पुलिस ने इस कंटेनर को रोका तो इसमें इज़हार , असलम , रिजवान , इस्लामुद्दीन , अयूब खान समेत 61 लोग भरे हुए थे. इन लोगों ने पुलिस को बताया कि ये सभी लोग मुम्बई से चले हैं. जब चले थे तो करीब 100 लोग थे . रास्ते में कुछ लग उतर गए. पुलिस ने इन लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर जांच करवाई.
इसी प्रकार, बरेली जनपद की एक दरगाह में करीब 200 से ज्यादा लोग अधिक एकत्र हैं. दरगाह के प्रबन्धन का कहना है कि "दरगाह पर जो मुरीद आये थे. उन्हें लॉकडाउन के बाद दरगाह खाली करने के लिए कहा गया था. मगर इन लोगों ने दरगाह खाली नहीं किया." इस कोरोना के दौर में इतनी संख्या में लोगों का एकत्र होना बेहद खतरनाक है.