मुस्लिम रहनुमा और आलिम कर रहे सरसंघचालक के बयान की प्रशंसा

    दिनांक 30-अप्रैल-2020   
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कोरोना संक्रमण से लड़ते भारत को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की साजिश रचने वालों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत द्वारा नसीहत देने की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। मुस्लिम रहनुमां उनके कथन को देश को नई राह दिखाने वाला मानते हैं। देवबंद के आलिमों ने भी उनके बयान का स्वागत किया है 
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कोरोना संक्रमण से लड़ते भारत को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की साजिश रचने वालों को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत द्वारा नसीहत देने की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। विशेषकर वे लोग अधिक उत्साहित हैं, जिनके मन में आशंकाएं घर कर रही थीं कि देश का बहुसंख्यक उनके खिलाफ खड़ा है। इस गलतफहमी का अनुचित लाभ उठाने की नियत से कुछ लोगों ने विश्व के मुस्लिम देशों में भारत और हिंदू विरोधी अभियान छेड़ रखा है।
इसमें संदेह नहीं कि देश में कोराना महामारी का फैलाव तब्लीगियों ने फैलाया। उनकी हठधर्मिता और इनके प्रमुख मौलाना साद के अराजक रवैये ने देश को एक बड़े संकट में धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यही नहीं कोरंटीन किए गए तब्लीगी तमातियों द्वारा डॉक्टरों, नर्सों के साथ दुर्व्यवहार तथा थूकने, नोट, फल, सब्जी आदि में थूक लगाकर कोरोना फैलाने के प्रयासों से भी देश का माहौल बिगड़ा है। इस सबको ढकने के लिए केरल के कुछ मजहबी संगठन, जामिया, एएमयू के छात्र, सउदी अरब के अखबारों में काम करने वाले पाकिस्तानी पत्रकारों ने एक षड़यंत्र के तहत मुस्लिम देशों में भारत, हिंदू समुदाय, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भारतीय जनता पार्टी की छवि बिगाड़ने के लिए अभियान छेड़ दिया। इसका दुष्प्रभाव यह रहा कि भारत में कोरोना से लड़ाई लड़ने वालों का ध्यान बंटने लगा। देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की साजिशें रची जाने लगीं। ऐसे समय में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का राहत भरा बयान आया। उनके बयान की सर्वाधिक मुस्लिम आलिम तारीफ कर रहे हैं।
बता दें कि कोरोना संक्रमण की अफरा-तफरी के बीच श्री भागवत ने साम्प्रदायिकता को हवा देने की साजिश रचे जाने की ओर इशारा किया था। उन्होंने नागपुर में अपने संबोधन में देश की 130 करोड़ जनता को भय व क्रोध से बचते हुए कोरोना के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने स्वदेशी मॉडल आधारित व पर्यावरण हितैषी समाज निर्माण करने पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा कि 130 करोड़ भारतवासी हमारा परिवार हैं। यदि कोई इंसान कुछ गलती करता है तो पूरे समुदाय से दूरी बनाना ठीक नहीं।
श्री भागवत के इस बयान को मुस्लिम रहनुमा देश को नई राह दिखाने वाला मानते हैं। देवबंद के आलिमों ने भी उनके बयान का स्वागत किया है। देवबंदी आलिम मुफ्ती साद कहते हैं कि श्री भागवत के इस बयान को सबको मानना चाहिए। उनकी सोच की हम तारीफ करते हैं। एक इंसान की गलती से पूरे समुदाय से दूरी बनाना ठीक नहीं। उन्होंने सरसंघचालक से अपील की कि सरकार से कहकर मुल्क में भाईचारा बिगाड़ने, एक दूसरे से लड़ाने और हिंदू-मुसलमान कर माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सख्त कानून बनाया जाए।
इसी तरह मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य व दिल्ली फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम डॉ मुफ्ती मुकर्रम अहमद भी सरसंघचालक के बयान को लेकर बेहद सकारात्मक हैं। उन्होंने श्री भागवत के बयान की सराहना करते उनसे देश में साम्प्रदायिक सौहार्द की डोर और मजबूत करने को आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सब उनके साथ जरूर आएंगे। मुफ्ती मुकर्रम के अनुसार, देशभर में भाईचारा बना रहे, इसके हक में 99 फीसद आबादी है। बस कुछ लोग हैं, जो माहौल खराब करने की कोशिश में लगे रहते हैं। ऐसे लोगों की सख्त लहजे में आलोचना होनी चाहिए।
श्री भागवत के बयान को शिया जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मोहसिन तकवी ने भी स्वागत योग करार दिया है। उन्होंने कहा कि वह उनके बयान से पूर्णतः सहमत हैं। श्री भागवत की बात एकदम सही है। कुछ लोग गलती करें तो कटघरे में पूरे समाज को खड़ा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तब्लीगी जमात के शीर्ष नेतृत्व ने गलती की, लेकिन बदनामी नीचे वालों की भी हुई। जरूरत आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ कोरोना से लड़ने की है। यह बीमारी किसी एक कौम की नहीं ,बल्कि हर कौम की दुश्मन है। संक्रमण फैलेगा तो हर व्यक्ति चपेट में आएगा।
 
इस मुददे पर अखिल भारतीय इमाम संगठन के मुख्य इमाम डॉ उमेर अहमद इलयासी ने कहा कि जिस तरह का संकट है, उसमें श्री भागवत का बयान देश के सभी वर्ग को एक साथ जोड़ता है। ईमानदारी, निडरता और अनुशासन से इस संकट से देश को उबारा जा सकता है। मानवता को बचाने के लिए सभी को रमजान में ज्यादा इबादत और दुआ करनी चाहिए। ताकि ईद से पहले हम कोरोना से मुक्त हो सकें।
सरसंघचालक के उदृबोधन पर आध्यात्मिक गुरु व परमार्थ निकेतन आश्रम के संस्थापक स्वामी चिदानंद कहते हैं कि मौजूदा संकट पर श्री भागवत ने स्पष्टता के साथ जो कहा, उससे बेहतर कोई जवाब नहीं हो सकता। किसी को भी ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए, जिससे पूरी मानवता बदनाम हो और कोरोना से जंग में भारत हारे। इस लड़ाई में हम सबको साथ रहकर सामना करना है। श्री भागवत ने जिस तरह कोरोना योद्धाओं का अभिनंदन किया है, उसी तरह हर देशवासी को इन योद्धाओं का सम्मान करना चाहिए।