कोरोना महामारी: बलूचिस्तान में छात्र मरते हैं तो मर जाएं
    दिनांक 04-अप्रैल-2020
क्वेटा से हुनक बलोच
बलूचिस्तान के बोलन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चीनी वायरस के संदिग्धों को रखा जा रहा है, लेकिन वहां तैनात डॉक्टरों, नर्सों और स्टूडेंट की हिफाजत का कोई इंतजाम नहीं। अगर सरकारी बेरुखी का यही आलम रहा तो आने वाले समय में अगर वहां वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में बेतहाशा इजाफा हो जाए तो आश्चर्य नहीं

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बलूचिस्तान के लिए पाकिस्तानी तंगदिली का ये आलम है कि कोरोना के इलाज के मामले में भी उसने निहायत अफसोसनाक रवैया अख्तियार कर रखा है। हुकूमत ने बोलन मेडिकल कॉलेज के छात्रों की अस्पताल में ड्यूटी लगाई लेकिन उन्हें न तो अच्छे मास्क दिए और न ही सैनेटाइजर का इंतजाम किया जबकि इसी अस्पताल में चीनी वायरस (कोरोना) के संदिग्ध मरीज रखे जा रहे हैं। लिहाजा, नाराज स्टूडेंट सड़कों पर उतर आए हैं और अपने लिए इंसाफ मांग रहे हैं। इन छात्रों का कहना है कि सरकार ने उन सबकी जान को जोखिम में डाल दिया है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के छात्रों की ड्यूटी दोपहर 2 बजे से रात के 8 बजे तक लगाई गई है। हुकूमत की संगदिली का ये आलम है कि उन्हें घटिया सा मास्क पकड़ा दिया गया है जो कम से कम चीनी वायरस से तो उन्हें कतई महफूज नहीं रख सकता। ड्यूटी में तैनात एक मोहतरमा ने कहा, “ 295 मास्क मंगाए गए थे, जो डॉक्टरों को दे दिए गए लेकिन अस्पताल ने हमारी हिफाजत का कोई ख्याल नहीं रखा। और तो और, न तो हमें सैनेटाइजर दिए गए, न ही दस्ताने। हमने कई बार अपनी बात कही, लेकिन उनपर कोई असर नहीं है।”
कई डॉक्टरों की हालत गंभीर
इस अस्पताल में 800 से 1000 लोगों को कोरेंटाइन करने का इंतजाम किया गया है और यहां के हालात ऐसे हैं कि मरीजों का इलाज-देखभाल करने वाले लोगों की भी जान पर आफत है। हाल-फिलहाल चार डॉक्टर चीनी वायरस से बीमार हो गए और जब उनकी हालत खराब हो गई तो उन्हें शेख जायद अस्पताल में दाखिल कराया गया। यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. यसर अचकजई ने बोलन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के हालात पर अफोसस जताते हुए हुकूमत से दरख्वास्त की है कि यहां काम करने वाले डॉक्टर, नर्स और दूसरे सभी कर्मचारियों की हिफाजत के माकूल इंतजाम किए जाएं। उनका कहना है कि अगर इलाज करने वाले लोगों को यह हाल होगा तो बीमार लोगों का क्या होगा।
सड़कों पर उतरीं कॉलेज की स्टूडेंट ने बताया कि अस्पताल की जो हालत है, उसमें किसी को भी इन्फेक्शन हो सकता है। एक के बाद कई डाक्टर ऐसे ही चीनी वायरस की चपेट में नहीं आ गए। यहां तक कि मरीजों से लेकर डॉक्टर-नर्स और अस्पताल में काम करने वाले दूसरे लोगों के लिए भी अलग-अलग टॉयलेट का भी इंतजाम नहीं। अगर सभी एक ही टॉयलेट का इस्तेमाल करेंगे तो मरीज तो मरीज, डॉक्टर भी बीमार पड़ेंगे, और यहां यही हो रहा है। लेकिन एडमिनिस्ट्रेशन का इस ओर कोई तवक्को नहीं। आज बेशक बात वायरस की हो, लेकिन डॉक्टर वगैरह तो काफी पहले से ही स्टाफ के लिए अलग टॉयलेट की मांग करते रहे हैं लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
छात्रों को धमकी
छात्रों और अस्पताल एडमिनिस्ट्रेशन में तनातनी पिछले कुछ समय से चल रही है। जैसे-जैसे चीनी वायरस के संदिग्ध मरीजों की तादाद बढ़ती गई, यह तकरार बढ़ती गई। नाराज स्टूडेंट ने जब अस्पताल में ड्यूटी करने से इनकार कर दिया तो उन्हें धमकाया गया कि अगर उन्होंने ड्यूटी नहीं की तो कॉलेज से निकाल दिया जाएगा। बलूचिस्तान में वैसे ही तालीम की बुरी हालत है और इतनी ऊंची पढ़ाई करने का मौका कम ही लोगों को मिल पाता है। लिहाजा, स्टूडेंट खौफ में आ गए और ड्यूटी पर बने रहे। लेकिन जैसे-जैसे एक के बाद एक डॉक्टर भी वायरस से बीमार होने लगे और उनकी हालत खराब हो गई, एक बार फिर स्टूडेंट का गुस्सा खौल गया और वे सड़कों पर उतर आए।
मास्क के लिए चंदा
जब एडमिनिस्ट्रेशन ने मास्क वगैरह का इंतजाम नहीं किया तो डॉक्टरों ने खुद की, नर्सों की और इन स्टूडेंट समेत अस्पताल में तैनात तमाम लोगों की जान बचाने के लिए मास्क वगैरह खरीदने के लिए अपने बूते पैसे जुटाए। डॉक्टरों ने इसके लिए कुल 3.5 लाख रुपये इकट्ठा किए हैं जिसमें कार्डियो के प्रोफेसर डॉ. जलाल ने 30 हजार, डॉ. अमानुल्लाह ने 20 हजार, डेंटल के डॉ. मिर्जा खान और प्रो. डॉ. मुजीबर्रहमान ने 25-25 हजार, ट्रॉमा सेंटर के डॉ. दाऊद ने 11 हजार, प्रो. डॉ. गुलाम नासिर, कार्डियो की अस्सिटेंट प्रोफेसर हुमा और डेंटल के डॉ. चंगेज खान ने 10-10 हजार रुपये दिए। उम्मीद है कि इस चंदे की बदौलत इनकी जान बच जाएगी। लेकिन पाकिस्तान और बलूचिस्तान की हुकूमत पर यह सवाल तो जरूर है कि आखिर वे इतने तंगदिल क्यों हैं, ऐसे मुश्किल वक्त में भी उन्होंने इन फरिश्तों को मरने के लिए छोड़ दिया?