तब्लीग जमात ने असम को भी डाला संकट में
   दिनांक 04-अप्रैल-2020
असम से डॉ. संजीब गोस्वामी
तीस मार्च तक असम में कोरोना का कोई भी मामला नहीं था लेकिन तब्लीगी जमात के चक्कर में असम भी कोरोना से अछूता नहीं रहा।

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दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के लोगों के छिपे होने और उनके कोरोना होने की पुष्टि के बाद असम में भी हड़कंप की स्थिति है। यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि असम में 34 फीसदी मुसलमान आबादी है और भारी संख्या में इस इजतेमा में असम के लोगों के शामिल होने की खबर है। जानकारी की मानें तो असम से करीब 160 से अधिक मुस्लिम शामिल हुए थे, जिसमें 68 लोग इजतेमा के बाद असम वापस आए ही नहीं और जो आए हैं वे सभी ट्रेन या प्लेन से वापस आए हैं। अब यह लोग कहां-कहां गए, किन-किन लोगों से मिलें, यह बड़ा चिंताजनक है। हालांकि सरकार इन सभी को ढूंढने और उन्हें पकड़ने के लिए प्रयासरत हैं। बहरहाल, मरकज में शामिल होने वाले जो मुस्लिम गिरफृत में आए हैं उन सभी का ब्लड सैंपल लेकर जांच की जा रही है। ऐसे सभी लोग जिन-जिन के संपर्क में आए, उनसे संपर्क करके आइसोलेशन या क्वारंटाइन की व्यवस्था शुरू की गई है। असम में 30 मार्च तक कोरोना का एक भी मामला नहीं था। लेकिन 31 मार्च को करीमगंज जिले में तब्लीग मरकज से लौटे पहले व्यक्ति का मामला पकड़ में आया। 1 अप्रैल को वहीं से लौटे और 4 मामले कोरोना के मिले। स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि जो पांच लोग कोरोना के पाॅजिटिव मिले हैं, उनमें से जमालुद्दीन, जो करीमगंज से है। यह व्यक्ति 14 लोगों के संपर्क में आया था। बाकी 4 लोग- मोहम्मद अरशद अली, जैनब अली, कछार अली और मोहम्मद फखरुद्दीन के संपर्क में आने वालों की जांच की जा रही है।