लोकतंत्र विरोधी है इस्लाम
   दिनांक 04-अप्रैल-2020
डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) के अवसर तक रोजाना उनके जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास किया जाएगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं।

baba _1  H x W:
डॉ. आंबेडकर ने लिखा है, ''मुस्लिम राजनीति कितनी विकृत है यह भारतीय राज्यों में हुए कुल राजनीतिक सुधारों और मुस्लिम नेताओं के तौर—तरीकों से ही देखा जा सकता है। मुसलमानों की महत्वपूर्ण चिंता लोकतंत्र नहीं है। महत्वपूर्ण चिंता यह है कि बहुमत शासन वाला लोकतंत्र हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों के संघर्ष को किस प्रकार प्रभावित करता है? क्या यह उनको शक्तिशाली बनाएगा या कमजोर? यदि लोकतंत्र उन्हें कमजोर करेगा तो उनके पास लोकतंत्र नहीं रहेगा। मुस्लिम राज्य सड़ी—गली व्यवस्था ज्यादा पसंद करेंगे बनिस्पत एक अच्छे तंत्र की, क्योंकि वे भी हिंदुओं के मुद्दों में ही ज्यादा रुचि रखते हैं। मुस्लिम समुदाय में जो राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता आई है उसका एक और एकमात्र कारण है मुसलमान सोचते हैं कि हिंदुओं और मुसलमानों को एक समान संघर्ष करना चाहिए। हिंदू मुसलमानों के ऊपर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते हैं और मुसलमान फिर से राज करने वाले समुदाय की अपनी ऐतिहासिक स्थिति को देखना चाहते हैं। तब इस संघर्ष में मजबूत ही जीतेगा, और अपनी शक्ति बढ़ाएगा। वे ऐसी किसी भी चीज के बारे में नहीं सोचेंगे, जो उनकी पद—प्रतिष्ठा में कोई कमी लाने वाला हो।''