योगी बोले, 15 अप्रैल को लॉक डाउन खुलता है तो अभी से बनाएं कार्य योजना
   दिनांक 04-अप्रैल-2020
लॉकडाउन को लेकर चल रहा संशय फिलहाल खत्म हो गया है. योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पर अफसरों की बैठक कर कहा कि लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोलने की योजना बनाएं

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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि "अगर 15 अप्रैल से लॉकडाउन खुलता है तो हालात बहुत चुनौतीपूर्ण होंगे. ऐसे में जो लोग जहां पर रुके हुए हैं . वहां से गंतव्य पर पहुंचना चाहेंगे.ऐसी स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कराना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा. इसके लिए अभी से कार्ययोजना तैयार करें. स्कूल, कॉलेज, अलग-अलग तरह के बाजार और मॉल कब और कैसे खुलेंगे इसकी कार्य योजना तैयार करें." शुक्रवार को सरकारी आवास पर टीम-11 की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि " हर जरूरतमंद तक समय से भोजन पहुंचाना सुनिश्चित करें. इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद लें. संबंधित जिलों के डीएम से समन्वय कर आंगनबाड़ी का पौष्टिक आहार भी घर-घर तक पहुंचाएं. हमें दो स्तर पर तैयारी करनी होगी. वर्तमान स्थिति और भविष्य को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार करें. हर जिले में कम्युनिटी किचन चलाएं. इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं सहित अन्य जो लोग भी मदद देना चाहें उनकी मदद लें. हर कोई भोजन बांटने न निकले इसके लिए कुछ कलेक्शन सेंटर बनाएं. वहां भोजन एकत्र हो और बंटने के लिए जाएं.भविष्य की तैयारियों के मद्देनजर एनएसएस, एनसीसी, स्काउट्स और युवक मंगल दल में से वालंटियर तैयार करें। इनको कोराना के संक्रमण को रोकने और संक्रमण के दौरान क्या करना है, इस बारे में प्रशिक्षण दें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि "कोरोना के संक्रमण के दौरान एनेस्थेसिया, फीजिशियन, बच्चों और महिलाओं के डॉक्टर्स की सर्वाधिक जरूरत होती है. निजी क्षेत्र में संबंधित विशेषज्ञता के कितने डॉक्टर्स हैं उनकी सूची तैयार करें. इनको प्रशिक्षण दें ताकि जरूरत पड़ने पर इनसे मदद ली जा सके. इसी तरह के प्रशिक्षण की जरूरत इनके पैरामेडिकल स्टाफ और आयुष विभाग के चिकित्सकों और उनके स्टॉफ को भी होगी. आवश्यकता पड़ने पर निजी चिकित्सालयों के कितने बेड और वेंटीलेटर उपलब्ध हो सकते हैं. इसकी भी सूची तैयार करें.
एक हजार करोड़ का होगा कोरोना केयर फंड
सरकार एक हजार करोड़ रुपये का कोरोना केयर फंड तैयार करेगी. इस फंड से टेस्टिंग लैब की सुविधाएं बढ़ाने के साथ इलाज में जरूरी और उपकरणों मसलन वेंटीलेटर, मास्क, सेनिटाइजर, पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट) आदि की व्यवस्था की जाएगी. इस फंड में सरकार तो मदद देगी ही, अन्य लोगों के अलावा कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबलटी के तहत औद्योगिक घरानों से भी मदद ली जाएगी. यह प्रयास होगा कि हर मंडल और सभी 24 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जांच की सुविधा हो. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग विभाग यह सुनिश्चित कराए कि जरूरी सामानों का उत्पादन प्रदेश में ही हो. इससे वे सस्ते तो होंगे ही उनकी उपलब्धता भी बढ़ेगी. खादी के कपड़े से ऐसा मास्क तैयार कराएं जिसका दोबारा उपयोग किया जा सके.इसके लिए महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप की मदद लें. ऐसा करने से खादी का प्रचार भी होगा, स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार मिलेगा और मास्क सस्ता होने पर लोग इसे अपनी आदत का हिस्सा बना सकेंगे.