बंटवारे के खिलाफ थे बाबासाहेब
   दिनांक 06-अप्रैल-2020
डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) के अवसर तक रोजाना उनके जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास किया जाएगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं

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डॉ. आंबेडकर लिखते हैं, ''यह भी एक बड़ा मजाक है कि पाकिस्तान के जन्म की मांग को ही जमींदोज कर दिया जाता, तो वह दोबारा से सिर नहीं उठा सकेगा। मैं तो इस बात पर जोर दूंगा कि पाकिस्तान की मांग को दफ़न करने से बेहतर होगा पाकिस्तान के भूत को दफ़न करना।
भारत सरकार की रचना के सन्दर्भ में पाकिस्तान परस्त जो विचारधारा हैं उसके अनुसार तो पाकिस्तान का भूत भविष्य में भी भारत के लिए नकारात्मक व खतरे की छाया ही बयां करता रहेगा। इसके लिए किसी भी प्रकार के अंशकालिक अथवा समयबद्ध कार्यक्रम की आवश्यकता नहीं बल्कि भविष्य को देखते हुए स्थायी समाधान की जरूरत है। ऐसा करने पर यही होगा कि हम बीमारी को ख़त्म करने के बजाय उसके लक्षणों का ही उपचार कर रहे हैं। लेकिन जैसा ऐसे मामलों में अक्सर होता है कि बीमारी बढ़ती हुई अपना प्रभाव और व्याप्ति बढ़ाकर घातक स्थिति में पहुंच जाती है, ऐसा नहीं होना चाहिए।''