कहां हो मौलाना साद ? पुलिस तुमको ढूंढ रही है!
   दिनांक 06-अप्रैल-2020
मौलाना साद ने यह साबित कर दिया कि वह किसी मानव का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का दुश्मन है. दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पुलिस इस कोरोना के क्रिमिनल को ढूंढ रही है मगर अभी तक इसका कोई अता - पता नहीं चल पाया है

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पूरे देश में लॉकडाउन करते समय तैयारियां ठीक-ठाक थीं. मगर इन आत्मघाती जमातियों से निपटना पड़ेगा. इसका अंदेशा किसी को भी नहीं था. आंकड़ों को अगर देखें तो साफ़ है कि इन जमातियों ने अगर संक्रमण ना फैलाया होता तो लाक डाउन के बाद भारत, कोरोना पर लगभग नियंत्रण प्राप्त कर चुका होता. 10 मार्च को होली के पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह कह दिया था कि “वह होली में सोशल डिस्टेंसिंग रखेंगे.” कई प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी होली में भीड़ – भाड़ से परहेज किया था. उसी समय केंद्र सरकार ने संकेत दे दिया था कि कोरोना का खतरा भारत की तरफ बढ़ रहा है. पहले एक दिन के लिए लॉक डाउन किया गया था. उसके बाद 21 दिन के लिए लॉक डाउन बढ़ाया गया. लॉकडाउन के बाद सभी धार्मिक आयोजनों पर भी रोक लगा दी गई थी. सभी लोग मान गए अगर नहीं माने तो ये जमाती! जिनके मज़हब में यह बताया गया है कि “यह कोरोना एक लाइलाज बीमारी है. इससे कोई बच नहीं सकता है. मस्जिद में दुआ पढ़ने से ही यह कोरोना जाएगा. कोरोना, बीमारी नहीं है, यह अल्लाह ताला का अज़ाब है.”
इन जमातियों को संबोधित करते हुए मौलाना साद ने ऐसा ही कुछ समझाया था. साद ने कहा था कि “नोवल कोरोना वायरस किसी भी मुस्लिम को नुकसान नहीं पहुंचा पायेगा. इसलिए कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है. अगर कोई इस वायरस से संक्रमित हो भी जाता है तो मरने के लिए सबसे अच्छी जगह मस्जिद ही है.”मौलाना साद के बारे में जानकारी मिली है कि उसका उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में एक फार्म हाउस है. ये फ़ार्म हाउस काफी आलीशान है और काफी बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ है. शामली पुलिस का कहना है कि जनपद की सभी सीमाएं सील हैं इसलिए फ़ार्म हाउस तक उसका पहुंच पाना संभव नहीं है. मगर फिर भी ड्रोन कैमरे से उस फार्म हाउस की निगरानी की जा रही है.
सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन है तब्लीगी जमात
प्राप्त जानकारी के अनुसार 55 वर्षीय मौलाना साद के परदादा मौलाना इलियास कांधलवी ने वर्ष 1927 में तब्लीगी जमात की स्थापना की थी. मौलाना साद ने ने हजरत निजामुद्दीन मरकज के मदरसा काशिफुल उलूम से आलिम तक की शिक्षा प्राप्त की है. तब्लीगी जमात भारत में सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन माना जाता है. पांच से अधिक लोग जिस संगठन में शामिल हों, उसे जमात कहा जाता है. जमात के लोग इस्लाम धर्म के प्रचार के लिए क्षेत्र विशेष की मस्जिद को चुनते हैं. मस्जिद में रह कर इस्लाम मज़हब का प्रचार – प्रसार करते हैं और फिर अगली मस्जिद के लिए रवाना हो जाते हैं.
दारूल उलूम ने मौलाना साद के खिलाफ जारी किया था फतवा
वर्ष 2016 के जून माह में मौलाना साद और मौलाना मोहम्मद जुहैरुल हसन के बीच विवाद बढ़ गया था. नेतृत्व को लेकर उठे इस विवाद में तब्लीगी जमात के दोनों गुट हिंसा पर उतारू हो गए थे. आमने – सामने दोनों गुटों ने पथराव भी किया था. इस पथराव में कई लोग घायल हो गए थे. वर्ष 2017 में दारुल उलूम देवबंद ने मौलाना साद के खिलाफ फतवा जारी किया था. बताया जाता है कि जमातियों की किसी बैठक में मौलाना साद ने कुरआन की व्याख्या की थी. मौलाना साद की उस व्याख्या को दारूल उलूम ने गलत बताया था और इसी से नाराज होकर उसके खिलाफ फतवा जारी किया था.