बलूचिस्तान में मास्क, जरूरी किट मांग रहे डॉक्टरों पर डंडे बरसाए, कई गिरफ्तार
   दिनांक 07-अप्रैल-2020
क्वेटा से हुनक बलोच
बलूचिस्तान में कोरोना के मरीजों का किस तरह इलाज किया जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डॉक्टरों को मास्क तक नहीं दिया जा रहा और कई डॉक्टर भी वायरस की चपेट में आ गए हैं। इसके खिलाफ गुस्साए डॉक्टर सोमवार को सड़कों पर उतरे तो पुलिस ने उनकी जमकर पिटाई की। कई को गिरफ्तार कर लिया गया

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आखिरकार क्वेटा के डॉक्टरों के सब्र का बांध टूट ही गया। बिना मास्क, बिना किट कोरोना वायरस से बीमार मरीजों का इलाज करते ये डाक्टर थक-हारकर सड़कों पर उतर आए। लेकिन पुलिस ने अमन उनकी पिटाई की और कई डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया।
क्वेटा के डॉक्टर लंबे अरसे से मास्क, हैंड सैनेटाइजर और जरूरी किट की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी बातों पर गौर नहीं किया जा रहा था। इसका नतीजा यह हुआ कि तमाम डॉक्टर भी करोनो की चपेट में आ गए। इनमें से कई कई की हालत खराब हो जाने के बाद उन्हें शेख जायद अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गई और उसके बाद भी अस्पताल की ओर से उन्हें हिफाजती सामान मुहैया नहीं कराए गए तो नाराज होकर ये डॉक्टर 6 अप्रैल को दोपहर बाद सड़कों पर उतर आए। देखते-देखते ये लोग जुलूस की शक्ल में जमा हो गए।
इस जुलूस में बोलन मेडिकल कॉलेज अस्पताल और शेख जायद अस्पताल के भी डॉक्टर थे। ये डॉक्टर मास्क, हैंड सैनेटाइजर जैसे ऐहतियाती सामान मुहैया कराने की मांग कर रहे थे। इसी बात को लेकर वे नारे बुलंद कर रहे थे, लेकिन थोड़ी ही देर में वहां पुलिस आ गई और उसने तमाम डॉक्टरों की पिटाई कर दी। कई डॉक्टरों को इसमें चोटें आई हैं और कुछ को तो इलाज के लिए भी ले जाना पड़ा। पुलिस ने डंडे से भी डॉक्टरों की पिटाई की और जब अपने साथी ड़ॉक्टरों के साथ ऐसे सलूक के खिलाफ डॉक्टरों ने आवाज उठाई तो दर्जनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
 
इस घटना के एक चश्मदीद ने बताया कि डॉक्टरों के खिलाफ हुई इस हरकत से क्वेटा के लोगों में काफी गुस्सा है। काफी देर तक लोग मौके पर जमे रहे। मेडिकल के एक स्टूडेंट ने बताया कि जबसे कोरोना के मरीज इन अस्पतालों में लाए जा रहे थे, ये डॉक्टर मास्क जैसी बेहद बुनियादी सहूलियतों की मांग कर रहे थे। अस्पताल की ओर से उन्हें कई बार भरोसा दिलाया गया लेकिन इसके बाद भी जब हिफाजती सामान मुहैया नहीं कराया गया तो डॉक्टरों को मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा। एक के बाद एक तमाम डॉक्टर वायरस के शिकार होते जा रहे थे, ऐसे में उनका सब्र टूट गया।
गौरतलब है कि काफी समय से क्वेटा के अस्पतालों में डॉक्टर बिना किसी हिफाजती किट के कोरोना वायरस से बीमार हुए लोगों का इलाज कर रहे हैं। बोलन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तो डॉक्टरी की तालीम हासिल कर रही लड़कियों को भी तैनात कर दिया गया और जब उन्हें मास्क वगैरह नहीं दिए गए तो इन लड़कियों ने भी सड़क पर उतरकर हुकूमत के रवैये के खिलाफ ऐतराज जताया था। फिर भी जब उनके लिए अस्पताल ने मास्क वगैरह का इंतजाम नहीं किया तो कुछ डॉक्टरों ने इसके लिए पैसे इकट्ठे किए थे।
बलूचिस्तान स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व वाइस चेयरमैन कमाल बलोच ने डॉक्टरों के खिलाफ ऐसे सलूक को बेहद शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा, “ यह बड़े अफसोस की बात है कि डॉक्टरों को जरूरी किट के लिए भी सड़क पर उतरना पड़ा और उससे भी ज्यादा तकलीफदेह बात यह है कि इन डॉक्टरों के साथ तशद्दुद की गई, उन्हें गिरफ्तार किया गया। जो लोग अपनी जान की फिक्र न करके कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे हों, उनके साथ इस तरह का सलूक एक कायराना हरकत है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तानी हुकूमत चाहती है कि पूरे बलूचिस्तान में कोरोना फैल जाए।”