कोरोना महामारी: सेवा में जुटे हैं 2 लाख संघ के स्वयंसेवक
   दिनांक 07-अप्रैल-2020
कोराना के कारण देश में पैदा हुई स्थिति को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जून के अंत तक अपने सभी वर्ग और एकत्रीकरण कार्यक्रम निरस्त कर दिये हैं। महामारी के कारण उपजे हालात में स्वयंसेवक युद्ध स्तर पर राहत अभियान में जुटे हैं। देश भर में 26 हजार स्थानों पर 2 लाख स्वयंसेवक सेवा कार्यों में लगे हैं। इन सेवा कार्यों से 25.05 लाख परिवारों, व्यक्तियों को लाभ मिला है

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चायनीज कोरोना वायरस से देश में पैदा हुई संकटपूर्ण स्थिति और इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा कार्यों को लेकर गत 6 अप्रैल को संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने ऑनलाइन पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह एक अभूतपूर्व संकट है और भारत के इससे निपटने के प्रयासों की अंतरराष्ट्ीय स्तर पर प्रशंसा हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज का तानाबाना कुछ ऐसा है कि संकट के मौके पर लोग एक दूसरे की सहायता को आगे आते रहे हैं जबकि दूसरे देशों में सरकार पर निर्भरता अधिक होती है।
विपदा में आगे आए स्वयंसेवक
संकट की इस घड़ी में भी संघ के स्वयंसेवक समाज की सेवा में रत हैं। स्वयंसेवकों ने उत्तर पूर्वी राज्यों-अरुणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा से लेकर देश के प्रत्येक राज्य में सेवा कार्य शुरू कर दिए हैं। इस समय देश भर में 26 हजार स्थानों पर 2 लाख स्वयंसेवक सेवा कार्यों में लगे हैं। इन सेवा कार्यों से 25.5 लाख परिवारों, व्यक्तियों को लाभ मिला है। समाज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वयंसेवकों ने 25 प्रकार के सेवा कार्य शुरू किए हैं। अनेक प्रांतों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से लोगों की आवश्यकतानुसार सहायता की जा रही है। भोजन, चिकित्सा, अन्य प्रांतों से आए परिवारों और प्रवासी श्रमिकों की व्यवस्था करने का कार्य स्वयंसेवकों ने किया। तमिलनाडु के तिरुपुर में स्वयंसेवकों ने स्वास्थ्य विभाग के लिए सेफ्टी उपकरण एवं अन्य जरूरतमंदों के लिए सेनेटाइजर, मास्क, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाइयां भी लाखों लोगों को वितरित की हैं। धार्मिक स्थानों पर आश्रित रहने वाले भिक्षुकों के लिए भी भोजन की व्यवस्था हो रही है। इसी तरह चित्रकूट और हम्पी में बंदरों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की जा रही है। देश में कई स्थानों—सोलापुर, यवतमाल, कोल्हापुर, उत्तर प्रदेश में घुमंतू जनजातियों और कई प्रदेशों में जनजातीय इलाकों में लोगों की सहायता के लिए स्वयंसेवक सतत लगे हैं। रक्तदान की व्यवस्था भी स्वयंसेवकों द्वारा की जा रही है।
प्रशासन को उपयोग के लिए दिए भवन
पत्रकार वार्ता में डाॅ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि मध्य प्रदेश में विद्या भारती ने 16 जिलों में अपने 115 भवन प्रशासन को उपयोग के लिए दिए हैं। छात्रों के लिए आनलाइन पाठ्यक्रम और परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। तो वहीं दिव्यांगों के बीच काम करने वाले संगठन सक्षम ने इस संकट के दौरान मनोचिकित्सकों की सेवाएं भी उपलब्ध करवाई हैं। दिल्ली से काफी संख्या में मजदूर बाहर जा रहे थे, तो ऐसे 8 लाख लोगों के आवास व भोजन की व्यवस्था स्वयंसेवकों ने की। दिल्ली से अपने स्थान पर जाने के लिए बड़ी तादाद में सीमा पर जुटे प्रवासी लोगों को उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से पांच हजार बसों का इंतजाम किया और उन्हें उनके स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की है। सेवा के इस विशाल कार्य में समाज के सहयोग से सेवा भारती, राष्ट्र सेविका समिति, विद्या भारती, आरोग्य भारती, भारतीय मजदूर संघ, वनवासी कल्याण आश्रम, सक्षम, नेशनल मेडिकॉज आर्गनाइजेशन, भाजपा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, आरोग्य भारती, सीमा जन कल्याण समिति सहित सभी संगठनों के कार्यकर्ता लगे हुए हैं।
वर्ग एवं एकत्रीकरण कार्यक्रम निरस्त
सर्वविदित है कि बंगलूरू में 15 से 17 मार्च तक तय संघ की वार्षिक प्रतिनिधि सभा संपूर्ण तालाबंदी की घोषणा से काफी पहले ही, पूर्व सावधानी बरतते हुए निरस्त कर दी गई थी। इतना ही नहीं, तुरंत ही समाज प्रबोधन का काम शुरू कर दिया गया। अप्रैल के मध्य से जून अंत तक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देने के लिए गर्मियों की छुट्टियों का लाभ लेकर 90 से अधिक संघ शिक्षा वर्गों का आयोजन होता रहा है। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए संघ के नेतृत्व ने निर्णय किया है कि जून अंत तक सभी वर्गों, एकत्रीकरण कार्यक्रमों को निरस्त किया जाता है। उल्लेखनीय है कि संघ पर जब प्रतिबंध लगा था, केवल तभी शिक्षा वर्ग नहीं हुए थे। संघ के इतिहास में 1929 से लेकर अभी तक ऐसा पहली बार हुआ है कि पूर्ण योजना बनने के पश्चात भी देश में सभी वर्गों को निरस्त कर दिया गया है।
पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए, तब्लीगी जमात से जुड़े एक सवाल पर डाॅ मनमोहन वैद्य ने कहा कि यह सच है कि मुस्लिम समुदाय के एक बड़े वर्ग ने सरकार के निर्देशों का समर्थन किया है। ऐसे सभी लोग सहयोग भी कर रहे हैं, लेकिन एक तबका है जो स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं रहा है। यह एक साजिश है या नहीं, यह तो नहीं पता, लेकिन ऐसे लोग खुद उनके समाज में बेनकाब हो रहे हैं। इसलिए उसी समाज के लोग प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं और तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों के मस्जिद में छिपे होने की जानकारी दे रहे हैं। जमात के लोगों का डाक्टरों, नर्सों और सुरक्षाकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किसी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता।