तब्लीगी जमात चला रही कट्टर इस्लामिक अभियान

    दिनांक 08-अप्रैल-2020   
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तब्लीगी जमात वाले देवबंदी विचार धारा को मानते हैं, जिन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप है। सीआईए के पूर्व अधिकारी ग्राहम फ्यूलर की समझ है कि यह संगठन गैर राजनीतिक तरीके से कट्टर इस्लामिक अभियान चला रहा है। तालीबानी, जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठन देवबंद से प्रेरित होकर पैदा हुए हैं

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जमातियों की करतूतों के कारण देश-दुनिया में तब्लीगी जमात के विरूद्ध आवाजें उठने लगी हैं। इनकी करतूतों से आम मुसलमानों की छवि को भी भारी धक्का पहुंचा है। ‘मकर्ज कांड’ के बाद समझ बनी है कि देश के सारे मुसलमान तब्लीगी हंै और ये सारे मिलकर कोरोना वायरस को विस्तार देकर देश को खतरे में डालने पर आमादा हैं। सरकारों एवं विभिन्न संगठनों की अपील के बावजूद वे इसलिए मेडिकल जांच को सामने नहीं आ रहे हैं, ताकि कोराना से अधिक से अधिक लोगों को संक्रमित किया जा सके। अगर उन्हें किसी मस्जिद या मदरसे से पकड़कर क्वारंटाइन किया जाता है तो वे जान-बूझकर डाॅक्टरों, नर्सों पूर थूकते हैं ताकि वे रोगग्रस्त हो जाएं। इन घटनाओं और गैरवाजिब धारणाओं का असर यह हुआ है कि समाज के प्रत्येक तबके के लोग मुसलमानों से दूरी बनाने लगे हैं। उनकी दुकानों का बहिष्कार हो रहा है। हरियाणा के फरीदाबाद के किसानों ने जमात के प्रभाव वाले मेवात क्षेत्र के मुस्लिम मजदूरों से गेहूं और सरसों की कटाई कराने से इंकार कर दिया हैै। तो वहीं हिमाचल प्रदेश के उना में लोगों ने मुसलमानों से दूध से लेकर अन्य सामान तक लेना बंद कर दिया है।
मुस्लिमों ने ही शुरू किया जमातियों का विरोध
‘अहले सुन्नत वल जमायत’ ने तो बहुत पहल तब्लीगी जमात को इस्लाम विरोधी करार दे दिया था। तब्लीगियों पर कुरान की गलत व्याख्या का आरोप है। स्वतंत्रता से पहले ‘फतवा हुस्सामुल हरमैन’ देकर इसे मजहब से बाहर कर दिया गया था। आधुनिक सोच वाले मुसलमान तो इनके लोगों के पास तक नहीं फटकते। उल्टे तरह-तरह से उनका माखौल उड़ाते हैं। तब्लीगियों की खिंचाई करने के लिए कुछ लोगों ने ‘नीम हकीम’ के नाम से फेसबुक पर बजाब्ता पेज चला रखा है। पाकिस्तान में भी मुसलमान तब्लीगियों कोे गंभीरता से नहीं लेते। वहां इनका माखौल उड़ाने वाला एक यूट्यूब वीडियो ‘जब आपको तब्लीगी वाले चचा ने पकड़ लिया’ काफी चर्चित रहा है। इस संगठन का ‘मुस्लिम पुलिस’, ‘तकलीफी जमात और ‘हल्ला गाड़ी’ के नाम से भी माखौल उड़ाया जाता है। ऐसे में भला कोई संगठन मुसलमानों की नुमाइंदगी कैसे कर सकता है। उर्दू के चर्चित पत्रकार शाहिद सिद्दी का मानना है कि तब्लीगी जमात के लोग मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा से दूर रखना चाहते हैं।

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दरअसल, तब्लीगी जमात वाले देवबंदी विचार धारा को मानते हैं, जिनपर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप है। फ्रांस के विश्लेषक मार्क गैबोरी का मत है कि तब्लीगी जमात विश्व पर फतेह की योजना पर काम कर रहा है। इसी तरह सीआईए के पूर्व अधिकारी ग्राहम फ्यूलर की समझ है कि यह संगठन और गैर राजनीतिक तरीके से कट्टर इस्लामिक अभियान चला रहा है। तालीबानी, जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठन देवबंद से प्रेरित होकर पैदा हुए हैं। एक खूंखार आतंकी देवबंद में शिक्षा तक ग्रहण कर चुका है। तब्लीगी जमात का संस्थापक मोहम्मद इलियास कंधावली देवबंद का मौलवी था। तब्लीग वाले केवल जमीन के नीचे और असमान की बातें करते हैं। इनकी सारी बातें जन्नत-जहन्नत तक सीमित होती हैं, जो मुसलमानों को कट्टरता की ओर ले जाती हैं। कारवां इंडिया के संस्थापक असद अशरफ कहते हैं कि तब्लीगी जमात वाले दावा करते हैंे कि वे अपनी जमायत में शामिल करने के लिए मुसलमानों पर दबाव नहीं डालते, जबकि हकीत इसके विपरीत है। विनम्रता से ही सही पर दवाब अवश्य डालते हैं।
गुजरात हज कमेटी के पूर्व निदेशक शब्बीर हमदानी का कहना है कि यह संगठन मुसलमनों को कट्टरवाद को बढ़ावा देता है। नागपुर के इंडियन मुस्लिम एसोसिएशन-नूरी के अध्यक्ष राष्ट्रीय इंजीनियर मुहम्मद हामिद का कहना है कि जमातियों द्धारा इजतमा के नाम पर लाखों लोगों की भीड़ इकट्ठी कर ऐसा माहौल तैयार किया जाता है, जिससे समाज और सियासी दल झांसे में आते रहे हैं। बाद में इनकी ही बदौलत देश की अधिकांश वक्फ संपत्तियां और इसकी मस्जिदों पर इन लोगांे ने कब्जा कर लिया। यह अब तब्लीगी अभियान चलाने के छोटे-छोटे मरकज बन गए हैं। तब्लीगियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों के खिलाफ ऐसी स्थिति पैदा कर दी जाती है कि उसके सामने पीछे हटने के सिवाए कोई चारा नहीं रहता। दिल्ली नगर निगम को लगता है कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मुख्यालय की बिल्डिंग जिसे मर्कज कहा जाता है, वक्फ की जमीन पर अवैध कब्जा कर खड़ी की गई है। इसमें एक मस्जिद भी है। इस्लाम में विवादित भूमि पर बनी मस्जिद में नमाज पढ़ने की मनाही है। यदि वास्तव में मुख्यालय का भवन अवैध तरीके से बना है, तो यह मामला आम मुसलमानों के लिए भी गौरतलब है। निगम मरकज मामले की जांच कर रही है। इसके दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। चूंकि ‘मरकज कांड’ के बाद तब्लीगी जमात का मुखिया मौलाना साद और इसके महत्वपूर्ण पदाधिकारी भूमिगत हो गए हैं, इसलिए जांच में न केवल नगर निगम , बल्कि पुलिस महकमा को भी बाधा आ रही है। इंजीनियर मुहम्मद हामिद कहते हैं कि भवन यदि अवैध तरीके से बना है तो बिना देरी इसे ढहा देना बेहतर होगा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)