पश्चिम बंगाल में मस्जिदों में पनाह लिए हैं जमाती, धरपकड़ में पकड़े गए 14 रोहिंग्या

    दिनांक 09-अप्रैल-2020
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कोलकाता से डॉ. अम्बा शंकर बाजपेयी
मलेशिया से जमातियों के साथ आए रोहिंग्या मुसलमान दिल्ली के बाद पश्चिम बंगाल की तरफ कूच कर गए। बंगाल आकर उन्होंने कोलकाता एवं आस-पास की मस्जिदों को ठिकाना बनाया। 14 रोहिंग्या मुसलमान गिरफ्त में आए हैं, जो कोलकाता मेडिकल कॉलेज के नजदीक स्थिति कोलोटोला मस्जिद में ठहरे थे

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मलेशिया में तब्लीगी जमात के सम्मलेन से बहुत बड़ी संख्या में जमाती एवं रोहिंग्या मुस्लिम नई दिल्ली स्थित निजामुद्दीन “मरकज” के सम्मलेन शामिल हुए थे। यहां पर देश-दुनिया के हजारों मुल्ला-मौलवियों ने भाग लिया। इस सम्मलेन के बाद ये मुल्ला-मौलवी देश के विभिन्न राज्यों में तब्लीगी जमात के मजहबी कार्यों के लिए ट्रेन, बस और हवाई जहाज के माध्यम से पहुंचे। यही कारण रहा कि तब से भारत में कोरोना के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। गौरतलब है कि 27 फरवरी से 1 मार्च के बीच मलेशिया के कुआलालामपुर के नजदीक एक मस्जिद में “तब्लीगी जमात” का एक बड़ा सम्मलेन आयोजित किया गया था जिसमें देश-दुनिया से 16 हजार मजहबी मौलानाओं ने भाग लिया था। ध्यान देनेे वाली बात यह है कि इस सम्मलेन में म्यांमार से 1000 रोहिंग्या मुसलमानों ने भी भाग लिया था। सम्मेलन के बाद जमातियों द्वारा एक बड़ा जुलूस भी निकाला गया। लेकिन इसी जुलूस के बाद मलेशिया समेत दक्षिण-पूर्व के 6 देशों -ब्रुरूनेई, कम्बोडिया, फिलीपींस, वियतनाम व सिंगापुर ने तब्लीगी जमात की गतिविधियों पर रोक लगा दी क्योंकि इन देशो में कोरोना का संक्रमण इन्हीं मजहबी गतिविधियों के कारण फैला था।
कोलकाता से पकड़े गए 14 रोहिंग्या मुसलमान
मलेशिया से जमातियों के साथ आए रोहिंग्या मुसलमान दिल्ली के बाद पश्चिम बंगाल की तरफ कूच कर गए। बंगाल आकर इन्होंने कोलकाता एवं इसके आस-पास की मस्जिदों को ठिकाना बनाया और यहीं से मजहबी गतिविधियों को अंजाम देना शुरू कर दिया। लेकिन इसी बीच भारत में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि होने लगी और भारत सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी। 22 मार्च से पूरे देश में कर्फ्यू जैसी स्थिति हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय एवं केंद्र सरकार के कड़े दिशा-निर्देशों के बाद “मरकज” में शामिल लोगों को चिन्हित करके उनको अलग-थलग करने का अभियान चलाया जाना सुनिश्चित किया गया। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल का प्रशासन भी हरकत में आया और उन्होंने ऐसे लोगों की धड़पकड़ शुरू की जो “मरकज” में शामिल हुए थे। लेकिन आश्चर्य तब हुआ जब इस धड़ पकड़ में 14 रोहिंग्या मुसलमान भी गिरफृत में आए, जो कि सभी मलेशिया से आए थे और कोलकाता मेडिकल कॉलेज के नजदीक स्थिति कोलोटोला मस्जिद में ठहरे थे। यहीं से प्रशासन ने उन्हें पकड़ा और क्वारेंटीन कर दिया। प्रशासन ने कुल विदेशियों मौलवियों में मीटियाबुर्ज मस्जिद से थाइलैंड के 13, मलेशिया के 9 और इंडोनेशिया के 4 मुसलमानों को कोलकाता के राजाबाजार के मुस्लिम बहुल इलाके की मस्जिद से पकड़ा। प्रशासन ने इन सभी को अलग-थलग रखा है। इस दौरान जमातियों ने न केवल प्रशासन के साथ अभ्रदता की बल्कि संक्रमण के दौरान जिन दिशा-निर्देशों का व्यक्ति को पालन करना होता है, उन्हें ताक पर रखते देखा गया।
निजामुद्दीन मरकज से 73 जमाती आए कोलकाता
पश्चिम बंगाल के स्थानीय प्रशासन के अनुसार निजामुद्दीन मरकज से 73 मुस्लिम कोलकाता आए जो कि कोरोना से संक्रमित थे। इसमें रोहिंग्या के अलावा मलेशिया, इंडोनेशिया व थाईलैंड के मुस्लिम शामिल थे जो राज्य के अलग-अलग जिलों में चले गए। अब प्रशासन इन सभी की धड़पकड़ में लगा हुआ है। महत्वपूर्ण बात यह जब पुलिस इनकी धड़पकड़ कर रही थी तो पूर्व-बर्धमान के कटवा व उत्तर दिनाजपुर की एक मस्जिद में 12 विदेशी मुस्लिम व 9 तब्लीगी जमात के लोग मस्जिदों में शरण लिए हुए पाए गए। लेकिन अभी भी हावड़ा सहित कई जिलों की बहुत सी मस्जिदें हैं जहां पर तब्लीगी जमात व रोहिंग्या मुसलमानों ने शरण ले रखी है। चूंकि पश्चिम बंगाल की सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते इन्हें बचाने में लगी है। लिहाजा ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि स्थानीय प्रशासन पकडे़ गए मुस्लिमों की राष्ट्रीयता को छिपा रही है। साथ ही इन्हें मस्जिदों में सारी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। ताकि स्थानीय मुल्ला-मौलवी खुश रहें।
मस्जिदों में मिली है जमातियों को शरण
अकेले कोलकाता के 8 इलाके ऐसे हैं जो मुस्लिम बहुल हैं। इन इलाकों में अराजकता का आलम यह है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन प्रवेश नहीं करता। हालांकि खुफिया एजेंसी एवं स्थानीय प्रशासन इन इलाकों पर नजर रखे हुए है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल रोहिंग्या मुसलमानों के लिए एक मुफीद ठिकाना है जहां राज्य सरकार से लेकर स्थानीय प्रशासन उन्हें पूरी मदद करता है। जानकारों की मानें तो इन्हीं रोहिंग्या मुस्लिमों को स्थानीय मुल्ला-मौलवी जो कि तब्लीगी जमात से जुड़े हैं के माध्यम से ही कटृटरपंथ का पाठ पढ़ाया जाता है और फिर लामबंद करके आतंकवादी गतिविधियों की तरफ धकेल दिया जाता है।
राज्य में करते हैं सुंदरवन से घुसपैठ
बांग्लादेश के सुंदरवन से रोहिंग्या मुसलमान पश्चिम बंगाल में नदी के मार्ग से घुसपैठ करते हैं। 24 दक्षिण परगना से लेकर 24 उत्तर परगना के सन्देश खाली तक का सीमावर्ती क्षेत्र रोहिंग्याओं के लिए अभ्यारण्य के रूप में विकसित हुआ है। 24 दक्षिण परगना के बरईपुर व मल्लिकपुर जैसे क्षेत्रों को स्थानीय लोग तो “मिनी पाकिस्तान” के रूप में पुकारते हैं। इन क्षेत्रों में मदरसों, मस्जिदों की भरमार है। सूत्रों की मानें तो रोहिंग्याओं द्वारा इन्हीं स्थानों से घातक हथियारों के निर्माण से लेकर देशविरोधी साजिशों को अंजाम दिया जाता है। 24 उत्तर परगना के सन्देश खाली का ब्लाक प्रमुख एवं टीएमसी का नेता शेख सज्जाद स्थानीय स्तर पर रोहिंग्याओं के लिए शिविर चलाने से लेकर उन्हें सारी चीजें मुहैया कराता है। यहां पलने के बाद इनके मनों में कट्टरपंथ का विष बोया जाता है और फिर देश में अलग-अलग जगहों पर अराजकता फैलाने के लिए भेज दिया जाता है।
 कट्टरपंथी संगठनों का गढ़ बना है बंगाल
 जानकारी के लिए बता दूं कि पश्चिम बंगाल तब्लीगी जमात का एक बड़ा केंद्र है। इसके पीछे कटृटरपंथी जाकिर नायक की बड़ी भूमिका रही है। इसी कट्टरपंथ का प्रभाव है कि राज्य में जमाते-इस्लामी, तब्लीगी जमात, पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया व सिमी जैसे प्रतिबंध संगठन यहां अच्छी तरह से फलते-फूलते हैं और बेखौफ होकर अपनी अराजक गतिविधियों को अंजाम देते हैं।