चीनी चाल, दुनिया बेहाल
   दिनांक 09-अप्रैल-2020
ले. कर्नल (सेनि.) आदित्य प्रताप सिंह
आज जब पूरी दुनिया चीनी वायरस से युद्धरत है तब चीन अपने सामरिक हित साधने में लगा है। आर्थिक मोर्चे से लेकर राजनीतिक मोर्चे और सैन्य मोर्चे से लेकर कूटनीति तक चीन की सक्रियता पूर्ववत है

china _1  H x W
राष्ट्र की नीतियों का निर्धारण काल दीर्घकालिक होता है। राष्ट्र हित संबंधी योजनाएं और परियोजनाएं सदियों के कालचक्र में पिरोयी जा सकती हैं। विषम से विषम सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में भी उनका कार्यान्वयन रुकना नहीं चाहिए। राष्ट्र-राज्य की विश्व पटल पर पहचान ही अपने राष्ट्र हित के लिए दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति से चलने पर होती है। चीन और अमेरिका अपने राष्ट्र हितों की रक्षा के अतिरिक्त किसी भी संबंध की अनदेखी कर सकते हैं।
आज समस्त विश्व चीनी वायरस से युद्धरत है परंतु चीन अपने सामरिक हित साधने में लगा है। आर्थिक मोर्चे से लेकर राजनीतिक मोर्चे और सैन्य मोर्चे से लेकर कूटनीति तक चीन की सक्रियता पूर्ववत है। संयुक्त राष्ट्र पर चीनी वायरस के मुद्दे पर बहस से लेकर अपने औद्योगिक इकाइयों को सुचारु रूप से चलाने तक चीनी उद्यमिता और प्रयासों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। चीन ने विश्व को चीनी वायरस कोरोना की रोकथाम के लिए औषधीय उपकरण भी उपलब्ध कराने आरंभ कर दिये हैं। चीन अपनी सामरिक शक्ति के सहारे चीनी वायरस के मुद्दे को विश्व में अपने विरुद्ध नहीं जाने देने के लिए प्रयासरत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी अपने पाले में रखा। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के अतिरिक्त कोई भी चीन की चालों पर नहीं बोल रहा। अकेले ट्रम्प ही हैं जो कोरोना को चीनी वायरस कहकर बुलाते हैं। यकीनन चीन की आर्थिक शक्ति से सभी सहमे हुये हैं। भारत में भी एक वर्ग ऐसा है जो चीनी टुकड़ों पर पलता है। उसे कोरोना को चीनी वायरस बोले जाने पर आपत्ति है। कई लुटियन पत्रकार तो चीनी वायरस बोले जाने पर बौखलाए नजर आए।
कोरोना महामारी के संकटकाल का लाभ भी चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य शक्ति और उपस्थिति से ले रहा है। चीनी तटरक्षकों ने अप्रैल के पहले सप्ताह में वियतनाम के मछुआरों के पोत को दक्षिण चीन सागर के पार्शल द्वीप के पास टक्कर मारकर डुबो दिया तो दूसरे सप्ताह में फिलीपींस को अपना शिकार बनाया। एशियान के सभी 10 देश चीन के किसी भी कृत्य को चुनौती देने की स्थिति में नहीं हैं। इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को साधने वाला अमेरिका अभी चीनी वायरस के कारण घरेलू संकट से जूझ रहा है। ऐसे में चीन किसी भी वैश्विक नियम-कानून को मानने को तैयार नहीं है।
विस्तारवादी नीति में लगा है चीन
अफगानिस्तान में चल रहा हिंसक घटनाक्रम चीन की मौन सहमति के बिना कदापि संभव नहीं है क्योंकि कतर की अमेरिकी-तालीबान शांति वार्ता में चीन भी एक प्रतिनिधि था। चीन अफगानिस्तान में कभी भी भारतीय उपस्थिति को नहीं चाहता जिसके अनेक सामरिक और भू-रणनीतिक कारण हैं। एशियान देशों से भारत के प्रगाढ़ संबंध भी चीन की आंख में किरकिरी बने हुए हैं। भारत के जापान और दक्षिण कोरिया से भी अच्छे सामरिक और व्यावसायिक संबंध हैं। इन देशों से होने वाले समुद्री व्यापार को दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन द्वारा बाधित होने का संकट चिंता का विषय है। दक्षिण चीन सागर से लगने वाली सभी समुद्री सीमाओं का अनाधिकृत उल्लंघन चीन की रणनीति का हिस्सा है।
विश्व जब तक कोरोना महामारी के प्रकोप से उबरेगा तब तक शायद यह विश्व चीनी व्यवस्था का अभिन्न अंग न बन चुका होगा। आज चीन के व्यावसायिक क्षेत्र का विस्तार एशिया से लेकर यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के एक बड़े भू-भाग तक हो चुका है। व्यापार के प्रत्येक क्षेत्र में चीनी निर्यात आरिहार्य हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र की व्यापार और विकास सभा ने कोरोना महामारी का प्रभाव चीन और भारत पर कम पड़ने की बात कही है। जिसका कारण है, चीन का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कम निर्भर होना और वहां नागरिकों की अधिक बचत करने की आदत। क्या युआन शीघ्र ही डॉलर का विकल्प होने की ओर अग्रसर है। सूत्रों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के अनेक अंग इस ओर इशारा भी कर रहे हैं। क्या कोरोना त्रासदी चीन के और ज्यादा शक्तिसंपन्न होने वाली सहायक होगी, यह निश्चित देखने वाली बात होगी। लेकिन अभी अमेरिका सहित कई देश कोरोना महामारी फैलाने के लिए चीन को कठघरे में खड़ा करने के लिए कमर कस चुके हैं।
--