पाञ्चजन्य एक्सक्लूसिव: जब एक महिला गोपाल राय के दफ्तर राशन की मांग लेकर पहुंची तो सेवा भारती का नंबर थमा दिया गया
   दिनांक 09-अप्रैल-2020
दिल्ली सरकार द्वारा कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन के चलते रोजाना चार लाख गरीब व दिहाड़ी मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराने के दावे खोखले हैं। जब एक महिला बाबरपुर से आप के विधायक और दिल्ली सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर गोपाल राय के दफ्तर राशन की गुहार लेकर पहुंची महिला को वहां से सेवाभारती का नंबर थमा दिया गया। पाञ्चजन्य के पास इसके पुख्ता प्रमाण हैं.

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दिल्ली सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर गोपाल राय उत्तरपूर्वी दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक हैं। बाबरपुर में ही उनका कार्यालय भी है। जहां लोग क्षेत्र की समस्याएं लेकर जाते हैं। आठ अप्रैल को मजदूरी करके गुजर—बसर करने वाली एक महिला गोपाल राय के दफ्तर पहुंची। उसने घर में कई दिनों से राशन न होने की बात कही। इस पर महिला को  सेवा कार्य संभाल रहे एक स्वयंसेवक का नंबर थमा दिया।
महिला ने उस पर नंबर पर फोन करके राशन के बारे में पूछा। स्वयंसेवक ने महिला से बात की और पूछा कि आपको नंबर कहां से मिला। इस पर महिला ने कहा, मैं बाबरपुर स्थित गोपाल राय के दफ्तर गई थी वहां से आपका नंबर मिला। महिला ने कहा मेरे घर में खाने का राशन नहीें है। स्वयंसेवक ने तत्काल महिला का नाम पता लिखा और स्थानीय टोली को इस बारे में सूचित किया। कुछ ही देर में महिला के घर राशन पहुंचा दिया गया। इसके बाद दोबारा महिला से फोन करके पूछा गया तो उसने बताया कि राशन उसके घर पहुंच गया है।
यहां यह बता देना जरूरी है कि 23 मार्च से 21 दिनों का लॉकडाउन होने के तीन दिन बाद जब लोगों को राशन नहीं मिला तो दिल्ली में रहकर दिहाड़ी मजदूरी और अन्य छोटे—मोटे काम कर गुजर बसर करने वाले हजारों लोगों की भीड़ यूपी बॉर्डर पर पहुंच गई थी। दिल्ली सरकार उससे पहले से यह दावा करती आ रही थी कि दिल्ली में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होगी। लॉकडाउन के चलते जो दिहाड़ी मजदूर और कामगार काम नहीं कर पा रहे हैं सरकार की तरफ से उन्हें दोनों वक्त का खाना मुहैया कराया जाएगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेस कर कई बार यह दावा किया था। अब स्थिति आपके सामने है। यहां तक कि दिल्ली सरकार इस दावे को पुष्ट करते हुए एक चैनल ने झंडेवालान मंदिर में सेवाभारती के स्वयंसेवकों द्वारा चलाई जा रही रसोई को दिखाते हुए इसे दिल्ली सरकार की रसोई बताया था। इसके बाद सेवाभारती ने इसका खंडन भी किया था।
यह खबर देने का अर्थ सेवाकार्यों का बखान कतई नहीं हैं, क्योंकि किसी भी आपदा की स्थिति में सेवाकार्य करना संघ के स्वयंसेवकों के संस्कारों में होता है। यह खबर सिर्फ इसलिए प्रकाशित की जा रही ताकि दिल्ली सरकार द्वारा किए जा रहे खोखले दावों की पोल खोली जा सके।