इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर शामिल हुए थे तब्लीगी जमात में, एफआईआर
   दिनांक 09-अप्रैल-2020
तब्लीगी जमात में शामिल होने के बाद नहीं दी प्रशासन को सूचना। जानकारी मिलने के बाद सूचना न देने पर प्रोफ़ेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज पूरे परिवार को किया गया क्वारंटाइन

university _1  
तब्लीगी जमात में शामिल होने के बाद, उसे छिपाने की क्या वजह है? अब यह समझ से परे है. ताजा मामला - इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर का है जो तब्लीगी जमात में शामिल होने निजामुद्दीन गए थे. प्रयागराज लौट कर उन्होंने यह बात छिपाई थी. निजामुद्दीन से लौटकर उन्होंने विश्वविद्यालय में परीक्षा ड्यूटी भी की थी. इस दौरान वह कितने लोगों के संपर्क में आये. यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है.
यह सूचना इंटेलिजेंस के माध्यम से सामने आई कि प्रोफ़ेसर, तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे. इसके बाद करैली थाने की पुलिस ने उनके घर पहुंच कर उनकी पत्नी और बच्चे को एक गेस्ट हाउस में क्वारंटाइन किया गया है।
प्रयागराज जनपद के एसपी सिटी ब्रिजेश श्रीवास्तव ने बताया कि "महामारी अधिनियम के अंतर्गत प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. प्रोफ़ेसर ने जमात में शामिल होने की बात छिपाई थी." जानकारी के अनुसार प्रोफ़ेसर कुछ माह पहले इथोपिया गए थे. उसके बाद तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे. 11 मार्च को प्रयागराज आये थे. होली के बाद से ही प्रशासन की तरफ से बार - बार यह कहा जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति अपनी ट्रेवल हिस्ट्री ना छिपाए. अगर कोई भी विदेश से लौटा है या फिर ऐसी किसी जमात में शामिल हुआ है तो सामने आकर प्रशासन का सहयोग करे. मगर शिक्षक होने के बावजूद प्रोफ़ेसर साहब ने किसी को कुछ नहीं बताया. इंटेलिजेंस के माध्यम से जब पुलिस को पता लगा तब इन लोगों को एकांतवास में भेजा गया है.