इस्लामी कट्टरपंथ का चेहरा है तब्लीगी जमात
   दिनांक 09-अप्रैल-2020
 उत्तराखंड से मनोज इष्टवालदुनियाभर के अनेक आतंकियों व आतंकी संगठनों से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी तब्लीगी जमात का मुख्यालय है दिल्ली में, निजामुद्दीन मरकज। यह रूस, उजबेकिस्तान, तजाकिस्तान, कजाकिस्तान जैसे देशों में प्रतिबंधित सूची में है 

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तब्लीगी जमात, के तब्लीगी आज इस्लामी कट्टरपंथियों के रूप में तेजी से बढ़ रहे हैं। निजामुद्दीन में इस जमात के नौ मंजिला मुख्यालय के पास न जमीन सम्बन्धी कोई कागज़ है और न इतनी ऊंची इमारत बनाने की इजाजत। लेकिन पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के दौरान ये उंची उठती गई। पूर्व में बंगले वाली मस्जिद के नाम जाना गया मरकज का यह भवन 2000 बर्ग फीट अवैध जमीन पर बना है!
कोरोना संकट के इस मुसीबत भरे दौर में तब्लीगी जमात किसी टाइम बम की तरह पूरे देश के लिए ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरा बन चुकी है। वह जमात जिसके अधिकांश सदस्य हिन्दू से मुस्लिम में कन्वर्ट हुए और कट्टर बनाए गए लोग ही हैं जिन्हें वहाबी तालीम दी जाती है। इन्हें रटाया जाता है कि विश्व में एक ही मजहब है और वह है इस्लाम..! 1944 में जमात के संस्थापक मोहम्मद इलियास की मौत के बाद उसके बेटे मौलाना मोहम्मद यूसुफ ने जमात का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक करने का हर सम्भव प्रयास किया। लेकिन 1947 में देश बंटवारे के साथ मेवात में रह रहे ज्यादातर मुस्लिम पाकिस्तान चले गए और बाकी को दिल्ली के निजामुद्दीन में शरणार्थी शिविरों में रखा गया!
मौलाना मोहम्मद युसूफ ने निजामुद्दीन दरगाह के नजदीक बंगले वाली मस्जिद कब्जाई और यहीं से तबलीगी जमात का संचालन शुरू कर दिया! 30 मार्च 1966 में पाकिस्तान के रावलपिंडी में इसकी शाखा खोली गयी, जिसका नाम रखा गया ब्रदरहुड! तबलीगी जमात के छोटे समूह गश्त कहलाते हैं व जमात के प्रमुख को अमीर कहा जाता है!
आज जब कोरोना के प्रकोप में यह मरकज देश—दुनिया के सामने उजागर हुआ व केंद्र की मोदी सरकार ने बेहद सख्ती से इस पर कार्यवाही शुरू की तो कई चौंकाने वाले दस्तावेज व चेहरे सामने आये!
तब्लीगी जमात को चलाने वाला मौलाना साद अचानक भूमिगत हुआ तो शक की सुई और गहरी हुई। पकड़े गए जमातियों ने राज उगलने शुरू किये। ये किस कदर इंसानी तहजीब से कोसों परे हैं उसे इस चीज से समझा जाता है कि जब इन्हें इलाज के लिए बसों में भरकर ले जाया जा रहा था तो वे पुलिस और डाक्टरों के उपर थूक रहे थे। धरपकड़ हुई तो बिना वीजा के कई मदरसों—मस्जिदों से बड़ी तादाद में विदेशी मौलवी पकड़े गए।

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तबलीगी जमात पर आरोप है कि इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादियों की न सिर्फ सहायता की है बल्कि इसी जमात के कई नाम आतंकियों से जुड़े हैं जिनमें सूडान में लश्कर-ए-तोयबा का आतंकवादी हामिर, कुख्यात आतंकवादी मोहम्मद सुलेमान बर्रे, अलकायदा के मुजाहिद्दीन बटालियन कमांडर अबु-जुबैर-अल-हलीली, सऊदी अरब का नागरिक कई देशों में बांछित अल-बुखारी, आतंकी कफील अहमद, आतंकी शहजाद तनवीर, मोहम्मद सिद्दीकी खान, आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिद्दीन इत्यादि हैं। ये वे आतंकी या आतंकी संगठन हैं जिन्होंने 1999 में इंडियन एयरलाइन के विमान 814 का अपहरण, 2002 में गुजरात में गोधरा काण्ड में 59 कारसेवकों की ह्त्या, 9/11 के दंगे, 7 जुलाई 2005 में लन्दन में हमलों में शामिल व 30 जून 2007 में ग्लासगो हवाई अड्डे पर हमला किया था। इन सभी के तार तबलीगी जमात के मुख्यालय निजामुद्दीन मरकज में आकर ठहरते हैं!विगत 12 मार्च को लाहौर पाकिस्तान में तबलीगी जमात ने 80 देशों के लगभग ढाई लाख जमाती बुलाये थे जिनमें 10 हजार मौलाना भी थे। इसके बाद पाकिस्तान 2000 लोग संक्रमित पाए गए जिनके कारण पाकिस्तान में संक्रमण चरम पर जा पहुंचा। इससे पूर्व 27 फरवरी से 1 मार्च तक क्वालालम्पुर में 30 देशों के 16 हजार से ज्यादा जमाती पहुंचे थे, जिनमें 620 संक्रमित पाए गए! ब्रूनेई में 73 मामले व थाईलैंड में 10 मामले इनके खिलाफ दर्ज हुए! इसके बाद इंडोनेशिया में 10 देशों के 8700 लोगों की जमात का आयोजन था लेकिन जबर्दस्त विरोध के कारण इसे स्थगित करना पड़ा!
18 मार्च से निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात के 8000 से 10000 लोग इकट्ठा हुए जिनमें भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा सऊदी अरब , मलेशिया, इंडोनेशिया इत्यादि से भी तबलीगी पहुंचे थे। संक्रमण तेजी से फैलने और दिल्ली सरकार के अफसरों की सुस्ती के बीच इसका खुलासा तब हो पाया जब एक व्यक्ति की वहीं मौत हुई! आज सबसे ज्यादा मामले पूरे भारत में तबलीगी जमात द्वारा फैलाये गए कोरोना संक्रमण के बताए जा रहे हैं जो यकीनन किसी खतरे की घंटी से कम नहीं क्योंकि यह मामला देरी से सामने लाया गया! कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि यह सब सोची—समझी साजिश के तहत हुआ है क्योंकि इस से पहले मौलाना साद ने जमातियों से कहा था कि 'पहले तो खुदा के बंदों पर इसका असर नहीं होता और अगर हुआ तो इससे बढ़िया मौत क्या होगी कि खुदा के घर में हमें मौत मिली'!
बहरहाल उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में भी 27 मामले प्रकाश में आये हैं जिनमें 20 जमात के बताये जा रहे हैं। राज्य का मुस्लिम अब शक के दायरे में है। यहां किराए पर मुस्लिमों को रखने वाले जनमानस के प्रति लोग नाराज भी हैं! कुछ समय से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जिस तरह अवैध मस्जिदों, दरगाहों की बाढ़ आई है वह भी आम जन को सोची—समझी साजिश का हिस्सा लग रहा है। जिस उत्तराखंड के परिवेश के मुस्लिम गांव में कभी कोई महिला बुर्के में नहीं दिखती थी आज अचानक वहां बुर्कों की बाढ़ आ गयी है! यहां मुसलमानों की चाल—ढाल में अरबी तर्ज का चलन बढ़ता दिखता है।
पलायन की वजह से पूरा पहाड़ जमातियों के लिए सबसे सॉफ्ट टार्गेट भी बन गया है! यहां आये दिन ये लोग हिन्दू धर्म के एक वर्ग को प्रलोभन देकर उनकी जमीनों पर छोटे रोजगार कर रहे हैं, मकान खरीद रहे हैं। वे तीन गुना कीमत देकर कहीं भी किसी बंजर जमीन को खरीद उसमें मस्जिद, मकबरा, दरगाह या मदरसा खोल रहे हैं!
समय संकट का है। आज हर देशभक्त नागरिक को देशहित को उपर रखकर ही व्यवहार करना होगा। संगठित शक्ति से बड़ी से बड़ी मुसीबत से लड़ा जा सकता है। कोरोना और तिस पर तब्लीगियों का अमानवीय व्यवहार, यह दोहरे संकट का दौर है ।