उत्तरप्रदेश: प्रदेश सरकार ने बनाई 10 कोरोना टेस्टिंग लैब
   दिनांक 09-अप्रैल-2020
सभी मेडिकल कालेजों में बनेगी टेस्टिंग लैब - सभी 75 जनपदों में बनाये जाएंगे कलेक्शन सेंटर.जब कोरोना का पहला पॉजिटिव केस आया था. उस समय उत्तर प्रदेश में एक भी लैब नहीं थी. महज कुछ हफ्तों में ही भारत सरकार के सहयोग से उत्तर प्रदेश में आज 10 टेस्टिंग लैब सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं.

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 प्रदेश में 24 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं जिसमें से 12 मेडिकल कॉलेजों को अपग्रेड किया जा रहा है. इन मेडिकल कॉलेजों में नई बीएसएल-3 लैब बनाई जा रही है। जहां किसी भी प्रकार के वायरस की जांच के साथ ही रिसर्च की भी सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा अन्य 12 मेडिकल कॉलेजों में भी कोविड- 19 की टेस्टिंग लैब को स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज किया गया है। प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कोविड-19 की जांच के लिए कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाएंगे.
मुख्यमंत्री योगी ने आदित्यनाथ ने कहा है कि " उत्तर प्रदेश के जिन 6 मंडलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, उन सभी के मुख्यालयों पर टेस्टिंग लैब स्थापित किए जाएंगे जिसके अंतर्गत देवीपाटन (गोण्डा), मिर्जापुर, बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़ और वाराणसी के बीएचयू हॉस्पिटल में लैब बनाने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है. कोविड-19 के खिलाफ प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश कोविड केयर फंड की स्थापना की है। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ समाज के विभिन्न तबकों का इस केयर फंड को व्यापक समर्थन मिल रहा है। कोविड केयर फंड का उपयोग प्रदेश के अंदर टेस्टिंग सुविधाओं और कोविड हॉस्पिटल (लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3) की संख्या को बढ़ाने में किया जाएगा। इसके अलावा कोरोना से लड़ाई में आवश्यक उपकरणों जैसे- पीपीई किट, एन-95 एवं थ्री लेयर मास्क, वेटिंलेटर और थर्मल एनालाइजर की मैन्यूफैक्चरिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार लगातार कार्य कर रही है।"
पेशेंट पूलिंग कर चिकित्सा संसाधनों का होगा बेहतर उपयोग
अपर मुख्य सचिव, गृह ने बताया कि कई जिलों में एक या दो कोरोना पॉजिटीव पेशेंट का इलाज किया जा रहा है। ऐसे में यह देखने में आया है कि एक दो मरीजों के लिए पूरा मेडिकल सिस्टम प्रभावित हो रहा है. इसी कारण मंडल कमिश्नर को यह आदेश दिया गया है कि जिन जिलों में एक से दो कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज हो रहा है. उन्हें किसी एक ही बेहतर संसाधन वाले अस्पताल में शिफ्ट करा दिया जाए। जिससे मेडिकल सिस्टम का बेहतर उपयोग किया जा सके।