अध्यापक वर्ग राष्ट्र का सारथी होता है: बाबासाहेब

    दिनांक 01-मई-2020
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हम लगातार आपको बाबासाहेब के जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग 25 :-

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शिक्षा एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और अध्यापक उसका मुख्य आधार है। इसीलिए अध्यापकों की ज्ञानपिपासा, विद्याव्यासंग, आत्मीयता और ध्येयासक्त जीवनदृष्टि, इन बातों पर अध्यापकों की शिक्षा और योग्यता निर्भर है। बाबासाहेब की ज्ञानसाधना में हमने देखा कि उन्होंने अध्ययन की त्रिसूत्री - वाचन, मनन और चिंतन-अपनाई थी। इसी से वे स्वयं एक उत्कृष्ट अध्यापक और व्यापक अर्थ में समाजशिक्षक बने। उनकी भूमिका पहले करनी, बाद में कथनी थी।
अध्यापक की संकल्पना के बारे में वे कहते हैं कि अध्यापक को बहुश्रुत होना आवश्यक है, उसे अपने विचारों का विन्यास अच्छी तरह से करना जरूरी है, अपने और दूसरों के विचार जांचना जरूरी है, तभी वे छात्रों को अध्ययन करने तथा विचार करने के लिए प्रवृत्त कर सकेंगे। वह तेज बुद्धि का और चयनशीलवृत्ति का हो। उसमें चिकित्सकवृत्ति तथा मर्मज्ञता हो। उनकी दृष्टि में अध्यापक वर्ग राष्ट्र का सारथी है, क्योंकि उसके हाथों में शिक्षा की बागडोर होती है। पाठशाला सुसंस्कृत मन के नागरिक निर्माण करने का पवित्र तीर्थ है। अत: पाठशालाओं में समबुद्धि वाले, उदात्त विचारों से भरपूर और विशाल हृदय के अध्यापक होना जरूरी है।