बाबासाहेब ने हरिजन शब्द का विरोध किया था

    दिनांक 11-मई-2020
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हम लगातार आपको बाबासाहेब के जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग 33:-

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‘अस्पृश्यता हिंदू धर्म पर कलंक है’ गांधीजी के इस विचार का डॉ. आंबेडकरजी ने अपने ‘मुक्ति कोन पथे’ भाषण में जिक्र किया है। कुछ लोगों का कहना है कि अस्पृश्यता हिंदू धर्म पर कलंक है। लेकिन इन बातों का कोई मतलब नहीं। दुर्भाग्य यह है कि एक भी हिंदू यह नहीं मानता कि हिंदू धर्म कलंकित है। इस कलंक को साफ करने का काम अस्पृश्यों को ही करना पड़ेगा।’ इस तरह डॉ. बाबासाहेब ने अस्पृश्यों में आत्मसम्मान, अस्मिता, आत्मभान जागृति का काम किया। गांधीजी ने अस्पृश्यों को आत्मशुद्धि की सलाह दी थी। डॉ. बाबासाहेब ने बहिष्कार का शस्त्र प्रयुक्त किया। डॉ. आंबेडकर गांधीजी के दिए हुए हरिजन शब्द का निषेध कड़े शब्दों में किया और उसे नकारा।
स्पृश्य-अस्पृश्य लोगों में व्याप्त भेदभाव को मिटाने हेतु बाबासाहेब ने अनेक उपाय सुझाए। उनका विचार था कि एकतरफा अस्पृश्यता निवारण से सुदृढ़ वातावरण निर्मित नहीं हो सकता। सवर्ण समाज के मन में अस्पृश्यों के प्रति घृणा न हो। अस्पृश्यों के मन का डर दूर होना चाहिए। आत्मविश्वास निर्माण व्यक्ति-व्यक्ति में परस्पर संबध और इस भावना की पुष्टि के लिए सहवास का निर्माण होना चाहिए। सार्वजनिक स्तर के वातवरण में भी बदलाव लाना जरूरी है। इसके लिए सार्वजनिक स्तर पर अस्पृश्यों से मुक्त व्यवहार होने जैसा वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता हैै।