पाकिस्तानः हिन्दुओं की जमीन हड़पने आए जिहादियों ने उत्पात मचाते हुए घरों में लगाई आग, विरोध करने पर महिलाओं और युवाओं को मारा

    दिनांक 11-मई-2020   
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पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदुओं को निशाना बनाया गया। मजहबी कट्टरपंथियों ने सिंध में भील जनजाति के लोगों पर जमकर कहर बरपाया और उनके घरों को आग के हवाले कर दिया। वहां मौजूद पुलिस कर्मी भी दंगाइयों का साथ देते दिखी। इस घटना में कई हिंदू गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

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पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदुओं को निशाना बनाया गया। मजहबी कट्टरपंथियों ने हिंदू भील जनजाति के लोगों पर जमकर कहर बरपाया और उनके घरों को आग के हवाले कर दिया। वहां मौजूद पुलिस कर्मी भी दंगाइयों का साथ देते दिखी। इस घटना में कई हिंदू गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लेकिन इनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।?
घटना पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मटियारी जिले के हाला कस्बे की है। यह क्षेत्र नक्काशीदार बर्तन, काष्ठ कला, कपड़ों पर छपाई, बुने कपड़े और हाथ से तैयार खादी के कपड़ों के लिए काफी चर्चित है। इसी कस्बे में तकरीबन सौ साल से हिंदू भील जनजाति के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। यहां की भूमि पर मालिकाना हक आज भी भीलों का है। पर अब मजहबी कट्टरपंथियों की एक जमात भीलों को उनकी भूमि से बेदखल करने के प्रयास में हैं। इस कारण आए दिन भीलों पर उनकी ओर से हमले होते रहते हैं। गत दिनों भी एक कटृटरंपथियों का समूह भील लोगों पर टूट पड़ा। पहले तो उनके घरों में आग लगाई गई। उसके बाद उनके बच्चों, पुरुषों, औरतों और लड़कियों की चुन-चुनकर पिटाई की गई। इस हिंसक हमले में करीब एक दर्जन भीलों को गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें से कई मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे हैं। स्थानीय पत्रकार अब्दुल गफूर ने बताया कि हिंसा की सूचना मिलते ही मौके पर स्थानीय पुलिस दल बल के साथ पहुुंच गई। मगर दंगाईयों को रोकने की बजाए, पुलिस वाले उनका ही साथ देते दिखे। घटना का विरोध करने वाली महिला, पुरूषों को खदेड़-खदेड़ कर डंडों से पीटा गया। इस बारे में हाला पुलिस और शासन से शिकायत करने के बावजूद अब तब दंगाईयों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पाकिस्तान के हिंदुओं की हिमायत के लिए सक्रिय रहने वाली मीनाक्षी शरण कहती हैं कि इस घटना के बाद से सिंध के अल्पसंख्यक हिंदू बुरी तरह भयभीत हैं।
 

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इस घटना से कुछ दिन पहले भी सिंध में दो स्थानों पर हिंदुओं के बारह घरों को निशाना बनाया गया था। जिहादियों द्वारा इस हमले में तीन मासूस बच्चों को जिंदा जला दिया गया था। साथ ही एक हिंदू महिला भी बुरी तरह जख्मी हुई थी। इन मामलों की जांच कराने का पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सांसद बारी खान पटाफी ने वादा किया था, पर अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आगजनी की पहली घटना सिंध के थारपारकर के तहसील छछड़ो के गांव उम्मेद अली रिंधी में और दूसरी घोटकी जिले के शकील महार के निकट दाद लेघारी गांव में हुई थी। कहते हैं कि रमजान के पवित्र महीने में बुुरे से बुरा मुसलमान भी सद्कर्म करने और सही मार्ग पर चलने लगता है। मगर पाकिस्तान में उलटा देखने को मिल रहा है। इस देश के मजहबी कट्टरपंथी इस महीने में अल्पसंख्यकों के साथ कुछ ज्यादा ही बुरा बर्ताव कर रहे हैं। यहां तक कि कोरोना संक्रमण के कारण हर तरह से कंगाल हो चुके हिंदुओं को राशन और अस्पतालों में इलाज तक के लिए तरसाया जा रहा है। राशन और राहत सामग्री के लिए लगने वाली लाइनों से हिंदुओं और ईसाइयों को चुनचुनकर निकाला जा रहा है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी गैर सरकारी संस्था सिलानी ट्रस्ट पर आरोप है कि वह अल्पसंख्यकों को रोटी-पानी का लालच देकर कन्वर्जन करने के धंधे में लगी है। ऐसी शिकायतों पर संयुक्त राष्ट्र संघ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की क्लास भी ले चुका है। इसके बावजूद माहौल में लेशमात्र भी बदलाव नहीं दिख रहा।