पाकिस्तान: एक तरफ कोरोना तो दूसरी तरफ कटृटरपंथियों के जुल्म का शिकार बन रहा हिन्दू समुदाय

    दिनांक 11-मई-2020   
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दुनिया कोरोना महामारी से लड़ रही है। लेकिन इस आपात स्थिति में भी पाकिस्तान जहां एक ओर भारत में अशांति फैलाने के लिए आतंकवादियों का झुंड भेज रहा है तो वहीं अपने देश में महामारी की आड़ में हिंदुओं की आवाज दबाने का काम कर रहा है। शासन—प्रशासन द्वारा बेरोजगार हो चुके हिंदुओं को राहत सामग्री नहीं दी जा रही है, जगह—जगह उन पर हिंसा की जा रही और उनके घरों को आग के हवाले किया जा रहा। पंजाब एवं सिंध में घटी ताजा घटनाएं इसका सबूत हैं

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ताजा घटनाक्रम के तहत पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहीमयार में कटृटरपंथियों ने चक नंबर 121 में रह रहे हिन्दू परिवार पर हमला किया। इस दौरान यहां रहे रहे गुलाब और उनकी पत्नी को निर्ममता से मारा। आरोप है कि महिला के साथ यौन प्रताड़ना भी की गई। इस दौरान खून से लतपथ पति-पत्नी को इलाका छोड़ने पर मजबूर किया गया। तो दूसरी तरफ सिंध में भील जनजाति के लोगों के घरों को जलाया गया। घर की महिलाओं और युवाओं पर अत्याचार ढहाया गया।
दरअसल पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण की आड़ में मुल्क से हिंदू और सनातन संस्कृति को उखाड़ फेंकने का खतरनाक षड्यंत्र रचा जा रहा है। इधर, कोरोना ने दुनिया में अपने पैर पसारे, उधर पाकिस्तान ने अपनी सरजमीं से हिंदुओं के वजूद को मिटाने की योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया। ऐसा नहीं है कि इससे पहले हिंदू सहित तमाम पांथिक अल्पसंख्यक पाकिस्तान में चैन से जीवन बिता रहे थे। उन्हें पहले भी वहां नाना प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब उन्हें प्रताड़ित करने की घटनाओं में तेजी आ गई है। यहां तक कि कोरोना संक्रमण से उपजे हालात के चलते सड़क पर आए गरीब हिंदुओं को रोटी का लालच देकर इस्लाम कबूलने को मजबूर किया जा रहा है।
चीन के वुहान में झींगा बेचने वाली बेई गुइजियान को विश्व का पहला कोराना संक्रमित मरीज माना जाता है। उसमें 10 दिसंबर को इस महामारी के लक्षण मिले थे। चीन ने 31 दिसंबर को देश के जिन 27 लोगों के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि की, उनमें बेई गुइजियान भी एक है। चीन को कोरोना का जनक माना जाता है। यहां से निकली इस महामारी की चपेट में विश्व के 215 देश आ चुके हैं। पाकिस्तान को भी इस महामारी ने अधमरा कर दिया है। इस पड़ोसी देश में कोरोना से पहली मौत 17 मार्च को पंजाब प्रांत के हाजिबाद में हुई थी। तब से पाकिस्तान में कोरोना संक्रमितों और इससे मरने वालों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। प्रधानमंत्री इमरान खान कोरोना को लेकर जाहिर तौर पर बहुत बेचैन नजर आते हैं। इससे बचाव के नाम पर उन्होंने विश्व बिरादरी के सामने फिर आर्थिक मदद का कटोरा उठा लिया है। मगर दूसरी तरफ इनका आचरण कुछ और ही है। उनकी कार्यशैली से पता चलता है कि पाकिस्तान कोरोना की आड़ में कुछ और ही खिचड़ी पका रहा है। हाल में इसके द्वारा समुद्र में किया गया मिसाइल परीक्षण तथा यूरोपीय थिंक टैंक की वह रिपोर्ट, जिसमें खुलासा किया गया है कि पाकिस्तान कश्मीर से आतंकियों का जमावड़ा हटाकर अफगानिस्तान में भेजने की फिराक में है, कुछ और संकेत देते हैं। कोरोना से बुरी तरह प्रभावित कोई देश क्या इस तरह की खुराफात कर सकता है? इस महामारी ने जर्मनी, फ्रांस, इटली तक को धूल चटा दी है। फिर इसके सामने पाकिस्तान की औकात की क्या है ? इस देश की स्वास्थ्य सुविधाएं और आर्थिक व्यवस्था पहले ही जमींदोज हैं। ऐसे में मिसाइल परीक्षण इसकी मंशा पर सवाल उठाने के लिए काफी है।

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कोरोना की आड़ में पाकिस्तान की खुराफातों में एक यहां के हिंदुओं के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम भी है। विश्व के पहले कोरोना मरीज के मिलने से लेकर अब तक, इस देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की अत्यधिक कहानियां सामने आ चुकी हैं। कम उम्र हिंदू बच्चियों का अपहरण कर उनका कर्न्वजन, धर्म स्थलों को नुकसान पहुंचाने से लेकर घरों में आग लगाने और हत्या की घटनाओं में अचानक बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। अचानक आई इस तरह की घटनाओं की बाढ़ से हिंदू बिरादरी इस कदर घबरा गई है कि देश छोड़ने की बात कहने लगी है। अभी पाकिस्तान में हिंदुओं की कुल आबादी 1.25 प्रतिशत है। कोरोना के कारण आर्थिक रूप से कंगाल हो चुके हिंदुओं को इस्लाम कबूलने पर आर्थिक मदद का लालच देकर उनकी आबादी को समाप्त करने की साजिश चल रही है। पाकिस्तान की बड़ी सामाजिक संस्थाओं में से एक सिलानी ट्रस्ट इस साजिश को सिरे चढ़ाने में लगा है। हिंदुओं को मुसलमानों द्वारा संचालित अस्पतालों में इलाज देने से भी रोका जा रहा है। ऐसी शिकायतों पर अमेरिका एवं संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा नाराजगी जाहिर करने के बावजूद पाकिस्तान सरकार की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया है। हिंदू विरोधी गतिविधियां पहले की तरह ही पूर्ण गति के साथ बरकार हैं।
इस मामले में पाकिस्तान के तमाम सियासी दलों और सामाजिक संगठनों का भी मौन समर्थन इमरान सरकार को मिला हुआ है। ऐसी घटनाओं पर कोई कुछ नहीं कर रहा है। भारत के मुसलमानों की वकालत करने वाले इमरान खान भी खामोशी ओढ़े हुए हैं। सीएए और एनआरसी के बहाने भारत में धमाचौकड़ी मचाने वाली तथाकथित सेकुलर जमातों, वामपंथी दलों, कांग्रेस और मुस्लिम संगठनों का ध्यान भी पाकिस्तान के हिंदू विरोधी अभियान की ओर नहीं है। हालांकि हिंदू विरोधी गतिविधियों में अचानक आई तेजी के विरोध में दिसंबर से लेकर अब तक कई बार पाकिस्तान में हिंदू समुदाय प्रदर्शन कर चुका है। बावजूद इसके कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

यूं होता गया हिंदुओं का उत्पीड़न
— 14 दिसम्बर, 2019 को कराची के हिंदू अमर लाल केसवानी की नाबालिग पुत्री महक केसवानी का अपहरण कर उसका इस्लाम में कन्वर्जन करा दिया गया।
— 15 जनवरी, 2020 को मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान में कन्वर्जन की खातिर हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने पर चिंता जाहिर की है। केंद्र एवं राज्य सरकार से हिंदू विरोधी हरकतों पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसे लेकर कराची प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता भी की गई। इस बीच, जिया कॉलोनी की एक ईसाई गृहिणी ने बताया कि पिछले साल 10 अक्तूबर को उसकी 15 वर्षीय बेटी हुमा का अपहरण हुआ, लेकिन अब तक उसका पता नहीं चला है। सूचना है कि कन्वर्जन के बाद एक मुस्लिम लड़के के साथ उसका निकाह करा दिया गया। हुमा 9वीं की छात्रा है और पाकिस्तान में 15 साल से कम उम्र बच्चों की शादी पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
 
कन्वर्जन पर पाकिस्तान के श्रम, शिक्षा और अनुसंधान संस्थान के कार्यकारी निदेशक ने करामत अली ने चिंता जाहिर करते हुए अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग उठाई।
— सिंध प्रांत के थारपारकर के माता रानी भटियानी मंदिर पर भीड़ ने हमला कर तोड़-फोड़ की। देवी-देवताओं की प्रतिमाएं खंडित की गईं।
— 16 जनवरी, 2020 सिंध के जैकोबाबाद से महेश कुमारी का अपहरण किया गया। उसी दिन उसका कन्वर्जन कर उसका निकाह एक मुस्लिम लड़के से का दिया गया।
—7 फरवरी, 2020 को पाकिस्तान के नए पाठ्यक्रम में हिंदू विरोधी तथ्य शामिल किए जाने का खुलासा हुआ। पाकिस्तानी हिंदू समाज का आरोप है कि पुस्तक में दी गई कुछ तस्वीरें हिंदू विरोधी और भावनाएं भड़काने वाली हैं। पुस्तकों में ऐसी सामग्री शामिल कर हिंदुओं के प्रति नफरत फैलायी जा रही है।
— 28 फरवरी, 2020 को सिंध से दो हिंदू लड़कियों का अपहरण कर कन्वर्जन किया गया। परिजन रोते—बिलखते रहे पर किसी ने नहीं सुनी।
— 6 मार्च, 2020 को 13 साल की हिंदू लड़की को मुसलमानों ने कब्रिस्तान में दफनाने से रोक दिया। लड़की भेल जाति से थी। इस जाति में मृत्यु के बाद दफनाने की परंपरा है। भेलों को दफनाने के लिए अलग से जमीन आरक्षित है। इसके बावजूद वहां मुसलमानों ने मृत लड़की को दफनाने नहीं दिया।
 
— 7 मार्च, 2020 को सिंध के हैदराबाद से हिंदू लड़की झेन कोल्ही का ऐजाज अली और उसके साथियों ने बंदूक के जोर पर अपहरण कर लिया। दो दिनों तक यौन उत्पीड़न करने के बाद तीसरे दिन उसे उसके घर बाहर फेंक कर भाग गए। लड़की के घर वाले कई दिन तक मामला दर्ज करवाने के लिए स्थानीय थाने का चक्कर काटते रहे, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
—12 मार्च, 2020 को होली के दिन सिंध में एक हिंदू परिवार को कट्टरपंथियों ने इस कदर प्रताड़ित किया कि उनमें से चार की मौत हो गई। आरोप है कि प्रताड़ना के दौरान उन्हें जहर पिलाया गया।
— 13 मार्च, 2020 को कोरोना महामारी को लेकर पाकिस्तान में अफरा-तफरी के बीच देश के सबसे बड़े गैर सरकारी संगठन सिलानी ट्रस्ट ने गरीबों और भूखों को भोजन व राशन उपलब्ध कराने का अभियान शुरू किया। मगर हिंदुओं और दूसरे मत-पंथों के अल्संख्यकों को राहत सामग्री नहीं दी गई। उनसे कहा गया कि यह हिदुओं के लिए नहीं है।
— 20 मार्च, 2020 को सिंध के गांव इस्माइल में हिंदू, कोली समुदाय के कई घरों को कट्टरपंथियों ने आग के हवाले कर दिया, जिसमें घर का सारा सामान और मवेशी जलकर राख हो गए।
 

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— 23 मार्च, 2020 को सिंध में 11 मार्च को एक नाबालिग हिंदू लड़की का स्कूल से लौटते समय अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किया गया। गंभीर हालत में उसे उमरकोट के अस्पताल में भर्ती कराया गया, पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सूफी फकीर पुलिस थाना ने अब तक इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
—24 मार्च, 2020 को कट्टरपंथियों के उत्पीड़न का शिकार एक हिंदू संदीप कुमार और उसके परिवार के लोगों ने पाकिस्तान छोड़ने का ऐलान किया। सिंध के खैरपुर के पीरजो गोथ के इस हिंदू परिवार का कहना है कि इस बारे में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने गया तो उन्हें पीटा गया। कट्टरपंथी आज भी खुले घूम रहे हैं।
—25 मार्च, 2020 को सिंध के उमरकोट के पिथोरो में 50 वर्षीय हिंदू लालू का शव पेड़ से लटका मिला। मृतक के परिजनों का कहना था कि स्थानीय मुसलमान उसके पीछे पड़े हुए थे। मौका पाकर लालू को मार कर पेड़ पर लटका दिया गया। पुलिस ने हमेशा की तरह इसे भी आत्महत्या का मामला करार दे दिया।
—26 मार्च, 2020 को कट्टरपंथियों ने हिंदू युवक हरुंदर सिंह के परिवार पर हमला किया और उसके बेटे व पत्नी की हत्या कर दी।
— 14 वर्षीया हिंदू लड़की कोमल मेघवार का अपहरण कर कन्वर्जन और जबरदस्ती निकाह पीर अयूब से करा दिया गया। लड़की का अपहरण हथियार के बल पर किया गया था।
—लाहौर के कोरंगी और ल्यारी में सिलानी ट्रस्ट द्वारा फिर बेरोजगार हिंदू श्रमिकों को मदद करने से मना किया गया।
—3 अप्रैल, 2020 को पाकिस्तान के हिंदुओं और कुछ सामाजिक संगठनों ने इमरान खान सरकार और सामाजिक संगठनों से कोरोना के कारण बेरोजगार हुए गरीब हिंदुओं की मदद करने की गुहार लगाई।
— 5 अप्रैल, 2020 को लॉकडाउन के बीच हिन्दू और ईसाइयों को राशन के बदले इस्लाम कबूलने का लालच दिए जाने का खुलासा हुआ। कुछ ईसाई महिलाएं राशन वितरण वाले स्थान पर पहुंचीं तो उन्हें कलमा पढ़ने की शर्त पर राशन देने की बात कही गई। मगर वे बिना राशन लिए लौट गईं।
 
—7 अप्रैल, 2020 को सिंध के संघार में कट्टरपंथियों ने स्वर्गीय धर्मू माल्ही के बेटे टेकराम माल्ही की निर्ममता से हत्या कर दी। घटना की सूचना देने के बावजूद अब तक हत्यारे गिरफ्तार नहीं किए गए हैं।
— 12 अप्रैल, 2020 को बसंत कुमार नामक एक हिंदू युवक ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई कि मौलवी उस्मान उस पर कन्वर्जन के लिए दबाव डाल रहा है। उसके परिवार के सदस्यों को धमकी दी जा रही है कि यदि उसने इस्लाम नहीं कबूला तो मार दिए जाएंगे।

— 13 अप्रैल, 2020 को सिंध के उमरकोट और बादिन में दिनभर हिंदू ग्रामीण परिवार राशन का इंतजार करते रहे, पर ऐलान के बावजूद सरकारी अमला वहां नहीं पहुंचा। कोरोना संक्रमण को लेकर लॉकडाउन होने से गरीब हिंदू परिवारों के सामने भूख से मरने की स्थिति आ गई है।
— 14 अप्रैल, 2020 को पाकिस्तान में हिंदुओं को राशन देने में भेदभाव की खबर पर अमेरिका ने इसकी कड़ी निंदा की। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी पाकिस्तान के समक्ष चिंता प्रकट की है। इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार की ओर से राशन और राहत वितरण नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
— 22 अप्रैल, 2020 को सिंध में 14 साल की नाबालिग हिंदू लड़की का कट्टरपंथियों ने अपहरण कर कन्वर्जन कराया। घटना सिंध के चुंडीको की है। बाद में इस नाबालिग लड़की का जबरदस्ती निकाह 40 साल के मोहम्मद आचार दारेजो से करा दिया गया।