'फेक न्यूज़ लोकतंत्र और पत्रकारिता के लिए खतरा'

    दिनांक 11-मई-2020   
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नारद जयंती के अवसर पर नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स इंडिया द्धारा कोरोना काल में फर्जी खबरों की समस्या पर एक वेबिनार कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गलत उद्देश्य से फर्जी खबरों को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया

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केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गलत उद्देश्य से फर्जी खबरों को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है और कहा है कि सरकार इस संबंध में कड़े कानूनी उपाय करने का विचार कर रही है। जावड़ेकर ने नारद जयंती के अवसर पर नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स इंडिया द्धारा कोरोना काल में फर्जी खबरों की समस्या पर हुए एक वेबिनार कार्यक्रम में यह बात कही।
इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ अभियान में सरकार की सफलता को नकारने के लिए एक ख़ास वर्ग द्वारा फ़र्ज़ी और भ्रमित ख़बरें भी फैलायी जा रही हैं। इस प्रकार की फर्जी खबरें या फेक न्यूज लोकतंत्र और पत्रकारिता के लिए बहुत खतरनाक हैं। फ़र्ज़ी और भ्रामित करने वाली ख़बरों से समाज का भला नहीं होता। उन्होंने कहा कि हाल ही में उनके मंत्रालय के अधीन पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने भी फ़ैक्ट चेक यानी तथ्य परकता की जांच करने को लेकर एक तंत्र विकसित किया है। इसकी मदद से फ़र्ज़ी और ग़लत ख़बरों की पहचान कर सच्चाई को सोशल मीडिया पर उजागर किया जा रहा है। सरकार ने मौजूदा क़ानून को भी सख़्त बनाने की पहल तेज़ कर दी है।
 
श्री जावड़ेकर ने कहा कि हाल ही में वक़ील प्रशांत भूषण ने अमदाबाद के एक अस्पताल में हिंदू और मुस्लिम मरीज़ों की अलग पहचान करने तथा एक महिला के साथ अन्याय को लेकर दो ट्वीट किए थे। जांच में दोनो ट्वीट के तथ्य ग़लत पाए गए, लेकिन भूषण ने न तो माफ़ी मांगी न ट्वीट हटाया। इन सब स्थितियों से निपटने के लिए सरकार गम्भीर उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि फर्जी खबरों की रोकथाम के लिए पत्रकारों और संस्थाओं को भी आगे आना होगा। इनकी सच्चाई को उजागर करने के लिए फ़ेक न्यूज़ के बारे में जो रिपोर्ट तैयार हुई है वह बेहद सराहनीय है। मंत्रालय भी इसके सभी पहलुओं का अध्ययन करेगा। वेबिनार में नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स इंडिया के निवर्तमान राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा, एनयूजेआई के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राकेश आर्य, दिल्ली जर्नलिस्टस एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग पुनेठा और महासचिव सचिन बुधौलिया ने वरिष्ठ पत्रकारों की मौजूदगी में इस फेक न्यूज़ पर केंद्रित रिपोर्ट को जारी किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण के इस कालखंड में जिस तरह से फर्जी खबरों के जरिए मानवता के साथ खिलवाड़ कर लोगों को और समाज को गुमराह करने का काम किया जा रहा है, पत्रकारिता की जनहितकारी भावनाओं को आहत किया जा रहा है वह बहुत ही गलत है।
 
नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्टस इंडिया ने अपनी विभिन्न राज्य ईकाइयों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह पाया कि देश में बिना किसी पंजीकरण के हजारों की संख्या में न्यूज वेबसाइट का संचालन किया जा रहा है। डोमेन रजिस्टर कर वेबसाइट— समाचारों के नाम पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समाज और राष्ट्रविरोधी अभियान चलाया जा रहा है। फ्रॉड करने के मकसद से कोरोना के नाम पर ही भारत में ढाई हजार से ज्यादा डोमेन रजिस्टर हुए हैं। जब दुनिया के सारे देश वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ने में व्यस्त हैं तो उसी वक्त साइबर स्पेस में जबरदस्त घुसपैठ की जा रही है। एनयूजे-आई ने कहा है कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया। वहीं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) के वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जाता है यानी की प्रेस की आजादी मौलिक अधिकार के अंतर्गत आती है। एनयूजे-आई ने हमेशा भारतीय संविधान से मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता यानी की प्रेस की आजादी मौलिक अधिकार का समर्थन किया है। लेकिन जब पत्रकारिता मौलिक अधिकार से भटकने लगे और समाज और राष्ट्र के लिए फर्जी खबरें खतरा बनने लगे तब ऐसे समय में एनयूजे-आई ने फेक न्यूज़ के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया। ज्यादातर फर्जी खबरें इंटरनेट पर फैली हुई हैं जो काफी हद तक अनियमित हैं। इसलिए फर्जी समाचार और दुर्भावनापूर्ण सामग्री और उनसे निपटने के लिए एक रूपरेखा तैयार कर कानून बनाने की जरूरत है। सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफार्म फर्जी खबरों के प्रचार प्रसार का जरिया बन रहे हैं और ऐसे समाचार एवं पत्रकारिता करने वाले पत्रकार जाने अनजाने राष्ट्र और समाज के साथ धोखा कर रहे हैं।
 
एनयूजे-आई ने कहा है कि देश में फर्जी खबरों के लिए कोई ठोस कानून नहीं है, इसलिए झूठे समाचार और गलत सूचना बड़े खतरों के रूप में सामने आ रही हैं। वर्तमान में भारत में वेबसाइटों पर फर्जी समाचार या गलत सूचना से निपटने के लिए कोई ठोस विशिष्ट कानून नहीं है क्योंकि ऑनलाइन मीडिया किसी भी नियामक ढांचे के दायरे में नहीं आता है। ऑनलाइन मीडिया में काम करने वाले पत्रकारों को वर्तमान में सरकारी मान्यता नहीं दी जाती है। लिहाजा कोरोना काल में एनयूजे-आई इस रिपोर्ट को जारी कर भारत सरकार से फर्जी खबरों और ऐसी खबरों को प्रचार प्रसार करने वाले समूह और कथित पत्रकारों पर अंकुश लगाने के लिए संविधान के तहत कानून बनाने की मांग करता है ताकि पाठक, दर्शक और श्रोताओं को फर्जी खबरों से मुक्ति मिल सके। कार्यक्रम में नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्टस इंडिया, दिल्ली जर्नलिस्टस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भाग लिया। एनयूजे आई के उपाध्यक्ष हर्षवर्धन त्रिपाठी, डीजेए उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार अतुल गंगवार, उपाध्यक्ष संजीव सिन्हा, उपाध्यक्ष आलोक गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार राकेश शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार चंद्र प्रकाश, दिल्ली जर्नलिस्टस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल पांडे आदि मौजूद थे।