अपनी गलती छिपाने के लिए किसके कहने पर चोरी से ‘उप शीर्षक’बदल दिया ‘पुलित्ज़र’ ने ?

    दिनांक 11-मई-2020
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शिवानंद द्विवेदी
पुलित्जर ने अपनी वेबसाइट पर चोरी से उप शीर्षक बदल दिया। नए उप-शीर्षक में ‘भारत द्वारा कश्मीर की आजादी छीनने’ वाली बात हटा दी गयी है और इसे बदल दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना स्पष्टीकरण दिए उसने किसके इशारे पर ऐसा बदलाव किया ?

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पिछले दिनों पुलित्जर पुरस्कार को लेकर बहस शुरू हुई थी। भारत के तीन फोटो पत्रकारों को जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटने की बाद की घटनाओं पर ली गयी तस्वीरों के लिए 2020 का पुलित्ज़र पुरस्कार दिया गया है। पुलित्ज़र ने तीन फोटो पत्रकारों द्वारा ली गयी जिन 20 तस्वीरों को अपनी आधिकारिक वेबसाईट पर जारी किया, उसका उप शीर्षक भारत के लिहाज से घोर आपत्तिजनक था। शीर्षक था-‘For striking images of life in thecontested territory of Kashmir as India revoked its independence,executed through a communications blackout.’ यानी पुलित्जर के अनुसार ‘भारत ने कश्मीर की आजादी समाप्त कर दी है।’ हालांकि पुरस्कार की घोषणा के बाद से ही भारत की ओर से विरोध के चहुंओर स्वर उठने लगे। देश के बुद्धिजीवियों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे भारत विरोधी एजेंडा करार दिया। यहां तक कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के 132 ख्याति लोगों ने इस पुरस्कार पर सवाल खड़े किए हैं, जिनमें पूर्व सैनिक भी शामिल हैं। 132 हस्तियों ने पुलित्जर बोर्ड को खुली चिट्ठी लिखकर बोर्ड के चयनकर्ताओं पर झूठी खबरों और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
विवाद की शुरुआत
विवाद तब हुआ जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने तीनों पुरस्कार विजेता पत्रकारों को ट्वीटर पर बधाई दे दी। चूंकि एक ऐसे संगठन द्वारा यह पुरस्कार दिया गया था, जिसका दृष्टिकोण भारत की अखंडता को सीधे चोटिल करने वाला था। भारत के लिए कश्मीर उसका ‘अभिन्न अंग है।’ किंतु पुलित्जर की दृष्टि में ‘भारत द्वारा कश्मीर की आजादी समाप्त करने’ तथा‘India Controlled Kashmir’ जैसे वाक्य लिखे जाते हैं। अब यदि ऐसी संस्था अथवा संगठन से भारत में किसी को पुरस्कार मिले और वह व्यक्ति बिना आपत्ति जताए पुरस्कार ले ले तो सवाल उठने स्वाभाविक हैं। सवाल उन बड़े नेताओं पर भी उठते हैं, जो बधाई देने में देर नहीं करते।
 

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हालांकि चहुंओर इसके विरोध में स्वर उठे। पांचजन्य के पिछले लेख में ‘पुलित्जर पुरस्कार पर उठते सवाल, साजिश की सहभागी कांग्रेस’ उप-शीर्षक से लिखे लेख में न केवल पुरस्कार पर आपत्ति जताई बल्कि राहुल गांधी तथा तीनों पत्रकारों सहित पुलित्जर संस्था से सवाल पूछे।
 
ताजा स्थिति में ‘पुलित्जर’ ने अपनी वेबसाईट का वह शीर्षक बदल दिया है। अब नया शीर्षक है- ‘For striking images captured during a communications blackout in Kashmir depicting life in the contested territory after India stripped it of its semi-autonomy.’ नए उप-शीर्षक में ‘भारत द्वारा कश्मीर की आजादी छीनने’ वाली बात हटा दी गयी है और इसे बदल दिया गया है, हालांकि फोटो कैप्शन में ‘India Controlled Kashmir’ अभी भी लिखा है।
जो सवाल अब उठते हैं
अब कुछ नए सवाल खड़े होते हैं। आखिर किसके इशारे पर वेबसाइट से शीर्षक में बदलाव किया गया ? क्या पुरस्कार विजेताओं ने ऐसा करने के लिए ‘पुलित्जर’ से कहा अथवा कांग्रेस की तरफ से ऐसा पुलित्जर के लोगों को कहा गया ? या भारत से उठते विरोध के तीखे स्वरों ने उसे ऐसा करने पर बाध्य किया ? अगर इन दोनों ने नहीं कहा और बढ़ते विवाद की वजह से ‘पुलित्जर’ ने अपनी गलती सुधारी तो भी यह तरीका ठीक नहीं है। उप-शीर्षक बदलने से पहले उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने गलत शीर्षक लगाया था, जिसे वे बदल रहे हैं। बिना स्पष्ट किये अगर ‘पुलित्ज़र’ ने चुपचाप, धीरे से शीर्षक बदल दिया तो इसे यह सीधे तौर पर ‘पुलित्जर’ की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि पुलित्जर खुद से ऐसा किया होगा, यह उतना व्यावहारिक नहीं लगता है।
आश्चर्यजनक है कि पुलित्जर द्वारा उपशीर्षक बदल दिया गया, लेकिन भारत में बधाई देने वाले कांग्रेस के नेता राहुल गांधी तथा पुरस्कार पाने वाले तीनों फोटो पत्रकारों में से किसी ने भी अब तक पुलित्जर द्वारा लिखे गये उस मूल उप-शीर्षक की निंदा नहीं की है। बचपन में स्कूली किताबों में अंगुलिमाल डाकू और बुद्ध की एक कहानी सबने पढ़ी होगी। अंगुलिमाल बुद्ध से कहता है- ठहरो ! तो बुद्ध कहते हैं, ‘मैं तो ठहर गया, तुम कब ठहरोगे।’ कहने का आशय है कि ‘पुलित्जर’ ने तो सुधार कर लिया लेकिन राहुल गांधी कब सुधार करेंगे ?
 
ऐसे तमाम सवाल उठ रहे हैं, जिन पर पुलित्जर तथा पुरस्कार पाने वालों को जवाब देना चाहिए। चोरी से उप-शीर्षक बदल देने से सवाल नहीं मर जाया करते। इस चोरी-छिपे हुए बदलाव का स्पष्टीकरण आना ही चाहिए।
पुलित्जर पुरस्कार के खिलाफ 132 हस्तियों ने चिट्ठी लिखकर जताया विरोध
 

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देश के अलग-अलग क्षेत्रों की 132 ख्याति प्राप्त हस्तियों ने पुलित्जर पुरस्कार पर सवाल खड़े करते हुए पुलित्जर बोर्ड को खुली चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में ख्याति प्राप्त हस्तियों ने बोर्ड के चयनकर्ताओं पर झूठी खबरों और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। पत्र में लिखा गया है, 'सबसे पहले तो जब आप कश्मीर के लिए 'विवादित क्षेत्र' शब्द का उपयोग करते हैं तो भारतीय इतिहास के संबंध में आपकी सीमित जानकारी, साथ ही जम्मू कश्मीर के विषय में सूचनाओं का अभाव तथा मिथ्या धारणा, दोनों उजागर हो जाते हैं। कश्मीर के लिए 'विवादित क्षेत्र' जैसे शब्दों का प्रयोग भारत की सम्प्रभुता और अखंडता पर प्रहार तथा भारतीय संविधान की अवमानना है, क्योंकि जम्मू—कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और उसके बारे में कोई विवाद नहीं है।'
 
साथ ही पत्र में यह भी लिखा गया है, 'जब आप लिखते हैं कि 'भारत ने संचार माध्यम को बंद कर कश्मीर की स्वतंत्रता समाप्त कर दी।' तो निश्चित रूप से यह भारत की छवि को खराब करने की आपकी इच्छा को व्यक्त करता है। किसी क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से संचार रोक देने की व्याख्या उक्त क्षेत्र की स्वतंत्रता को समाप्त करने के रूप में नहीं की जा सकती। या तो आप स्वतंत्रता का अर्थ नहीं जानते हैं या जानबूझ कर सनसनीखेज खबर गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।' पत्र में लिखा गया है, 'आप भारत के उस राज्य की बात कर रहे हैं जो पिछले चालीस वर्षों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और दुष्प्रचार से जूझ रहा है।
 
जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के चलते सुरक्षाबल और आम जनता ने बहुत नुकसान सहा है. इसीलिये जो भी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से अलगाववाद और पाकिस्तान के विभाजनकारी एजेंडा को समर्थन देता है, वह आतंकवाद को भी समर्थन देता है, और हमें पूरा विश्वास है कि आप अमेरिकी नागरिक होने के नाते आतंकवाद को समर्थन देना तो नहीं चाहेंगें।' इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रमुख रूप से पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त डॉ. केके अग्रवाल, जवाहर कौल, कंवल सिंह, दर्शनलाल जैन और डॉ. केएन. पंडिता, सेवानिवृत्त सैनिक में लेफ्टिनेंट कमांडर हरिंदर सिक्का के अलावा चंडीगढ़ की भाजपा सांसद किरन खेर, पहलवान गीता फोगट और ख्याति प्राप्त खिलाड़ी योगेश्वर दत्त भी शामिल हैं।