हुगली में उन्मादियों का नंगानाच, ममता मौन

    दिनांक 13-मई-2020   
Total Views |
12 मई को हुगली में उन्मादी घंटों तक नंगानाच करते रहे। हिन्दुओं के घर, दुकान, प्रतिष्ठान खाक किए जाते रहे। हिन्दू बस्ती में जो सामने दिखा उसे बेदम करके कटृटरपंथियों ने मारा। लेकिन ममता सरकार और उसका प्रशासन मौन साधकर तमाशा देखता रहा

m_1  H x W: 0 x
 
 
पश्चिम-बंगाल में पिछले कई दिनों से अराजकता और उत्पात का माहौल है। राज्य में कई जगह आगजनी, तोड़फोड़, मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। इसी तरह 12 मई को भाजपा के महासचिव व पश्चिम-बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा कि समुदाय विशेष के लोगों द्वारा हुगली जिले के तेलनीपारा के तांतीपारा, महात्मा गांधी स्कूल के पास शगुनबागान और फैज अहमद फैज स्कूल के पास लगातार हिन्दुओं के घरों में आगजनी और लूटपाट की जा रही है। लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। ममता जी आपके बंगाल में इस तरह की घटनाएं आखिर कब तक ? इसी तरह से बैरकपुर से भाजपा के सांसद अर्जुन सिंह ने भी घटना से जुड़े एक के बाद एक कई वीडियो अपने टृवीटर एकाउंट पर पोस्ट किए और घटना की सत्यता को उजागर किया। उन्होंने अपने एक टृवीट में लिखा कि तेलनीपारा में मुस्लिम समुदाय के गुंडे हिन्दू बस्तियों पर हमला कर रहे हैं, बम फेंक रहे हैं और घरों को आग लगा रहे हैं। दीदी आग से मत खेलो। ये बंगाल को जला देगी। कोरोना के मुदृदे पर अपनी नाकामी से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मत जलाओ बंगाल को। 

m_1  H x W: 0 x 
 तेलनीपरा का इलाका जहां उन्मादियों ने उत्पात मचाया
 
इस सबके बाद तेलनीपारा की हकीकत सोशल मीडिया पर बारी—बारी से आने लगी। हिन्दुओं के घर, मकान और दुकानों के धू—धू जलते वीडियो ममता सरकार की तुष्टीकरण नीति और कटृटरपंथियों के हौसले बताने के लिए काफी थे। 
आखिर तेलनीपारा को क्यों बनाया गया निशाना
दरअसल एक सप्ताह पहले अजमेर से एक ट्रेन बंगाल के डानकुनी आई थी। इस ट्रेन में 1100 लोग आए, जिसमें 90 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय के लोग थे। यह सभी अजमेर शरीफ उर्स में शामिल होने गए थे, लेकिन लॉकडान में उधर ही फंस गए। अब अगर इस समुदाय को कोई दिक्कत हो और राज्य की मुख्यमंत्री सक्रिय न हों, ऐसा कहां हो सकता भला। सो ममता बनर्जी फट से जाग गईं और इन्हें वापस लाने का पूरा इंतजाम किया गया। लेकिन मौजूदा राज्य सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति का आलम यह है कि मुंबई व दक्षिण भारत में फंसे हुए बंगाली समुदाय (कामगार/मजदूर) के लिए किसी प्रकार की कोई ट्रेन चलाने के लिए उसके द्वारा भारत सरकार से आग्रह नहीं किया गया। यह बताने के लिए काफी है कि कैसे मुसलमान की बात आते ही ममता बनर्जी का दिल पसीज उठता है।

m_1  H x W: 0 x 
हुगली की हिंसा को लेकर जब सांसद लॉकेट चटर्जी और अर्जुन सिंह जिलाधिकारी से
मिलने गए तो वह भाग गए. इसके विरोध में धरने पर बैठे भाजपा के पदाधिकारी 
 
बहरहाल, लॉकडाउन में फंसे लोग अपने घर आ जाएं, उसमें भला किसी को क्या दिक्कत होगी। आज देश भर के लोग अपने घर—गांव—शहर पहुंच रहे हैं। वहां की सरकारें इन आने वाले लोगों का विधिवत तरीके से परीक्षण करती हैं। अगर किसी में कोरोना या उससे संबंधित लक्षण मिलते हैं तो उन्हें अस्पताल या क्वारेंटीन सेंटर भेज दिया जाता है। लेकिन पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं हो रहा है। दरअसल, अजमेर से जो ट्रेन बंगाल पहुंची उन लोगों को बिना किसी परीक्षण के अपने—अपने घर भेज दिया गया। इस सबके बीच कोलकाता, मिद्नीपुर ईस्ट, हुगली, मालदा, हावड़ा, बैरकपुर-भाटपाड़ा के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के कोरोना संक्रमण के आंकड़ो में वृद्धि होने लगी और कुछ ऐसे विडियो व ऑडियो जनता के सामने आ गए, जिनसे राज्य सरकार की कोरोना संक्रमण प्रबंधन की पूरी पोल खुल गई। इस सबको देखकर हिन्दुओं ने अपनी—अपनी बस्तियों व कॉलोनियों के रास्तों में बैरिकेट्स लगा लिए और मुस्लिम समुदाय के लोगों के अनाधिकृत प्रवेश को रोक दिया। हुगली जिले में भी ऐसा ही हुआ। यहां के चुरचुरा म्युनिसिपल के अंतर्गत आने वाले भद्रेश्वर-तेलनीपारा जो कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र है में दो मुस्लिम समुदाय के लोग कोरोना से संक्रमित थे। जब मेडिकल टीम इनका परीक्षण कर अस्पताल ले जाने के लिए इलाके में पुलिस बल के साथ पहुंची तो टीमएसी के स्थानीय नेता फिरोज के नेतृत्व में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कोरोना संक्रमितों को ले जाने का विरोध करते हुए मेडिकल जांच से इंकार किया और पुलिस-बल व मेडिकल टीम पर जानलेवा हमला किया गया।
 
 
हिन्दुओं ने रोका तो बनाया निशाना
इलाके के हिन्दुओं ने अपनी कॉलोनियों व बस्तियों को कोरोना संक्रमण से रोकथाम के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों का प्रवेश वर्जित ही किया था। क्योंकि यह लोग बस्तियों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे थे। जब कोई इन्हें रोकता तो उससे भिड़ने को तैयार हो जाते। इसी सबको लेकर 12 मई को तेलनीपारा के मुसलमानों ने तांतीपारा, महात्मा गांधी स्कूल के पास शगुनबागान और फैज अहमद फैज स्कूल के पास हिन्दुओं को निशाना बनाया गया। घरों में आगजनी, बमबारी की गई। इस दौरान चुन—चुन कर बस्ती के हिन्दुओं को मारा गया। हाथ में लाठी—डंडे, सरिया और धारदार हथियार लेकर घंटों तक इलाके में कोहराम मचाया गया। इस दौरान इन जिहादियों को जो भी हिन्दू दिखा उसे तब तक मारा जब तक कि वह बेदम नहीं हो गया। किसी का सिर फटा तो किसी के हाथ लहुलुहान हो गए। यह भीड़ यही नहीं रुकी इसने बाजार की हिन्दुओं की दुकान को न केवल पहले लूटा बल्कि बाद में इनको आग के हवाले कर दिया। खबरों की मानें तो महिलाओं—लड़कियों को भी इस दौरान उन्मादियों द्वारा निशाना बनाया गया और मंदिरों को भी नुकसान पहुंचाया गया। कटृटरपंथियों का यह नंगानाच बस्ती में घंटों चलता रहा।
 
प्रशासन की पूरी शह है इन दंगाइयों को
हु्गली की घटना भी बिना पुलिस के शह से नहीं हो सकती। बैरकपुर से भाजपा के सांसद अर्जुन सिंह यह आरोप लगाते हुए राज्य और पुलिस को कठघरे में खड़ा करते हैं। वह तेलनीपारा की घटना को केंद्र में रखते हुए बताते हैं कि राज्य में जब अराजक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी तब तक इनके हौसले ऐसे ही रहेंगे। राज्य में लगातार सांप्रदायिक घटनाएं घट रही हैं लेकिन उन्हें रोकने के बजाय पुलिस मौन धारण कर लेती है। हमने तेलनीपारा की घटना में शामिल लोगों के नाम देकर प्रशासन को अवगत कराया लेकिन इन पर अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। दरअसल तेलनीपारा मेरे घर से कुछ ही दूरी पर है। इसलिए घटना में शामिल तत्वों की जानकारी मेरे पास थी। कल यहां अराजकतत्वों द्वारा हिन्दुओं के घर लूटे गए, शीतला माता के मंदिर को आग के हवाले किया गया, पास की हिन्दुओं के दुकानों को लूटकर उसे आग से खाक कर दिया गया। लगभग 50 से अधिक घरों में आग लगाई गई। लेकिन पुलिस मूक दर्शक बनी रही। जिस पुलिस पर लोगों की सुरक्षा का जिम्मा होता है, उसके बड़े अधिकारी इन्हें शह देते नजर आए। यहां के पुलिस आयुक्त की छवि इस सबको लेकर बड़ी खराब है। जहां भी जाते हैं, वहां दंगा—फसाद होने शुरू हो जाते हैं।
 
 
घटना के बाद के हालात के बारे में बताते हुए सांसद अर्जुन सिंह कहते हैं कि आज हम लोग जिसमें सासंद लॉकेट चटर्जी भी थीं, हुगली के जिलाधिकारी से मिलने गए। लेकिन वह नहीं मिले। हम लोग इसके विरोध में धरने पर भी बैठे। इस सबको देखकर जिलाधिकारी पीछे के रास्ते से भाग गए। इसी तरह से सीपी के पास भी गए लेकिन वह भी निकल गए। ऐसे में सवाल उठता है कि आपके क्षेत्र में ऐसी घटनाएं घट रही हैं लेकिन बावजूद इसके प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। यकीनन राज्य की जनता इस सबको देख और समझ रही है।
 
राज्य ही नहीं अन्य क्षेत्रों में भी हो रहे हैं हमले
हिन्दुओं पर मुस्लिमो द्वारा हमले सिर्फ हुगली में ही नहीं हो रहे हैं बल्कि हावड़ा, मालदा, बैरकपुर-भाटपाड़ा व ऐसे इलाके जो कि मुस्लिम बहुल हैं, में भी हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है। हालत यह है कि इन जगहों पर हिन्दुओं को विस्थापन के लिए मजबूर किया जा रहा है, उनकी संपत्तियों पर कब्ज़ा किया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से ऐसे हमलों में उतरोत्तर वृद्धि जारी है। ममता की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति का हाल यह है की इन हमलों में शामिल लोगों के ऊपर कोई भी क़ानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। कई जगह तो पुलिस हमला होते देखती रहती है लेकिन मूक दर्शक बनी रहती है। यहां तक की पुलिस-बल, रैपिड एक्शन फ़ोर्स व मेडिकल टीम के ऊपर हुए हमलों में शामिल लोगों तक की प्राथमिकी लिखने से पुलिस कतरा रही है। इसे तुष्टीकरण नीति की इंतहा ही कहेंगे कि राज्य में कोरोना के दौरान बांटी जाने वाली राहत सामग्री में भेदभाव करते हुए या तो इसे सिर्फ मुस्लिमों को दिया जा रहा है या फिर टीएमसी के काडर को।
राज्यपाल से मिलकर प्रतिनिधि मंडल ने बताई राज्य की स्थिति
 

m_1  H x W: 0 x
राज्य के दिनोंदिन खराब होते हालात को लेकर राज्यपाल से मिला भाजपा का प्रतिनिधि मंडल
 
 
पश्चिम बंगाल की दिनोंदिन नाजुक स्थिति को लेकर हुगली से भाजपा की सांसद लॉकेट चटर्जी, बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह एवं अन्य प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने राज्यपाल से मुलाकात की। इस दौरान इस प्रतिनिधि मंडल ने हुगली में हुई अराजकता से उन्हें अवगत कराया। पांचजन्य से बात करते हुए बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह ने बताया कि कोरोना के दौरान सरकार का कार्य व्यवहार एवं कैसे इस दौरान एक वर्ग द्वारा राज्य के अलग—अलग हिस्सों में हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा, को राज्यपाल महोदय के समक्ष रखा। प्रतिनिधि मंडल ने हाल ही में मालदा में मुस्लिमों द्वारा तोड़ी गई मूर्ति, तेलनीपारा में एक वर्ग द्वारा मचाया गया उत्पात एवं इसी तरह से दक्षिण 24 परगना में जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को मारने और भगाने की घटनाओं को संज्ञान में लाया। इन तीनों घटनाओं में पुलिस की भूमिका यानी यूं कहें उसकी शह पर यह सब हुआ, इसे भी हमने राज्यपाल जी के सामने उजागर किया। 
 
ज्ञात हो कि प्रदेश की कानून—व्यवस्था से राज्यपाल इतने नाराज़ हैं की उन्होंने दो सप्ताह पहले ममता को एक कड़ा लिखा था, जिसमे उन्होंने कई बातों को लेकर ममता को लताड़ा था।