कफील पर रासुका की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई गई

    दिनांक 13-मई-2020
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लखनऊ ब्यूरो 
 
फरवरी माह में कफील के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के अंतर्गत कार्रवाई की गई थी। 12 मई को रासुका की अवधि समाप्त हो रही थी। पर अब प्रदेश सरकार ने कफील के खिलाफ रासुका की अवधि तीन माह के लिए बढ़ा दी है। अब कफील को अगस्त तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

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डॉ. कफील को मुम्बई से उत्तर प्रदेश की एसटीएफ ने 30 जनवरी को गिरफ्तार किया था। उसके बाद कफील को उत्तर प्रदेश की मथुरा जेल में रखा गया था। जनपद न्यायालय से उसे जमानत मिल गई थी। उसी दौरान फरवरी माह में कफील के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के अंतर्गत कार्रवाई की गई थी। 12 मई को रासुका की अवधि समाप्त हो रही थी। पर अब प्रदेश सरकार ने कफील के खिलाफ रासुका की अवधि तीन माह के लिए बढ़ा दी है। अब कफील को अगस्त तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
दरअसल पिछले दिनों कफील गोरखपुर से छिपकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पहुंचा था। 12 दिसंबर को उसने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और देश और संविधान के बारे में आपत्तिजनक बयान दिया था। इसके बाद उसके खिलाफ अलीगढ़ में एफआईआर दर्ज की गई थी। कफील ने अलीगढ़ में कहा था कि "जब मैं गिरफ्तार किया गया था। तब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बंद हुआ था। यहां पर विरोध हुआ था। मैं कैसे न आता। हर हाल में यहां पर पहुंचना, मेरा फर्ज बनता था।”
 
कफील ने वहां पर मौजूद छात्रों को संबोधित करते नफरत फ़ैलाने वाले अपने भाषण में कहा था कि "पहले एक गाना गाया जाता था- न हिन्दू बनेगा, न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है इंसान बनेगा। और अब हमारा मोटा भाई हमें सिखाता है- हिन्दू बनेगा, मुसलमान बनेगा, सिर्फ हिन्दू बनेगा, मुसलमान बनेगा। इंसान नहीं बनेगा। वे क्या जानें! संविधान का मतलब, हमारे संविधान पर उन्हें भरोसा ही नहीं है। हम जो बार-बार ये कहते हैं कि गृह मंत्री जी आप ये जो क़ानून लाये हैं, ये गैर संवैधानिक है। हमें यह समझना चाहिए कि हम किससे बात कर रहें हैं। हम उससे बात कर रहे हैं जिन्होंने बाबा साहब के संविधान को कभी माना ही नहीं, कभी पढ़ा ही नहीं।"
गौरतलब है कि पहली बार कफील का कारनामा तब सामने आया था जब 10 और 11 अगस्त, 2017 को बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में 32 मासूम एवं 18 अन्य गंभीर मरीजों की मृत्यु हो गई थी। बगैर किसी प्रकार की जांच कराए कफील ने टी.वी चैनलों पर यह बयान दे दिया था कि “बच्चों की मृत्यु आक्सीजन की कमी से हुई थी।” टी.वी चैनलों पर यह दृश्य दिखाया गया था कि आक्सीजन सिलेंडर कम पड़ जाने के बाद कफील ने निजी अस्पताल से आक्सीजन सिलेंडर मंगवाए। जबकि कफील खुद परचेज कमेटी में था तो निजी अस्पताल से आक्सीजन सिलेंडर मंगवाने का तमाशा करने के बजाय वह आक्सीजन सिलेंडर खरीद सकता था। कफील ने आक्सीजन सिलेंडर इसलिए नहीं खरीदा क्योंकि उसकी नीयत उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने की थी।
कफील पर आरोप है कि सरकारी अस्पताल का आक्सीजन सिलेंडर चोरी कराकर के वह निजी अस्पताल में उसका इस्तेमाल करता था। वर्ष 2017 के अगस्त माह में जब इन्सेफ़्लाइटिस की बीमारी के कारण बड़ी संख्या में मरीज बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में भर्ती हो रहे थे, उस समय कफील, इन्सेफ़्लाइटिस विभाग का चीफ नोडल अफसर था। आरोप यह भी है कि उस समय बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में मरीजों का इलाज करने के बजाय वह अपने निजी अस्पताल में ज्यादा व्यस्त था