कश्मीर में घट रहा आतंकवाद

    दिनांक 13-मई-2020   
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आर्टिकल 370 को हटाए जाने के बाद कश्मीर में जहां आतंकवादी घटनाओं में कमी आई है। वहीं आतंकी तंजीमों की भर्ती में भी कमी आनी शुरू हो गई है। सुरक्षाबलों द्वारा आतंकियों के सफाए के लिए चलाया जा रहा अभियान इसका बड़ा कारण है

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हाल ही में घाटी में आतंक हिजुबल का शीर्ष आतंकी रियाज नायूक मारा गया। यदि आंकड़ों के लिहाज से देखें तो पिछले 30 साल से आंतकवाद झेल रहे कश्मीर में अब आतंकी तंजीमों भर्ती लगातार घटती जा रही है दूसरे शब्दों में कहें तो कश्मीर की नई पीढ़ी पाकिस्तान और उनके आतंकियों मंसूबों को भली भांति समझ चुकी है। कश्मीर की नई पीढ़ी शांति चाहती है।
सुरक्षा एजेंसियों से मिला डेटा बताता है कि, कश्मीर में 2018 के बाद से आतंकियों की भर्ती की संख्या कम हो रही है। 2018 में 219 कश्मीरी आतंकी बने थे। यानी, उस समय हर महीने औसतन 18 कश्मीरी युवा आतंकी संगठन से जुड़ रहे थे। 2019 में इसकी संख्या घटी। पिछले साल 119 कश्मीरी युवा आतंकी बने। इस साल के आंकड़े देखें तो आतंकी तंजीमों की भर्ती में काफी गिरावट आई है। इस साल के 3 मई तक के ही आंकड़े देखें तो इस साल कश्मीर में 35 युवा ही आतंकी तंजीमों से जुड़े हैं।
आतंकियों की भर्ती में कमी आने का कारण
सूत्रों का कहना है कि आतंकियों की भर्ती में कमी आने का सबसे बड़ा करण यह है कि सुरक्षाबलों द्वारा कश्मीर में लगातार आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। घाटी में सक्रिय ज्यादातर आतंकी संगठनों के शीर्ष आतंकी जो कमांड करते थे वह मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार 2018 में 215 और 2019 में 152 आतंकी मारे गए थे। इसी साल 3 मई तक सुरक्षाबलों ने 64 आतंकियों को ढेर कर दिया है। बुरहान वानी और उसके बाद कश्मीर में आतंका पोस्टर बॉय बनकर उभरा आतंकी रियाज नायकू हाल ही में सुरक्षाबलों के हाथों मुठभेड़ में मारा गया।
इस साल मारे गए 64 आतंकियों में से 22 आतंकी हिजबुल से, आठ आतंकी लश्कर ए तैयबा से और आठ आतंकी जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन से जुड़े हुए थे। वहीं सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए 20 आतंकियों की पहचान नहीं हो सकी है। इसके अलावा तीन-तीन आतंकी अंसार गजवत-ए-हिंद और इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर से जुड़े हुए थे।
सोशल मीडिया से नहीं भड़का पा रहे युवाओं को
पहले सोशल मीडिया पर कश्मीर युवाओं को भड़काकर उन्हें आतंकी बनने के लिए तैयार किया जाता था। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सख्ती किए जाने के बाद इसमें कमी आई है। अब सोशल मीडिया पर आतंकी युवाओं को भड़का नहीं पा रहे हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर युवाओं को भड़काकर उन्हें आतंकी बनाने के ट्रेंड की शुरुआत बुरहान वानी ने की थी। बुरहान सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करता था। यही कारण था कि वो आतंक का पोस्टर बॉय बन गया था। बुरहान के सुरक्षाबलों के हाथों मुठभेड़ में मारे जाने के बाद कई आतंकियों ने यही ट्रेंड अपनाया। हाल ही में सुरक्षबलों के हाथों मारा गया हिजबुल शीर्ष आतंकी रियाज नायकू भी ऐसा ही करता था। वह सोशल मीडिया पर भड़काने वाली पोस्ट शेयर करता था। अब इस तरह की गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगा दी गई है। इसका काफी असर पड़ा है।