सच उजागर होता गया, वे मुंह फेरे खड़े रहे

    दिनांक 13-मई-2020
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पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दिल्ली में कोरोना संक्रमण को संभालने में दिख रही नाकामी और आंकड़ों को छुपाने वाले मीडिया ने फर्जी खबरें छापकर देश को गुमराह किया। ‘दुबई की राजकुमारी’ के चहेते कांग्रेसियों को छुपाया

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कुछ दिन पहले मीडिया की सहायता से 'इस्लामोफोबिया' का हल्ला मचाया गया था। ये पूरा नाटक पहले नागरिकता कानून के नाम पर हिंसा और अब तब्लीगी जमात की करतूतों पर पर्दा डालने के लिए रचा गया था। लेकिन जैसे ही पता चला कि इस अभियान की अगुआई कर रही तथाकथित 'दुबई की राजकुमारी' के कांग्रेस के साथ करीबी रिश्ते हैं पूरा मामला रफा-दफा हो गया। लेकिन भारतीय मीडिया के इस देशघाती चरित्र की बात पूरे विमर्श से गायब रही। इस बार ऐसा करते हुए आजतक चैनल और इंडियन एक्सप्रेस अखबार तो रंगे हाथ पकड़े गए, लेकिन बाकी लगभग सभी खबरों का ज्यादा जोर इस बात पर था कि ‘मारा गया आतंकवादी तो स्कूल टीचर था, लेकिन बेचारा परिस्थितियों के हाथों मजबूर हो गया और उसे हथियार उठाना पड़ा’। तथाकथित मुख्यधारा मीडिया का एक वर्ग दिल्ली दंगों में पकड़ी गई एक महिला आरोपी के समर्थन में अभियान चलाता है।
दैनिक भास्कर पिछले कुछ साल में फर्जी खबरों का बड़ा नाम बनकर उभरा है। अखबार ने उज्जैन की सड़क पर गिरा अनाज बटोरती एक बच्ची की फोटो छापी। बताया कि लॉकडाउन के बीच लोग दाने-दाने को तरस रहे हैं और इस बच्ची को अपने परिवार का पेट भरने के लिए सड़क पर गिरा अनाज बटोरना पड़ रहा है। चित्र देखते ही एक सामाजिक संगठन के लोगों ने बच्ची की सहायता का फैसला किया और बताई गई जगह पर जाकर उसके परिवार से भेंट की। तब पता चला कि अनाज बांटने के लिए गाड़ी आई थी और उससे जो थोड़ा गिर गया था उसे बच्ची ने उठाकर अपनी बकरी को खिला दिया। घर में पर्याप्त अनाज था और भुखमरी जैसी कोई बात नहीं थी। फोटोग्राफर ने यह बात छिपाते हुए झूठी कहानी गढ़ी थी। हो सकता है कि इस झूठ से अखबार को थोड़ी वाहवाही मिल जाए, लेकिन ऐसा करके उसने देश की छवि के साथ बहुत भद्दा मजाक किया है। यह चलन बढ़ भी रहा है क्योंकि ऐसा करने पर पुलित्जर और मैगसेसे जैसे पुरस्कार मिलने की उम्मीद रहती है, राहुल गांधी का बधाई संदेश भी मिल जाता है।
कांग्रेस और वामपंथी सरकार वाले राज्यों में मीडिया पर हमले भी जारी है। मुंबई में कुछ दिन पहले अर्णब गोस्वामी पर हमले और बाद में उन्हीं की पुलिस प्रताड़ना के बाद अब जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी निशाने पर हैं। उन पर केरल में पुलिस शिकायत दर्ज की गई है क्योंकि उन्होंने अपने कार्यक्रम में इस्लामी जिहादों के बारे में विस्तार से उदाहरणों समेत रिपोर्ट दिखाई थी। एक तरफ यह स्थिति है और दूसरी तरफ कांग्रेस, वामपंथी दल और उनकी ही शाखा की तरह काम करने वाला मीडिया का बड़ा वर्ग हर समय यह रोना-गाना मचाए रखता कि भाजपा के शासन में प्रेस की आजादी रोकी जा रही है। आश्चर्य तब होता है जब बंगाल में चाइनीज वायरस को लेकर मची अव्यवस्था पर चैनलों और अखबारों में कोई रिपोर्ट नहीं मिलती। यह बात सामने आ रही है कि बंगाल में संक्रमित लोगों की सही संख्या छिपाई जा रही है। लेकिन किसी चैनल या अखबार में आपको ममता सरकार की अकर्मण्यता को लेकर वैसी तीखी टिप्पणियां नहीं मिलेंगी, जैसी भाजपा शासित राज्यों को लेकर बड़ी सहजता के साथ की जाती हैं।
‘द हिंदू’ अखबार ने फेक न्यूज छापी कि सरकार ट्रेनों से ले जाए जा रहे मजदूरों से किराया वसूल रही है। शुरू में 2-3 ट्रेनों में किराये को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति तो थी, लेकिन इसी को आधार बनाकर सोनिया गांधी के महिमामंडन की कोशिश हुई। बताया जाने लगा कि कांग्रेस पार्टी सभी मजदूरों का किराया देगी। मीडिया ने बड़ी चतुराई से यह बात छिपा ली कि केंद्र और राज्य सरकारें पहले ही किराया देने की घोषणा कर चुकी हैं। बाद में पता चला कि कांग्रेस शासित प्रदेशों में राज्य सरकार के अधिकारियों की तरफ से मजदूरों से किराया वसूली की गई है। इसके बाद भी मीडिया ने सोनिया गांधी या कांग्रेस के किसी नेता से यह नहीं पूछा कि आपदा राहत के नाम पर उन्होंने ऐसी ओछी राजनीति क्यों की? जो कांग्रेस पार्टी अपने शासित राज्यों में महामारी की स्थिति को ठीक से संभाल नहीं पा रही है, उसके महिमामंडन की ऐसी कोशिशें उलटा मीडिया को ही पहले से ज्यादा हास्यास्पद और संदिग्ध बना देती हैं।