कोरोना संकट: भारतीय चिकित्सा पद्धति और उपचार

    दिनांक 16-मई-2020   
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अमेरिका के एन आई एच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (मैरीलैंड )ने यह पाया भारतीय ध्यान योग की पद्धति ब्लड प्रेशर के मरीजों को अत्यधिक लाभ देती है एन आई एच अमेरिका एलोपैथी के अलावा वैकल्पिक आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उपचार विधि पर कई वर्षों से शोध कर रहा है। अमेरिकी वैज्ञानिक भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति चरक ऋषि और आयुर्वेद के सिद्धांतों का बहुत गंभीर अध्ययन कर रहे हैं

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 हमें यह सुनने में मिलता है कि कई प्रकार के संक्रमण जो फैलते हैं वह कुछ समय के पश्चात अपने आप दम तोड़ देते हैं जैसे जहां पर उन्हें मानव संपर्क नहीं मिलता है या यूं कहिए अटलांटिक डेजर्ट में या सहारा डेजर्ट में जहां मनुष्य संपर्क में नहीं आते हैं तब क्रमण अपने आप दम तोड़ देता है।
लेकिन कोरोना वायरस एक अलग प्रकार का वायरस देखने को मिलता है यह इटली जैसे ठंडे प्रदेशों में अफ्रीका के उत्तरी क्षेत्रों में भारत , चीन में या कहें लगभग सभी महाद्वीपों में यह व्यापक रूप से फैल गया है। सभी कॉन्टिनेंट का वातावरण जलवायु सभी अलग-अलग प्रकार के है और यह जहां जहां संपर्क में आया वहां पर यह व्यापक रूप से फैला चाहे वहां सर्दी हो या गर्मी हो या आर्द्रता वाला क्षेत्र रहा है।
अब हम बात करते हैं भारत की भारत की जलवायु गर्म है यहां पर वह प्रयोग सटीक नहीं हो सकते जो यूरोप या अमेरिका में सटीक बैठते हो क्योंकि यूरोप और अमेरिका का वातावरण भारतीय वातावरण से बिल्कुल भिन्न है तो भी ग्लोबल विलेज और संचार गंतव्य स्थानों पर पहुंचने के त्रिव साधनों के होने के कारण हमारे यहां के वैज्ञानिक और डॉक्टर पिछले 40 वर्षों में अमेरिका यूरोप या पश्चिम जगत की मान्यताओं को ही प्रमाणित मानते हैं और अब इस मामले में व्यापक रूप से थोड़ा बहुत विरोधाभास भी देखने को मिल रहा है ।
उपवास
ईशा फाउंडेशन में सतगुरु से एक परिचर्चा में आईआईटी के छात्र ने पूछा के उपवास को ले करके मैंने पहले रूढ़ीवादी दी मान्यताओं को सुना कि यह भारत के रूढ़िवादी लोग उपवास को प्रमाणिक मानते हैं लेकिन जब अमेरिका के शोधकर्ताओं ने कहा कि उपवास से जीवन में एकाग्रता शुद्धि और स्वास्थ्य में अत्यधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है तब जाकर के मैंने भी उपवास रखना प्रारंभ किया है और महीने में मैं 3 बार उपवास रखता हूं आखिर इसका कारण क्या है जब पश्चिम जगत किसी शोध को मान्यता देता है तभी भारत के लोग उसे प्रमाणित मानते हैं!
सतगुरु ने बहुत सुंदर उत्तर दिया शायद यह हमारे रंग का दोष है और हम गोरे रंग पर अधिक विश्वास करते हैं और अगर वह गोरा रंग पश्चिम का हो तो ज्यादा विश्वास करते हैं।
भारत की प्राचीन मान्यताएं भारत में रोगों और संक्रमण से लड़ने हेतु वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बिल्कुल सटीक बैठती थी जिसे समय के अनुसार अंधाधुंध भौतिकवाद की दौड़ में हम भूलते गए इस विषय पर पहले भी कई बार लिखा जा चुका है किंतु हम मानते नहीं हम तो तभी मानते हैं जब पश्चिम जगत की मीडिया और वहां के वैज्ञानिक इस पर अपनी राय सहमति की दे देते हैं।
उपवास, उपवास हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है सद्गुरु कहते हैं भोजन के पश्चात मैंने कई बीमारियों को जन्म लेते देखा है और उन बीमारियों के कारण से मैंने कई लोगों की मृत्यु देखी है लेकिन खाली पेट रहने और उपवास रखने के पश्चात शायद ही मैंने किसी को मरते हुए देखा है। हमारा शरीर और हमारा दिमाग तभी अच्छे से काम कर सकता है जब हमारा पेट खाली हो हमारे शरीर में कई सुधार तब हो सकते हैं जब हमारा शरीर या पेट खाली हो मेरा मानना है दुनिया में कई बड़े अविष्कार भूखे पेट रहते हुए ही हुए हैं जब शरीर भूखा रहता है तो दिमाग की यांत्रिकी तेज गति से कार्य करती है और वही अविष्कार की ओर बढ़ती है।
अफ्रीका के एक छोटे से देश मलावी में विलियम कम क्वाला 14 वर्ष के एक बालक ने अपने गांव में भीषण अकाल में जिसमें उसकी एक गाय और एक उसका कुत्ता भी भूख से मर गया था और उसके घर में पड़े हुए कुछ मक्की के दाने भी चोरों ने चोरी कर लिए थे विकट परिस्थिति में और भूखे पेट विलियम ने अपने पिता की साइकिल और कुछ टूटे हुए इलेक्ट्रॉनिक सामानों को जोड़कर के पवन चक्की का आविष्कार किया था।और हवा से ऊर्जा को कैसे प्राप्त कर सकते हैं और वह सिंचाई में किस प्रकार से सहयोगी हो सकता है इसके कारण से अपने सूखाग्रस्त गांव को कृषि योग्य भूमि में बदल दिया मलावी के इस बालक की कहानी पर हॉलीवुड मैं प्रसिद्ध फिल्में भी बन चुकी है।
भूख के कारण से विलियम ने अविष्कार किया और हजारों भूखे लोगों को भोजन की व्यवस्था में एक साधक के रूप में कार्य किया। उपवास हमारी प्रतिरोधक क्षमता को ही नहीं बढ़ाता अपितु सामाजिक और राजनीतिक जीवन में उपवास एक संदेश का भी बहुत बड़ा हथियार होता है जैसे गांधी जी का उपवास विश्व प्रसिद्ध रहा अन्ना हजारे का उपवास आज के आंदोलन का मुख्य हथियार बना उपवास कई रोगों को जड़ से समाप्त कर सकता है उपवास से श्रद्धा जागृत होती है और मनुष्य सत्य की ओर बढ़ता है उपवास आचरण की शुद्धता की श्रेष्ठ औषधि है।
उपवास शरीर में प्रतिरोधक क्षमता ओं में आश्चर्यजनक वृद्धि करता है और यह कोरोनावायरस में अत्यधिक सहायक सिद्ध हो सकता है। पिछले 80 वर्षों में विज्ञान ने बहुत तेज गति से प्रगति की है और बहुत तेजी से हवाई जहाज पेट्रोल-डीजल ऊर्जा का अत्यधिक प्रयोग हुआ है आवागमन के साधनों ने बीमारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाने में बहुत मदद की है और मनुष्य का शरीर अब एक बाजार में बदल गया है और इस शरीर को ठीक रखने के लिए बड़ी दवा कंपनियों का गिरोह पूरे विश्व में काम कर रहा है।
अब विश्व के जितने भी दवा कंपनियां है वह जीवन रक्षा और लाभ के लिए नहीं अपितु मुनाफाखोरी के लिए काम करने लगी है।
व्यापार का सिद्धांत है अगर व्यापार लाभ के लिए होता है तो उसका दृष्टिकोण व्यापक और जन कल्याण हेतु होता है और व्यापार अगर मुनाफाखोरी में बदल जाए तो वह डकैती के अलावा कुछ नहीं करता ।
शाकाहार
इसी प्रकार अगली कड़ी में उपवास के साथ शाकाहार जीवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है शाकाहारी व्यक्ति अपना जीवन कम बीमारियों के साथ सहज और स्वस्थ रूप से जीता है। शाकाहारी भोजन में संतृप्त वसा प्राणी प्रोटीन का स्तर कम होता है और मैग्निशियम फाइबर पोटैशियम फोलेट विटामिन सी ई एंटीऑक्सीडेंट का स्तर ऊंचा होता है। यह प्रमाणिक मान्यता है की शाकाहारी लोग मांसाहारी लोगों से ज्यादा समय तक जीते हैं शाकाहारी भोजन आसानी से पच जाता है जिसके चलते आपका दिमाग स्वस्थ रहता है शाकाहारी भोजन के कारण से विषाक्त पदार्थों का शरीर में संग्रह कम होता है साथ यानी शरीर का पाचन तंत्र बहुत अच्छा और सुदृढ़ होता है ही पाचन तंत्र को नुकसान कम पहुंचता है।
योग और ध्यान
योग और ध्यान से ब्लड प्रेशर के मरीजों में अप्रत्याशित परिवर्तन देखने को मिला है जो कहते थे ब्लड प्रेशर की बीमारी कभी समाप्त नहीं हो सकती बल्कि यह समाप्त भी हुई और उच्च रक्तचाप के रोगी ने पूर्व स्वास्थ्य जीवन को जीने लगे हैं।
अमेरिका के एन आई एच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (मैरीलैंड )ने यह पाया भारतीय ध्यान योग की पद्धति ब्लड प्रेशर के मरीजों को अत्यधिक लाभ देती है। एन आई एच अमेरिका एलोपैथी के अलावा वैकल्पिक आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उपचार विधि पर कई वर्षों से शोध कर रहा है। अमेरिकी वैज्ञानिक भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति चरक ऋषि और आयुर्वेद के सिद्धांतों का बहुत गंभीर अध्ययन कर रहे हैं
डॉक्टर ए के वर्मा जो स्वयं एलोपैथी के डॉक्टर है अपने ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए उन्होंने आयुर्वेदिक की पद्धति को अपनाया। वर्मा प्रोफेसर हैं एंडोक्राइन सर्जरी विभाग संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में उन्होंने अपने अनुभव से बताया ध्यान और योग ने मुझे काम करने की क्षमताओं में आशातीत सफलता दिलवाई और मेरा ब्लड प्रेशर लगभग समाप्ति की ओर है। अंततः प्रत्येक दिन कम से कम 20 मिनट योग और ध्यान करने से हम अपने मन पर नियंत्रण करके शाकाहार ,उपवास ,और पानी पीने की पद्धति को ठीक से अपने जीवन को व्यवस्थित कर सकते हैं। रोगों से लड़ने की क्षमताओं में हमारे शरीर में अत्यधिक सकारात्मक बदलाव आ सकता है, जो करोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़ने में हमारे समाज के लिए अत्यधिक व्यवहार कारगर उपकरण साबित हो सकता है।
( लेखक भाजपा नेता हैं और दिल्ली में विधायक रहे हैं )