बड़ा गहरा है इस्लाम, रमजान और जिहाद का रिश्ता

    दिनांक 18-मई-2020   
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क्या कोई इस्लामिक विचारधारा ऐसी है, जो कहती है कि रमजान में जिहाद फर्ज है. इस बाबत दुनियाभर के रक्षा विशेषज्ञ अध्ययन कर चुके हैं, शोध कर चुके हैं. निष्कर्ष यही है कि हां, रमजान और जिहाद के बीच सीधा संबंध है
 
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तीन मई की बात है. जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में इस्लामिक आतंकवादियों से मुठभेड़ में भारतीय सेना के कर्नल व मेजर समेत पांच सुरक्षाकर्मियों ने अपना बलिदान दे दिया. रमजान के महीने में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने का इरादा लेकर घूम रहे इन जिहादियों को मौत की नींद सुला दिया गया. लेकिन इस घटना से पहले, रमजान शुरू होने से पहले इस बारे में पुख्ता खुफिया सूचना थी कि रमजान के दौरान जिहादी आतंकवादी गंभीर हमलों की फिराक में है. हर बार रमजान से पहले ये अलर्ट जारी होता है और बेवजह नहीं होता. रमजान के दौरान कट्टरपंथी जिहादियों की ये कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा काफिरों को मारा जाए. तो क्या जिहाद और रमजान का कोई संबंध है. क्या कोई इस्लामिक विचारधारा ऐसी है, जो कहती है कि रमजान में जिहाद फर्ज है. इस बाबत दुनियाभर के रक्षा विशेषज्ञ अध्ययन कर चुके हैं, शोध कर चुके हैं. निष्कर्ष यही है कि हां, रमजान और जिहाद के बीच सीधा संबंध है.
पैगंबर मोहम्मद की पहली जिहाद को कोबद्र की लड़ाई के नाम से जाना जाता है. यह वर्ष 624 में रमजान के महीने में ही लड़ी गई थी. इसके आठ साल बाद उन्होंने जब मक्का पर जीत हासिल की, तो महीना रमजान का ही था. रमजान में जिहाद को सुन्नत बताने वाले कट्टरपंथी मौलाना इन दो लड़ाइयों का ही उदाहरण देते हैं. जिस तरह पैगंबर जिए, उसी तरीके से जीवन जीने को सही इस्लाम मानने वाले संगठन गाहे-बगाहे रमजान से पहले मुसलमानों को इन जिहादों की याद दिलाते हैं. दलील ये भी होती है कि रमजान में जिहाद के दौरान मारे जाने पर सबसे ऊंची जन्नत मिलती है. जिहाद का पूरा फलसफा वैसे भी जन्नत की ख्वाहिश और हूरों की कामना पर टिका है.
आधुनिक जिहाद के खलनायक

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आधुनिक जिहाद का जनक अब्दुल्ला आजम को माना जाता है. अब्दुल्ला आजम ही वह शख्स है, जो 1980 के दशक में जिहाद की सोच को लेकर मदरसों और मस्जिदों में पहुंचा. अब्दुल्ला आजम अफगानिस्तान में सोवियत संघ की फौज के खिलाफ लड़ने वालों के बीच बहुत मशहूर था. खासतौर पर अरब व अन्य विदेशी लड़ाकों के बीच उसकी भूमिका सेनापति जैसी थी. उसने अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ जिहाद का ऐलान किया था. आजम की दलील थी कि जैसे रमजान में रोजा और नमाज फर्ज है, वैसे ही जिहाद भी फर्ज है. उसका कहना था कि जिहाद रमजान के दौरान इबादत का सबसे अच्छा तरीका है. अल्लाह को रोजा और नमाज से ज्यादा जिहाद प्रिय है. इस्लामिक स्टेट (आईएस) तो रमजान के पहले बाकायदा पूरी दुनिया में खिलाफत (खलीफा के साम्राज्य) को मानने वालों के लिए जिहाद की अपील जारी करता था. 2016 में आईएस के प्रवक्ता अबु मोहम्मद अल-अदनानी के रमजान से पहले के बयान पर गौर कीजिए. उसने दुनियाभर के अपने समर्थकों से कहा था, "तैयार हो जाओ. काफिरों के लिए रमजान को आफत का महीना बनाने के लिए तैयार हो जाओ. खासतौर पर यूरोप और अमरीका में मौजूद खिलाफत के समर्थकों से ये अपील की गई थी. उसकी इस अपील पर उमर मतीन जैसे अकेले लड़ाके ने फ्लोरिडा के ऑरलैंडो में समलैंगिक पुरुषों के एक क्लब में 49 लोगों की हत्या कर दी. जून 2018 में पाकिस्तान के रावलकोट में हाफिज सईद के जमात उद दावा के मौलाना बशीर अहमद खाकी की एक नमाज के दौरान तकरीर पर गौर कीजिए. रमजान जिहाद एक कत्ल का पाक महीना है. जो लोग जिहाद के दौरान मारे जाएंगे, उनके लिए जन्नत के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे.
रमजान में ज्यादा होते हैं जिहादी हमले
आईएसआईएस और अलकायदा के हर बार रमजान से पहले जिहाद की अपीलें जारी करते हैं.अमेरिकन यूनिवर्सिटी के न्याय, कानून एवं अपराधशास्त्र विभाग के प्रोफेसर सुत कबुकु और ब्रैड बार्थोलोम्यू ने रमजान और जिहाद के आपसी संबंध को लेकर शोध किया. दोनों ने 1984 से लेकर 2016 के बीच मुस्लिम बहुल देशों और आईएसआईएस जैसे जिहादी संगठनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए रमजान के दौरान होने वाली आतंकवादी घटनाओं और हत्याओं का विश्लेषण किया. शोध के मुताबिक चूंकि रमजान चंद्रमा पर आधारित कलेंडर से निर्धारित होते हैं, इसलिए 33 साल के चक्र में ये सभी मौसम में आते हैं. ग्लोबल टेरेरिज्म डाटाबेस (जीटीडी) पर उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा में पाया गया कि 33 साल के दौरान हर मौसम में रमजान के दौरान सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा लोग मारे गए. इस बाबत पुख्ता प्रमाण मिले कि जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां रमजान के दौरान आतंकवादी घटनाओं में ज्यादा बढ़ोतरी देखने आई. मुस्लिम देशों में सामान्य दिनों के मुकाबले रमजान के दौरान होने वाली आतंकवादी घटनाओं में सात फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. जो दिखाता है कि रमजान का असर जिहाद पर मुस्लिम देशों में बहुत ज्यादा होता है.
शोध में बिग, एलाइड एंड डेंजेरस (बीएएएडी) के डाटाबेस को भी शामिल किया गया. बीएएडी जिहादी आतंकवादी संगठनों का सबसे भरोसेमंद डाटाबेस है. पाया गया कि जिहादी संगठनों ने सामान्य दिनों के मुकाबले रमजान में 27 फीसद ज्यादा आतंकवादी हमलों को अंजाम दिया. यह भी देखने में आया कि रमजान के दौरान इन संगठनों द्वारा आतंकवादी हमले की संभावना 25 प्रतिशत बढ़ जाती है.
दोनों विशेषज्ञों ने आईएसआईएस द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों का टेस्ट केस के रूप में ज्यादा गहराई से अध्ययन किया. देखने में आया कि रमजान के दिनों में आईएसआईएस के आतंकवादी हमलों में 24 प्रतिशत का इजाफा हुआ. अगर इसे हिंसक गतिविधियों, मौसम के साथ होने वाले बदलावों पर रमजान के साथ देखा जाए, तो यह आंकड़ा बढ़कर 39 फीसद हो जाता है. यह भी देखने में आया कि अकेले आईएसआईएस नहीं, बाकी संगठनों के आतंकवादी हमलों में भी रमजान के दौरान ज्यादा तेजी आ जाती है. इस अध्ययन ने सेक्यूलर जमात की इस दलील की भी धज्जियां उड़ा दीं कि रमजान के दौरान होने वाली आतंकवादी हिंसा में मुख्य हिस्सेदारी आईसआईएस की है. अध्ययन में पाया गया कि सभी जिहादी संगठन आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के लिए रमजान के इंतजार में रहते हैं. इसकी कई वजह हो सकती हैं. लेकिन मुख्य वजह ये कि रमजान इबादत का महीना है. तराबीह, तकरीरें, दुआओं के बीच में एक धार्मिक माहौल बनता है. इसी धार्मिक आवेग में कट्टरपंथी मुस्लिम नौजवानों को हिंसा के लिए भड़काना ज्यादा आसान होता है.
जीटीडी के एक अन्य अध्ययन में हम पाते हैं कि रमजान और सामान्य दिनों में आतंकवादी हिंसा के बीच बड़ा अंतर है. रमजान के दौरान आतंकवादी हमले दुनिया में छह प्रतिशत बढ़ जाते हैं और 17 प्रतिशत ज्यादा लोगों की जान जाती है. 2006 से 2015 के रमजान के अध्ययन के दौरान पाया गया कि इस दौरान ये पाक महीना जून से अक्टूबर के बीच पड़ा. मार्च और अक्टूबर में हत्याओं की दर सामान्य दिनों के मुकाबले 25 फीसद अधिक पाई गई. अलग-अलग देश की समीक्षा करेंगे, तो ये दर बदल जाती है. मसलन ईरान, बांग्लादेश और लेबनान में आतंकवादी हमलों की दर में सामान्य दिनों के मुकाबले पचास फीसद तक की कमी आई. लेकिन जैसे ही आप इस्राइल को देखते हैं तो रमजान में 200 प्रतिशत अधिक आतंकवादी हमले हुए. मिस्र में हमलों की तादाद में सौ फीसद की बढ़ोतरी देखने में आई. ये अध्ययन भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. क्योंकि यह दर्शाता है कि जहां इस्लामिक परिभाषा के अनुसार काफिरों की संख्या अधिक है, वहां आतंकवादी हमलों में रमजान में इजाफा होता है.
भारत में  रमजान पर खतरा
भारत में रमजान के दौरान पाकिस्तान समर्थित जिहादियों ने आतंकवादी गतिविधियां तेज कर दी हैं. अब पाकिस्तान के समर्थन से अल कायदा भी मैदान में उतर आया है और आतंकवादी हिंसा के लिए मुसलमानों को उकसा रहा है. इस विषय में भी पुख्ता खुफिया सूचनाएं हैं कि रमजान के दौरान और खासतौर पर ईद या उससे पहले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई बड़े आतंकवादी हमले को अंजाम देने की फिराक में है.
अल कायदा इन दर अरेबियन पेनिनसुला (एक्यूएपी) ने रमजान के दौरान ही पांच मई को फिर एक जिहादी अपील जारी की है. भारत में चूंकि जिहाद के नाम पर होने वाली आतंकवादी हिंसा पाकिस्तान प्रायोजित है, इसलिए रमजान के दौरान अल कायदा के बयान को खुफिया एजेंसियां बहुत महत्वपूर्ण मान रही हैं. माना जा रहा है कि जिस तरीके से पिछले दिनों नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर देश में कट्टरपंथियों ने हिंसा फैलाई, रमजान के दौरान उसे फिर से जिंदा करने की कोशिश हो रही है. अल कायदा ने खासतौर पर नागरिकता संशोधन कानून का नाम लिया. इस खूंखार संगठन का कहना है कि अब भारत में कानून बनाकर मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है, उनका नरसंहार हो रहा है. रमजान के दौरान पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अल कायदा के जरिये ये कोशिश कर रही है कि मुसलमानों को भड़काया जा सके. पीपल्स फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) का नेटवर्क समय रहते ध्वस्त किया जा चुका है. नहीं तो, आईएसआई रमजान के दौरान इसका इस्तेमाल करने की फिराक में थी. भारतीय खुफिया एजेंसी रमजान के दौरान पांच हजार से ज्यादा फेसबुक एकाउंट और पेजों पर नजर रखे हुए. साथ ही तीन हजार से ज्यादा ट्विटर हैंडल की जड़े खंगाली जा रही है. ये सोशल मीडिया के जरिये रमजान के दौरान हिंसा भड़काने की साजिश है.
पाकिस्तान रमजान के दौरान जिहाद की आग को ज्यादा से हवा देने की कोशिश कर रहा है. तीन मई को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में भारतीय सेना के कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश कुमारऔर लांस नायक दिनेश शहीद हो गए थे. जम्मू कश्मीर पुलिसएस.आई. सगीर अहमद ने भी बलिदान दिया. चार मई को हंदवाड़ा में ही आतंकवादियों ने सीआरपीएफ पर हमला किया. सीआरपीएफ के तीन जवानों ने बलिदान दिया. सीआईएसएफ पर भी इसी दिन एक आतंकवादी हमला हुआ. जिसमें एक जवान जख्मी हो गया. खुफिया सूचना है कि जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ भारत में भी फिदायीन हमले की तैयारी जिहादी कर रहे हैं. अपनी इस साजिश को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की जी-तोड़ कोशिशों में लगा है. उसकी कोशिश ये है कि रमजान में ज्यादा से ज्यादा आतंकवादी हिंसा फैलाई जाए. इन घटनाओं के जरिये भारतीय मुसलमानों में ये संदेश दिया जाए कि रमजान के दौरान जिहाद का अलग महत्व है.
रमजान में आग लगाने पर उतारू स्थानीय जिहादी
बताते तो ये हैं कि रमजान इबादत का महीना है. लेकिन क्या सच में. देश में लॉक डाउन के दौरान रमजान के साथ ही हिंसक गतिविधियों की बाढ़ आ गई. ये कैसी इबादत है, पुलिस पर पथराव कर रहे हैं. दूसरे धर्म के लोगों को निशाना बना रहे हैं. क्या ये जिहाद का स्थानीय और ज्यादा खतरनाक रूप नहीं है. इन घटनाओं पर गौर कीजिए..
24 अप्रैल
- पानीपत के हुडा सेक्टर 11 और 12 में मुस्लिम बाहुल्य गौस अली मोहल्ले में देर रात जुटी भीड़ को पुलिस ने टोका. लॉक डाउन कराने की हिदायत दी. भीड़ ने पुलिस की टीम पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. बेकाबू हुए हालात को काबू करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की. पुलिस पर पत्थरबाजी के जुर्म में 100 से अधिक लोगों पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है.
- उत्तर प्रदेश स्थित बहराइच के बोंडी थाना क्षेत्र की मस्जिद में सैंकड़ों की तादाद में मुसलमान लॉक डाउन तोड़ते हुए इकट्ठा हो गए. इसकी सूचना पर जब पुलिस दल मौके पर पहुँचा. नमाजियों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया. पुलिस ने इस मामले में 31 नमाजियों पर हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और 23 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
25 अप्रैल
- बहराइच जिले के खैरीघाट थाना क्षेत्र के गाँव तेलियानपुरवा की मस्जिद के अंदर मौलवी की अगुवाई में सामूहिक रूप से जुमे की नमाज अदा की गई. सूचना पर पहुंची पुलिस पर आदतन नमाजियों ने हमला किया. इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मौलवी सहित नौ नमाजियों को गिरफ्तार कर लिया.
- यूपी के ही फिरोजाबाद के कई इलाकों में शुक्रवार देर रात मजहबी नारेबाजी की गई. मुस्लिम समाज के लोग धार्मिक नारेबाजी करते हुए सड़कों पर जमा हो गए और देखते ही देखते जाटवपुरी चौराहे पर एंबुलेंस में तोड़फोड़ कर दी. एबुलेंस चालक आकाश यादव अपना जान बचाकर वहाँ से भागना पड़ा. हाजीपुरा, बारहबीघा, लालपुर, तीसफुटा और रामगढ़ क्षेत्र में धार्मिक नारेबाजी की गई.
- झारखंड के गोड्डा में भी पुलिस पर हमला किया गया. रहबड़िया गांव की मस्जिद में शुक्रवार को 40—50 लोग जुटे थे. पुलिस मौके पर पहुंची तो उस पर पथराव किया. तीन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए और गश्ती वाहन क्षतिग्रस्त हो गया. पांच लोग गिरफ्तार किए गए हैं.
- दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के कासबयार द्रबगाम इलाके की एक मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए. सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और समझाने का प्रयास किया. इस पर नमाजियों ने पुलिस दल पर पथराव करना शुरू कर दिया. इस पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागे.
26 अप्रैल
- कानपुर के हैलट कोविड-19 हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती जमातियों ने फिर से हंगामा किया. दोपहर का खाना मिलते ही भड़क गए. खाने की थाली में लात मार दी. तीसरी मंजिल पर स्थित वार्ड में खाना देने गए वार्ड ब्वॉय को मारने के लिए दौड़े तो वह किसी तरह वहां से भागा. जमाती पीछे-पीछे नीचे तक उतर आए.
28 अप्रैल
- महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित बिदकीन गाँव में नजामियों ने पुलिस पर हमला कर दिया. पुलिस को सूचना मिली थी कि वहाँ की एक मस्जिद में लॉकडाउन का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है और नमाज पढ़ने के लिए मुसलमानों की भीड़ जुटी हुई है. पुलिस के जाँच दल को देखते ही नमाजियों ने पथराव शुरू कर दिया. इस घटना में एक पुलिसकर्मी को चोटें भी आईं.
- ऐसा ही एक मामला पश्चिम बंगाल के हावड़ा से सामने आया है, जहाँ लॉकडाउन लागू करा रहे पुलिसकर्मियों पर मुसलमानों ने हमला कर दिया. यह घटना बेलिलियस रोड इलाके में घटी। जब पुलिस सड़क पर घूम रहे लोगों को घर में जाने के लिए कह रही थी, तभी लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया. हमले में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए. बंगाल की जिहाद प्रेमी ममता सरकार ने घटना की रिपोर्ट तक नहीं लिखी.
- इसके अलावा हावड़ा के टिकियापारा इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई थी. जब लॉकडाउन का उल्लंघन होता दिखा तो पुलिस वहाँ पहुँच गई. पुलिस ने इस दौरान भीड़ को वहाँ से हटाने की कोशिश की तो भीड़ में कुछ अराजक तत्वों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया और बोतलें भी फेंकीं गईं.
1 मई
- असम के नजरिया जिले में एक हिंदू चाय विक्रेता को जिहादियों ने निशाना बनाया. जहनोबी गोगोई नाम की ये चाय विक्रेता काम से लौटने के बाद घर में टीवी देख रही थी. पड़ोस में रहने वाले मुसलमान उनके घर पहुचे. सिर्फ टीवी चलाने पर इस महिला पर हमला किया गया. इन मुसलमानों का कहना था कि वह रमजान के दौरान टीवी कैसे चला सकती है.