मेवात जहां हिंदू होना ही गुनाह हो गया

    दिनांक 18-मई-2020   
Total Views |
यहां हिंदू होना गुनाह है, हम पाकिस्तान की नहीं बल्कि हरियाणा के मेवात की बात कर रहे हैं जहां पिछले 50 बरसों में गांव के गांव हिंदू विहीन हो गए हैं, आखिर क्यों यहां ऐसा हो रहा है...

m_1  H x W: 0 x
विश्व हिन्दू परिषद द्वारा मेवात में हिन्दू समाज की प्रताड़ना के सम्बन्ध में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति की घोषणा 14 मई को की गयी थी। इस समिति में मेजर जनरल (सेनि) जी. डी. बख्शी, महामण्डलेश्वर स्वामी धर्मदेव एवं एडवोकेट चन्दकान्त शर्मा शामिल थे।
 
समिति ने लाकडाउन के नियमों का ध्यान रखते हुए गुरुग्राम के सिविल लाइन स्थित अग्रवाल धर्मशाला में पिछले दिनों मेवात क्षेत्र के पीड़ित गांवों से आए 18 लोगों से एवं चार हिंदुओ से फोन पर बात करके उनकी व्यथा सुनी और जिहादियों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को जाना। मुख्य तौर पर चर्चा में मेवात के तीन थाना क्षेत्र (पुन्हाना, बिछोर व नगीना) में कथित उत्पीड़न के केन्द्र बिंदु पाये गये। स्थानीय हिन्दुओं ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि इन इलाको में जो गांव मुख्य तौर से मुस्लिम बहुल हैं या फिर जहां पर हिंदुओं के घर केवल नाम मात्र के हैं, वहां मुस्लिमों द्वारा हिन्दू परिवारों पर बर्बरतापूर्ण अत्याचार किये जा रहे हैं। दुर्भाग्य से पुलिस द्वारा भी किसी प्रकार की अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। मन्दिरों में भी हिंदुओं का जाना दूभर हो गया है। कई स्थानों पर मुस्लिम समुदाय द्वारा अवैध कब्जा करके मस्जिदों का निर्माण किया जा रहा है। मन्दिर के महंतों एवं पुजारियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए शारीरिक व मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है।

m_1  H x W: 0 x 
पिछले दिनों में पुन्हाना में कट्टरपंथियों ने कपिल और मनीष को निशाना बनाया था
 
समिति के समक्ष यह भी बात सामने आई कि किसी हिन्दू परिवार पर अत्याचार होता है तब या तो उसकी तरफ से कोई पुलिस रिपोर्ट लिखी नहीं जाती, और अगर लिखी भी जाये तो मामूली धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर खानापूर्ति कर दी जाती है। उसमें भी बाद में पीड़ित हिंदुओं पर दबाव बनवा कर मुकदमे में समझौता करा दिया जाता है। हिन्दू परिवारों पर इस कदर दबाव व अत्याचार हो रहा है कि हिन्दू समुदाय पलायन का विचार कर रहा है। हिन्दू महिलाओं का घर से बाहर निकलना व हिन्दू युवकों का खेती करना व अपने—अपने काम पर जाना दूभर हो रहा है। इस सबके बीच हिंदुओं के मवेशी भी सुरक्षित नहीं हैं। विशेष रूप से गायों का अपहरण करके हत्या कर दी जाती है। आज यहां की हालत यह हो गई कि मुस्लिम किसी न किसी बात पर हिन्दुओं से लड़ने का मौका खोजते रहते हैं। ऐसे ही अनेक उदाहरण सामने आए, जहां मुस्लिम लोगों की 300-400 की भीड़ ने असहाय हिन्दू परिवारों पर लाठी, फरसे व पत्थरों से हमले किए। इसमें कई हिन्दू अभी भी गम्भीर अवस्था में उपचाराधीन हैं। किन्तु दोषियों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई। यहां यह बात भी ध्यान में आई कि कुछ अराजक ताकतों द्वारा पुन्हाना, बिछोर व नगीना थानों में मुसलमानों को हिंदुओं के विरुद्ध प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
सरकारी कार्यालयों में भी किया जाता उत्पीड़न
 
समिति ने पाया कि सरकारी कार्यालयों में, जहां मुस्लिम अधिकारी बहुत हैं, वहां हिंदुओं के प्रति घृणात्मक रवैया अपनाया जाता है। एक मामले में चिरौली पुन्हाना में एक वाल्मीकि परिवार के विवाह उत्सव में मुस्लिम युवकों ने न केवल मारपीट की बल्कि उनके सोने के गहने भी छीन कर ले गये, जिसकी पुलिस रिपोर्ट पुन्हाना थाने दर्ज कराई गई। इसी प्रकार एक मुसलमान द्वारा फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट डाली गयी किन्तु पुलिस रिपोर्ट के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके विपरीत हिन्दू व्यक्ति के खिलाफ ही उपरोक्त सम्बन्ध में झूठा मुकदमा दर्ज किया गया।
 
गोहत्यारों पर नहीं होती कड़ी कार्रवाई
गोकशी के मामलों में भी जब पुलिस को सूचना दी जाती है तो पुलिस अपराधियों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करती है। उदाहरण के लिए 28 अप्रैल को पुन्हाना में गो तस्करों की गोली से रघुवीर नामक एक मजदूर मारा गया। लेकिन इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने के बजाए पुलिस इसकी लीपापोती में लगी है। मजदूर का परिवार भुखमरी के कगार पर है, परन्तु मुआवजे की बात तो दूर, उसकी कोई परवाह नहीं की जा रही है। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जहां हिन्दू परिवार गिने चुने हैं, वहां हिंदुओं की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही अपेक्षित सुरक्षा बल मौजूद है। इसके अतिरिक्त, लॉक डाउन के चलते जहां हिन्दू व्यावसायी लॉक डाउन के नियमों का पालन करते हुए जब अपने प्रतिष्ठान चला रहे होते हैं, तो वहां के स्थानीय अधिकारी केवल हिंदुओं का गैर कानूनी चालान करते हैं, जबकि मुस्लिमों द्वारा चलाये जा रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान लॉक डाउन की धज्जियां उड़ाकर, बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के धड़ल्ले से चल रहे हैं। 500 मकानों वाले गांव कुलैटा (नगीना ) में जहां केवल 10 मकान हिंदुओं के हैं वहां हिन्दुओं का घर से निकलना दूभर हो रहा है। बहू-बेटियां भी सुरक्षित नहीं हैं। इतना ही नहीं, सरकारी स्कूलों में हिन्दुओं के बच्चों को नमाज पढ़ने के लिये बाध्य किया जाता है,जहां पर कर्मचारी मुस्लिम बहुल हैं।
 
समिति से स्थानीय लोगों की चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आयी कि मेवात क्षेत्र में बच्चों को जिहाद की तरफ भी धकेला जा रहा है। मदरसों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मस्जिदों का गैर-कानूनी तरीके से निर्माण किया जा रहा है। ऐसा ही एक उल्लेख न्यायिक परिसर नूंह का भी आया, जहां अभी एक मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में मुस्लिम समुदाय की कार्य प्रणाली कुछ इस तरह की है। वे पहले किसी भी जगह को चिन्हित करके वहां छोटी-मोटी मजार बनाते हैं। फिर उसे धीरे—धीरे एक बड़ी मस्जिद का रूप दे देते हैं। इसी प्रकार एक अन्य उदाहरण शिकारपुर व धुलावट गांव का भी आया है।
इस्लाम अपनाने के लिए किया जाता प्रताड़ित
 
 
इस सबके बीच पुन्हाना के पास नई गांव से कन्वर्जन की साजिशों का भी पता चला। यहां के एक हिन्दु युवक को मुस्लिम बनाया गया और अब उसकी मां को भी इस्लाम अपनाने के लिये प्रताड़ित किया जा रहा है। यह भी बात सामने आई है कि गांव उटावड़ में कुख्यात आतंकवादी हाफिज सईद द्वारा दिए गए पैसों से एक बड़ी मस्जिद बनाई गयी जो सलमान नाम के व्यक्ति के माध्यम से बनवाई गयी। इस समय यह सलमान किसी अन्य मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की गिरफ्त में है। कुल मिलाकर हरियाणा के इस जिले में मुसलमानों का इतना आतंक व खौफ है, जिसके चलते हिन्दुओं का जीना दूभर हो रहा है। इन्हीं कारणों के चलते हिन्दू पलायन तक को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में यह समिति हिन्दू समुदाय की सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार को जागरूक करते हुए अपील करती है कि सरकार हिन्दुओं की सुरक्षा का उचित प्रबन्ध करे ताकि उनमें एक विश्वास उत्पन्न हो सके। पीड़ितों से चर्चा करते समय एक ही बात सामने आई कि वे प्रशासन पर विश्वास खो बैठे हैं। इसलिये उनमें से कुछ लोग पलायन की सोच रहे हैं। ऐसी स्थिति घातक है। इन परिस्थितियों को वर्तमान हरियाणा सरकार ही ठीक कर सकती है। इसलिए यह रिपोर्ट हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल जी को भेज दी गई है। विश्व हिंदू परिषद विश्वास करती है कि मुख्यमंत्री महोदय इस रिपोर्ट की अनुशंसाओं को अति शीघ्र लागू करके मेवात को राष्ट्र विरोधी व हिंदू विरोधी गतिविधियों से मुक्त कराएंगे। समिति ने कुछ अनुशंसा भी की हैं जो इस प्रकार हैं—
  1. क्षेत्र के समस्त पुलिस प्रसासन को बदल कर इनकी जगह कर्मठ व किसी दबाव में न झुकने वाले अधिकारियों को लाया जाये।

  2.  जिस क्षेत्र में हिन्दुओं पर अत्याचार होते हैं, वहां के थानाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए।

  3. मेवात में मदरसों,—मस्जिदों और मजारों से चल रही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की एनआईए से जांच कराई जाए। हवाला के रास्ते आतंकवादियों का पैसा मस्जिदों के बनाने और अवैध हथियारों के जखीरे खड़ा करने में हो रहा है, यह भी जांच में शामिल हो।

  4. पुलिस पर अविश्वास के कारण वहां पर अर्ध सैनिक बलों की उपस्थिति आवश्यक है। अतः मुस्लिम बहुल इलाकों मे अर्ध सैनिक बलों का केन्द्र बनना चाहिये, चाहे उसके लिये भूमि अधिग्रहण करनी पड़े।

  5.  हिंदुओं की व्यक्तिगत, सामाजिक व धार्मिक सम्पत्ति पर अवैध कब्जों की जांच होनी चाहिये और उनको जिहादियों के चंगुल से अविलम्ब मुक्त कराना चाहिए।
मेवात में हाल ही में हुए हिन्दुओं पर हमले
  • 16 अप्रैल को बिछौर गांव में अंकित गौतम के परिवार पर सैकड़ों लोगों ने हथियार लेकर हमला किया। पुलिस के मामला तो दर्ज किया पर अपराधी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं।

  • 18 अप्रैल को नूंह खंड के चंदेनी गांव के दलित चौकीदार के घर पर सैकड़ों लोगों ने एकत्र होकर पीटा और मारने की धमकी दी। पुलिस ने दबाव बनाकर मामला रफादफा करा दिया।

  • 21 अप्रैल को उलेटा गांव का एक दलित युवक अपने मोबाइल के पैसे मांगने मुस्लिम व्यक्ति के पास गया तो उसने झगड़ा किया और जातिसूचक शब्द कहकर उसे खूब पीटा। फिर करीब 60 लोगों ने उसके घर आकर हमला किया। पुलिस ने मामला तो पंजीकृत किया लेकिन समझौते का दबाव बनाया। पुलिस की लचर कार्य पद्धति से अपराधियों को जमानत मिल गई। अब वे फिर दलित परिवार को गांव छोड़ने की धमकी दे रहे हैं।

  • 28 अप्रैल को पुन्हाना में मोक्ष धाम के महंत रामदास महाराज पर पहले मुस्लिमों ने अभ्रद टिप्पणी की फिर झगड़ा करके कपड़े फाड़ दिए। काफी प्रयास के बाद पुलिस ने मामला पंजीकृत किया। संत के साथ हुई इस अभ्रदता के विरोध में स्थानीय लोगों ने जब प्रदर्शन किया तो उन पर ही धार्मिक उन्माद, दंगा फैलाने के आरोप व लॉकडाउन के उल्लंघन में गैर जमानती मामला बना दिया गया।

  • 12 मई को एक हिन्दू लड़के द्वारा चोटी रखने पर टिप्पणी के कारण हुए झगड़े में पहले चार—पांच मुस्लिम लड़कों ने उसकी पिटाई की। जब घरवालों ने इसका बीच—बचाव किया तो आस—पास के एक हजार से अधिक लोगों ने उक्त परिवार वालों को चारों तरफ से घेर लिया। उन पर जबरदस्त पथराव और फायरिंग तक की गई।

  • 13 मई की सुबह जब दो हिन्दू युवक बैंक में अपना काम करने जा रहे थे तो उन्हें 10—15 लड़कों ने ईंट—पत्थर और लाठी—डंडों से मारा। इसमें से एक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।